पंजाब में मिल्कफेड पंजाब के अधीन चल रहे वेरका मिल्क और कैटल फीड प्लांटों के आउटसोर्स कर्मचारियों में असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। लंबे समय से लंबित मांगों और कथित वादाखिलाफी से नाराज कर्मचारियों ने बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में डेयरी सेक्टर की गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना है।
यूनियन के राज्य प्रधान पवनदीप सिंह ने राज्य स्तरीय बैठक के बाद कहा कि बार-बार भरोसे के बावजूद प्रबंधन और सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है और अब वे संघर्ष के लिए मजबूर हो गए हैं।
9 मई को रोष रैलियां, 13 से घेराव
यूनियन ने घोषणा की है कि 9 मई को पंजाब भर के सभी वेरका मिल्क और कैटल फीड प्लांटों के बाहर गेट रैलियां आयोजित की जाएंगी, ताकि कर्मचारियों को एकजुट किया जा सके। इसके बाद 13 मई से मोहाली स्थित प्लांट का अनिश्चितकालीन घेराव शुरू किया जाएगा।
यूनियन का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और इसे चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा।
वर्षों से लंबित हैं मांगें
कर्मचारियों का आरोप है कि चंडीगढ़ स्थित मुख्य कार्यालय द्वारा उनकी समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। पिछली बैठकों में समाधान का आश्वासन जरूर मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं दिखा।
यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार और प्रबंधन द्वारा गठित उच्च स्तरीय कमेटी की एक भी बैठक न होना इस बात का संकेत है कि कर्मचारियों के मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
कम वेतन और असुरक्षा से परेशान कर्मचारी
यूनियन के अनुसार, कई कर्मचारी पिछले 10 से 15 वर्षों से कम वेतन पर काम कर रहे हैं और उनके भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है। इससे उनमें असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि आउटसोर्स व्यवस्था के कारण उन्हें न तो स्थायी नौकरी की सुरक्षा मिल रही है और न ही वेतन व अन्य लाभों में समानता।
प्रमुख मांगें क्या हैं?
- आउटसोर्स कर्मचारियों को विभाग में मर्ज कर नियमित किया जाए
- श्रम कानूनों के तहत मिलने वाला बोनस दिया जाए
- योग्य कर्मचारियों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार पदोन्नति मिले
- वेतन और सेवा शर्तों में सुधार किया जाए
सरकार को चेतावनी
यूनियन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन और राज्य सरकार की होगी।
संभावित असर
यदि आंदोलन लंबा चला, तो वेरका डेयरी उत्पादों की सप्लाई पर असर पड़ सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्रबंधन इस बढ़ते विवाद को कैसे संभालते हैं और क्या 13 मई से पहले कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।




