“चंडीगढ़ नगर निगम का 3 करोड़ का प्लान विवादों में, बाहरी विशेषज्ञों की नियुक्ति पर उठे सवाल”

“चंडीगढ़ नगर निगम का 3 करोड़ का प्लान विवादों में, बाहरी विशेषज्ञों की नियुक्ति पर उठे सवाल”

चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा कार्यप्रणाली सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बाहरी विशेषज्ञों को नियुक्त करने के फैसले ने नई बहस छेड़ दी है। आलोचकों का कहना है कि जब निगम के पास पहले से ही इंजीनियरों की टीम मौजूद है, तो फिर बाहरी विशेषज्ञों पर इतना खर्च क्यों किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, निगम ने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) बनाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत विभिन्न क्षेत्रों के पांच विशेषज्ञों को नियुक्त किया जाएगा। इन विशेषज्ञों की सेवाओं पर दो साल में लगभग 2.92 करोड़ रुपये खर्च होंगे। औसतन हर विशेषज्ञ को करीब ढाई लाख रुपये मासिक वेतन दिया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट के लिए मुंबई स्थित एमएस च्वाइस कंसल्टेंट्स सर्विसेज प्राइवेट लि.  को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो इन विशेषज्ञों की नियुक्ति करेगी। निगम का दावा है कि इस यूनिट के जरिए जल आपूर्ति, सीवरेज, स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन जैसी सेवाओं की निगरानी और गुणवत्ता में सुधार होगा।

हालांकि, इस फैसले पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि पिछले साल निगम की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। उस समय कर्मचारियों के वेतन तक के लिए पेंशन फंड का सहारा लेना पड़ा था और खर्च कम करने के लिए बड़े पैमाने पर छंटनी भी की गई थी।

अब जब वित्तीय हालात कुछ बेहतर हुए हैं, तो दोबारा बड़े खर्च किए जाने पर कई लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि यही काम PMU के जरिए किया जाएगा, तो फिर निगम के मौजूदा इंजीनियरों और पब्लिक हेल्थ विभाग की भूमिका क्या रह जाएगी, और उन पर होने वाला भारी खर्च कैसे उचित ठहराया जाएगा।