टाटा समूह से जुड़े चैरिटेबल ट्रस्ट में इन दिनों बड़ा विवाद सामने आया है। TVS मोटर के चेयरमैन एमेरिटस और टाटा ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने 4 अप्रैल को अपने ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसकी वजह निजी और व्यावसायिक व्यस्तताओं को बताया है, लेकिन यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब ट्रस्ट की नियुक्तियों को लेकर विवाद तेज हो चुका है।
दरअसल, एक दिन पहले ही टाटा ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने ट्रस्ट बोर्ड की संरचना और कुछ सदस्यों की पात्रता पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने चैरिटी कमिश्नर के पास याचिका दायर कर दावा किया कि बोर्ड में शामिल कुछ ट्रस्टी ट्रस्ट डीड में तय शर्तों को पूरा नहीं करते।
मिस्त्री ने खास तौर पर वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की नियुक्ति पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि 1923 की मूल ट्रस्ट डीड के अनुसार, ट्रस्टी बनने के लिए पारसी जोरोस्ट्रियन होना और नवसारी क्षेत्राधिकार का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। आरोप है कि ये दोनों शर्तें संबंधित सदस्यों पर लागू नहीं होतीं, जिससे उनकी नियुक्ति ही सवालों के घेरे में आ जाती है।
यह विवाद तब और गहराया जब मिस्त्री का खुद का कार्यकाल रिन्यू नहीं किया गया। अक्टूबर 2025 में हुए सर्कुलर रेजोल्यूशन में उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया था। इस मतदान में नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने विरोध में वोट किया, जबकि जहांगीर जहांगीर और डारियस खंबाटा ने समर्थन दिया। जिमी टाटा ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
मिस्त्री का तर्क है कि यदि उन ट्रस्टियों के वोट हटा दिए जाएं जिनकी पात्रता पर सवाल है, तो उनके खिलाफ लिया गया फैसला स्वतः अमान्य हो जाएगा। उन्होंने ट्रस्ट के कामकाज पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई, जो पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि ट्रस्ट के रिकॉर्ड और मीटिंग की मिनट बुक की जांच की जाए और सभी ट्रस्टियों से पात्रता संबंधी हलफनामा लिया जाए। इसके साथ ही मिस्त्री ने यह आशंका भी जताई है कि यदि कुछ ट्रस्टियों को अयोग्य घोषित किया जाता है, तो ट्रस्ट में न्यूनतम सदस्यों की संख्या पूरी नहीं रह जाएगी। ऐसे में उन्होंने एक प्रशासक नियुक्त करने की मांग की है।
यह ट्रस्ट, जिसे हीराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम से जाना जाता है, टाटा परिवार के शुरुआती दौर में स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य नवसारी के पारसी समुदाय के कल्याण और धार्मिक गतिविधियों को समर्थन देना है, और इसकी शर्तें काफी सख्त मानी जाती हैं।
कॉर्पोरेट और कानूनी हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देखा जा रहा है, क्योंकि इससे टाटा समूह से जुड़े ट्रस्टों की कार्यप्रणाली और गवर्नेंस पर बड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।




