AI निवेश के चलते Meta और Microsoft में बड़ी छंटनी, 23,000 नौकरियों पर खतरा

AI निवेश के चलते Meta और Microsoft में बड़ी छंटनी, 23,000 नौकरियों पर खतरा

टेक इंडस्ट्री में एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल बनता दिख रहा है। बड़ी कंपनियां तेजी से बदलते टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स के साथ खुद को ढालने के लिए अपने खर्चों में कटौती कर रही हैं, जिसका सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ रहा है। ताजा घटनाक्रम में Meta और Microsoft के फैसलों से करीब 23,000 नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।

सबसे बड़ी वजह इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ता खर्च माना जा रहा है। Microsoft वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर विस्तार में भारी निवेश कर रही है, खासकर जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में। वहीं Meta भी अपने AI प्रोजेक्ट्स और नई साझेदारियों पर रिकॉर्ड बजट खर्च करने की तैयारी में है। इन बड़े निवेशों को संतुलित करने के लिए कंपनियां अन्य खर्चों में कटौती कर रही हैं।

Microsoft की बात करें तो कंपनी ने अपने अमेरिकी कर्मचारियों के लिए वॉलंटरी बायआउट स्कीम पेश की है। इस योजना के तहत लगभग 7% वर्कफोर्स, यानी करीब 8,750 कर्मचारियों को ऑफर मिल सकता है। खास तौर पर उन कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनकी उम्र और कंपनी में बिताए गए साल मिलाकर 70 या उससे अधिक होते हैं। यह Microsoft का अब तक का सबसे बड़ा बायआउट कदम माना जा रहा है।

दूसरी ओर Meta भी अपने स्टाफ में बड़ी कटौती की तैयारी कर रही है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वह लगभग 10% वर्कफोर्स घटा सकती है, जिससे करीब 8,000 कर्मचारियों पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, Meta ने फिलहाल 6,000 खाली पदों को भी न भरने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रक्रिया मई के दूसरे हिस्से से शुरू हो सकती है।

इन लगातार आ रही छंटनी की खबरों ने कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। Meta में पहले भी कई राउंड की छंटनी हो चुकी है, जिससे कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना और गहरी हो गई है। अब सभी की नजर 29 अप्रैल को आने वाले दोनों कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी है, जिससे भविष्य की रणनीति का अंदाजा लगेगा।