सीजफायर बढ़ाने की तैयारी: अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ सकती है युद्धविराम अवधि, पर्दे के पीछे तेज हुई कूटनीति

सीजफायर बढ़ाने की तैयारी: अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ सकती है युद्धविराम अवधि, पर्दे के पीछे तेज हुई कूटनीति

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। दोनों देशों के बीच लागू मौजूदा युद्धविराम (सीजफायर), जिसकी अवधि 22 अप्रैल 2026 को समाप्त होनी है, उसे आगे बढ़ाने पर गंभीर विचार चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह सीजफायर कम से कम दो सप्ताह के लिए और बढ़ाया जा सकता है, जिससे क्षेत्र में बढ़ते टकराव को कुछ समय के लिए टाला जा सके।

हालांकि सार्वजनिक रूप से बातचीत में ज्यादा प्रगति नहीं दिखी, लेकिन बैकचैनल डिप्लोमेसी ने अहम भूमिका निभाई है। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देश सिद्धांत रूप में आगे वार्ता जारी रखने के लिए तैयार हो गए हैं, हालांकि अभी तक बैठक की तारीख और स्थान तय नहीं हुआ है। इससे संकेत मिलते हैं कि दोनों पक्ष टकराव से बचने के रास्ते तलाश रहे हैं। इससे पहले इस्लामाबाद में आयोजित दूसरे दौर की शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। इस बातचीत में जेडी वेंस और मोहम्मद बाघेरी कलीबाफ के बीच करीब 21 घंटे तक लंबी चर्चा हुई, लेकिन अंत में कोई समझौता नहीं हो पाया।

बातचीत के दौरान अमेरिका ने ईरान के सामने कई कड़े प्रस्ताव रखे थे। इनमें परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना, यूरेनियम संवर्धन रोकना और हमास व हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को आर्थिक सहायता बंद करना शामिल था। ईरान ने इन शर्तों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पहले अमेरिका को भरोसे का माहौल बनाना होगा। ईरान की ओर से यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि वह किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है। ईरानी प्रतिनिधियों ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर उन पर हमला हुआ, तो वे भी उसी तरह जवाब देंगे। इस बयान से साफ है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अब भी गहरा बना हुआ है।

इसके बावजूद, मौजूदा हालात में सीजफायर को आगे बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं। कूटनीतिक स्तर पर लगातार हो रही बातचीत ने युद्ध के खतरे को फिलहाल टालने में मदद की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह अस्थायी शांति बनी रहती है, तो भविष्य में स्थायी समाधान की दिशा में भी रास्ता खुल सकता है।

भले ही आधिकारिक समझौता अभी दूर नजर आ रहा हो, लेकिन दोनों देशों के बीच संवाद की कोशिशें जारी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह अस्थायी युद्धविराम स्थायी शांति में बदल पाता है या नहीं।