हरियाणा कांग्रेस की राजनीति में लंबे समय से चली आ रही अंदरूनी खींचतान के बीच गुरुग्राम में निकली सद्भाव यात्रा ने पार्टी को नया राजनीतिक संदेश देने का काम किया। कांग्रेस नेता और हिसार के पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की पहल पर शुरू हुई इस यात्रा के अंतिम चरण में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी ने पूरे कार्यक्रम को खास बना दिया। राहुल गांधी ने न केवल बृजेंद्र सिंह की खुलकर सराहना की, बल्कि मंच से पार्टी नेताओं को एकजुट होकर जनता के बीच जाने का संदेश भी दिया।
करीब सात महीने पहले जींद के नरवाना क्षेत्र के दनौंदा गांव से शुरू हुई इस यात्रा को शुरुआत में कांग्रेस के भीतर गंभीरता से नहीं लिया गया था। कई नेताओं को लगता था कि यह यात्रा पार्टी संगठन को मजबूत करने में ज्यादा असर नहीं छोड़ पाएगी। लेकिन यात्रा के समापन अवसर पर गुरुग्राम में जो तस्वीर सामने आई, उसने हरियाणा कांग्रेस की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
खांडसा चौक से निकली यात्रा में राहुल गांधी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद और हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष Rao Narender Singh सहित कई बड़े नेता एक मंच पर दिखाई दिए। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि कांग्रेस की ओर से एकता का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था।
करीब 800 मीटर लंबे इस रोड शो के दौरान राहुल गांधी अलग-अलग नेताओं से बातचीत करते नजर आए। कभी वह बृजेंद्र सिंह के साथ चलते दिखे तो कभी दीपेंद्र हुड्डा और अन्य नेताओं के साथ चर्चा करते हुए दिखाई दिए। उनके हावभाव और बातचीत को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की व्याख्याएं की जा रही हैं।
मंच से संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने बृजेंद्र सिंह को “हरियाणा का बब्बर शेर” कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जनता से सीधा संवाद ही कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे कार्यक्रम पार्टी को जमीन पर मजबूत करने में मदद करते हैं। राहुल ने कांग्रेस के युवा नेताओं से देशभर में इसी तरह की यात्राएं निकालने की अपील करते हुए कहा कि जनता के बीच लगातार मौजूद रहना ही राजनीति की असली ताकत है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में संगठनात्मक एकजुटता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को आपसी मतभेद भुलाकर पार्टी और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए साथ आना होगा। सूत्रों के अनुसार मंच से उतरने के बाद भी राहुल गांधी ने कई वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग बातचीत कर संगठन को मजबूत करने और चुनावी चुनौतियों का मिलकर सामना करने पर चर्चा की।
इस कार्यक्रम में कई ऐसे नेता भी पहुंचे, जो अब तक सद्भाव यात्रा से दूरी बनाए हुए थे। इससे यह संदेश गया कि राहुल गांधी की मौजूदगी ने हरियाणा कांग्रेस के विभिन्न गुटों को कम से कम एक मंच पर लाने का काम किया। हालांकि कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा की अनुपस्थिति को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चाएं गर्म रहीं। बताया गया कि वह अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण शामिल नहीं हो सकीं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे अलग नजरिए से भी देख रहे हैं।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला के बीच मंच पर हुई लंबी बातचीत ने भी सियासी अटकलों को हवा दी। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व अब हरियाणा में संगठनात्मक एकजुटता का स्पष्ट संदेश देना चाहता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि सद्भाव यात्रा का समापन कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि इसके जरिए कांग्रेस ने यह दिखाने की कोशिश की कि पार्टी अंदरूनी मतभेदों के बावजूद चुनावी लड़ाई के लिए खुद को तैयार कर रही है। राहुल गांधी की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया है। (फोटो जागरण )


