चंडीगढ़ में मुफ्त बिजली-पानी की नई बहस तेज: सांसद मनीष तिवारी ने जरूरतमंद परिवारों को राहत देने की उठाई मांग

चंडीगढ़ में मुफ्त बिजली-पानी की नई बहस तेज: सांसद मनीष तिवारी ने जरूरतमंद परिवारों को राहत देने की उठाई मांग

चंडीगढ़ में बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्चों के बीच अब मुफ्त बिजली और पानी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शहर के सांसद मनीष तिवारी ने यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए 300 यूनिट मुफ्त बिजली और 20 हजार लीटर मुफ्त पानी उपलब्ध करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में यह कदम हजारों परिवारों को बड़ी राहत दे सकता है।

चार पन्नों के विस्तृत पत्र में सांसद ने तर्क दिया कि लगातार बढ़ रही महंगाई, घरेलू खर्च और जरूरी सेवाओं की बढ़ती कीमतों ने निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। ऐसे में प्रशासन को राहत पैकेज के तौर पर बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं पर सब्सिडी देने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

मनीष तिवारी ने प्रशासन के वित्तीय आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि चंडीगढ़ प्रशासन के पास इस योजना को लागू करने की पर्याप्त क्षमता है। उन्होंने बताया कि बिजली वितरण के निजीकरण के बाद प्रशासन पर बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ा वित्तीय बोझ काफी कम हुआ है। उनके अनुसार वर्ष 2024-25 में बिजली एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र पर 1027.87 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि वर्ष 2026-27 के अनुमानित बजट में यह राशि घटकर करीब 171.86 करोड़ रुपये रह गई है। इसी अंतर का उपयोग जनता को राहत देने में किया जा सकता है।

सांसद ने सुझाव दिया कि प्रशासन सितंबर या अक्टूबर 2026 में सप्लीमेंट्री ग्रांट के माध्यम से 856 से 1000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त राशि की व्यवस्था कर सकता है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाए तो जुलाई 2026 से ही यह योजना लागू की जा सकती है।

मुफ्त पानी के मुद्दे पर भी उन्होंने नगर निगम के पुराने प्रस्ताव का जिक्र किया। तिवारी ने कहा कि 11 मार्च 2024 को नगर निगम के जनरल हाउस में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने बहुमत से मुफ्त पानी देने का प्रस्ताव पारित किया था। हालांकि बाद में प्रशासक ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, लेकिन निगम ने दोबारा इसे पारित कर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी थी।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि केवल 20 हजार रुपये मासिक आय से कम वाले परिवारों को यह सुविधा दी जाए तो प्रशासन पर सालाना लगभग 15 से 20 करोड़ रुपये का ही अतिरिक्त भार पड़ेगा, जो कुल बजट की तुलना में काफी कम है।

सांसद ने मनीमाजरा की 24×7 जल परियोजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि करीब 166 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद यह योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी और फिलहाल इसका सीएजी ऑडिट चल रहा है। उन्होंने प्रशासन से जल प्रबंधन व्यवस्था में सुधार और रिसाव रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग भी की।

हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था पहले से घाटे में चल रही है। नगर निगम को पानी सप्लाई से हर साल लगभग 100 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। इसके पीछे पुरानी पाइपलाइनें और करीब 30 प्रतिशत पानी का रिसाव मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि यदि पानी पूरी तरह मुफ्त कर दिया गया तो वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और क्या आने वाले महीनों में चंडीगढ़ के लोगों को बिजली और पानी के मोर्चे पर कोई बड़ी राहत मिलती है या नहीं।