मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने पंजाब की राजनीति में नया भूचाल खड़ा कर दिया है। शनिवार सुबह चंडीगढ़, दिल्ली और गुरुग्राम समेत कई स्थानों पर ईडी की टीम ने एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई इतनी बड़े स्तर पर की गई कि केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों के साथ करीब 20 गाड़ियों का काफिला अलग-अलग परिसरों तक पहुंचा।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फर्जी जीएसटी खरीद बिल, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसी को संदेह है कि कुछ फर्जी कंपनियों के जरिए बड़े स्तर पर लेनदेन दिखाकर टैक्स लाभ हासिल किए गए और बाद में इस धन को विभिन्न कारोबारी चैनलों के माध्यम से घुमाया गया।
ईडी की टीम ने चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-2 आवास सहित कई परिसरों में दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी ने कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कारोबारी रिकॉर्ड भी अपने कब्जे में लिए हैं। हालांकि आधिकारिक रूप से अभी तक ईडी ने विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।
जांच में कथित तौर पर मोबाइल फोन कारोबार से जुड़े फर्जी खरीद बिलों का मामला सामने आया है। आरोप है कि दिल्ली की कई गैर-मौजूद कंपनियों के नाम पर खरीद दिखाई गई और उसके आधार पर करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया। एजेंसी को यह भी शक है कि निर्यात के नाम पर कुछ धनराशि दुबई के जरिए वापस भारत लाई गई, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
राजनीतिक रूप से इस कार्रवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले एक साल में संजीव अरोड़ा से जुड़े परिसरों पर यह तीसरी और एक महीने के भीतर दूसरी छापेमारी बताई जा रही है। इससे पहले भी पंजाब के कई कारोबारियों और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के यहां ईडी कार्रवाई कर चुकी है।
हाल ही में अशोक मित्तल से जुड़े परिसरों पर भी छापेमारी हुई थी, जिसके बाद राज्य की राजनीति में काफी बयानबाजी हुई थी। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भाजपा ईडी के जरिए पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी के नेताओं को डराने की कोशिश कर रही है। मान ने कहा कि एक साल में कई बार छापेमारी होने के बावजूद कुछ भी साबित नहीं हुआ और पंजाब किसी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
वहीं पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने भी भाजपा पर राजनीतिक साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनावों से पहले जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश करती है। चीमा ने दावा किया कि पंजाब की जनता इस राजनीति को समझती है और लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
दूसरी ओर Bikram Singh Majithia ने कहा कि लगातार सामने आ रहे मामलों से यह स्पष्ट है कि राज्य में आर्थिक अनियमितताओं की गहराई से जांच की जरूरत है। उन्होंने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग खुद को ईमानदारी की राजनीति का चेहरा बताते थे, अब उनके करीबी लगातार जांच एजेंसियों के घेरे में आ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में ईडी की लगातार कार्रवाइयों से राज्य की राजनीति और अधिक गर्मा सकती है। एक ओर आम आदमी पार्टी इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” के रूप में पेश कर रही है, वहीं भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान का हिस्सा बता रही है।
सूत्रों के मुताबिक ईडी की जांच अब कथित मनी ट्रेल, प्रॉपर्टी निवेश, निर्यात कारोबार और कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन तक पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि पंजाब की राजनीति में एजेंसियों की कार्रवाई आने वाले समय में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती है।




