करीब 40 दिनों तक चले सैन्य तनाव के बाद अमेरिका और ईरान ने फिलहाल 2 हफ्तों के लिए युद्धविराम पर सहमति बना ली है। इस अस्थायी समझौते के तहत दोनों पक्ष अपने हमले रोकेंगे, जबकि क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में आगे बातचीत की तैयारी भी शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस फैसले को लेकर कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के आर्मी चीफ की अपील के बाद यह कदम उठाया गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि इस समझौते को अंतिम रूप देने में चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।
इस्लामाबाद में होगी अगली बड़ी बातचीत
सीजफायर के बाद अब 10 अप्रैल से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच औपचारिक वार्ता शुरू होगी। माना जा रहा है कि यह बैठक आगे के स्थायी समाधान की दिशा तय कर सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट खुलने से राहत, लेकिन शर्तों के साथ
समझौते के तहत अगले दो हफ्तों तक होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू होगी। हालांकि यह पूरी तरह स्वतंत्र नहीं होगी, बल्कि ईरानी सेना की निगरानी में ‘कंट्रोल्ड ट्रांजिट’ के जरिए संचालित होगी। इस रास्ते के खुलने से वैश्विक सप्लाई चेन को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि संघर्ष के दौरान यहां से गुजरने वाली शिपिंग लगभग ठप हो गई थी। ईरान ने प्रस्ताव रखा है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से लगभग 20 लाख डॉलर प्रति जहाज शुल्क लिया जाएगा, जिसे ओमान के साथ साझा किया जाएगा।
बाजारों पर दिखा असर
होर्मुज स्ट्रेट खुलने की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेजी से गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में 15 से 16 प्रतिशत तक कमी आई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत फिलहाल अस्थायी हो सकती है।
ट्रम्प की चेतावनी के बाद बदले हालात
सीजफायर से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित नहीं की गई तो अमेरिका कड़ा सैन्य कदम उठा सकता है, जिसमें महत्वपूर्ण ढांचे पर हमले भी शामिल हो सकते हैं।
ईरान का 10 सूत्रीय प्रस्ताव बना चर्चा का केंद्र
युद्धविराम से पहले ईरान ने अमेरिका के सामने 10 बिंदुओं का एक प्रस्ताव रखा था, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच सहमति बनने के संकेत मिले हैं। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दावा किया है कि समझौता उसकी शर्तों के अनुरूप हुआ है।
इस प्रस्ताव में प्रमुख मांगें शामिल थीं:
- सभी सैन्य हमलों का पूर्ण अंत
- आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना
- फ्रीज की गई संपत्तियों की वापसी
- मिडिल ईस्ट से अमेरिकी सैनिकों की वापसी
- युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई
- क्षेत्रीय संघर्षों पर रोक
इसके अलावा ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखने और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की बात भी रखी।
लेबनान समेत अन्य क्षेत्रों पर भी लागू होगा सीजफायर
यह युद्धविराम केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लेबनान जैसे क्षेत्रों में भी लागू होगा। इससे क्षेत्रीय स्तर पर हिंसा में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थायी समाधान अभी दूर
हालांकि 2 हफ्तों का यह सीजफायर एक राहत जरूर लेकर आया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक अस्थायी कदम है। आने वाली बातचीत में ही यह साफ होगा कि दोनों देश स्थायी शांति की दिशा में कितनी गंभीरता से आगे बढ़ते हैं।




