ईरान ने अपने दक्षिणी शहर शिराज के पास एक उन्नत चीनी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। शुरुआती रिपोर्ट्स में इसे अमेरिकी MQ-9 Reaper बताया गया था, लेकिन बाद में तस्वीरों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि यह वास्तव में चीन का ‘Wing Loong II’ ड्रोन था। इस खुलासे के बाद क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि यह ड्रोन आखिर किसका था। विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान के पास इस मॉडल का ड्रोन मौजूद नहीं है, जबकि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात दोनों ही इस ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि खाड़ी के ये देश परोक्ष रूप से इस संघर्ष में शामिल हो सकते हैं।
रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि चीन ने ईरान को कुछ ड्रोन जरूर उपलब्ध कराए थे, लेकिन वे ‘कामिकेज’ श्रेणी के थे, जो टारगेट से टकराकर नष्ट हो जाते हैं। Wing Loong II जैसे री-यूजेबल ड्रोन ईरान के बेड़े का हिस्सा नहीं माने जाते। इससे संदेह और मजबूत हो रहा है कि यह ड्रोन बाहर से संचालित किया गया था।
इसी बीच, मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच यह भी दावा किया गया है कि सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी है, जहां से ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, ईरान ने खाड़ी देशों पर अपने हमले भी तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएई पर हजारों की संख्या में मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिनमें से ज्यादातर को एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया। सऊदी अरब भी सैकड़ों हमलों का सामना कर चुका है, जिसमें उसकी तेल कंपनी अरामको को भी निशाना बनाया गया।
हालांकि अब तक न तो सऊदी अरब और न ही यूएई ने इस ड्रोन से जुड़े किसी ऑपरेशन की जिम्मेदारी ली है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इस घटना ने संकेत दे दिए हैं कि खाड़ी देश जल्द ही इस टकराव में खुलकर सामने आ सकते हैं।




