चंडीगढ़ में औद्योगिक गतिविधियों को नई रफ्तार देने की दिशा में यूटी प्रशासन एक अहम नीति लाने की तैयारी कर रहा है। शहर में सीमित जमीन और बढ़ती कारोबारी जरूरतों को देखते हुए प्रशासन इंडस्ट्रियल प्लॉट्स की फ्रेगमेंटेशन पॉलिसी लागू करने पर विचार कर रहा है। इस प्रस्ताव के तहत एक कनाल या उससे बड़े औद्योगिक प्लॉट्स को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित करने की अनुमति दी जा सकती है, जिससे एक ही परिसर में कई कारोबारी इकाइयां संचालित हो सकेंगी।
नई नीति लागू होने के बाद औद्योगिक संपत्तियों में बहु-स्वामित्व का रास्ता खुलेगा। यानी एक बड़े प्लॉट में अलग-अलग कारोबारी अपनी यूनिट स्थापित कर सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे शहर में उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा। खास तौर पर छोटे उद्योगों, स्टार्टअप्स और सेवा क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें महंगे बड़े प्लॉट खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
फिलहाल चंडीगढ़ में केवल अमलगमेशन मॉडल लागू है, जिसमें दो या अधिक साथ लगते प्लॉट्स को जोड़कर बड़ा प्लॉट बनाया जा सकता है। लेकिन किसी प्लॉट को छोटे हिस्सों में बांटने की अनुमति नहीं है। मौजूदा नियमों के तहत ऐसा करने पर प्रशासन मिसयूज और उल्लंघन के नोटिस जारी करता है। चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में भी औद्योगिक भूमि उपयोग को लेकर कड़े प्रावधान मौजूद हैं।
प्रशासन अब इन नियमों में व्यावहारिक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित पॉलिसी के जरिए लाइट इंडस्ट्री, सर्विस सेक्टर और अन्य मिश्रित गतिविधियों को एक ही परिसर में संचालित करने की छूट मिल सकती है। इससे उद्योगों के लिए साझा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में भी आसानी होगी।
सूत्रों के अनुसार यूटी प्रशासन ने इस संबंध में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से भी मंजूरी मांगी है। प्रशासन पंजाब मॉडल का अध्ययन कर रहा है, जहां मोहाली समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉट फ्रेगमेंटेशन की नीति पहले से लागू है। इसी सुविधा के चलते चंडीगढ़ के कई कारोबारी मोहाली की ओर रुख कर चुके हैं।
चंडीगढ़ में जमीन की कमी लंबे समय से बड़ी चुनौती बनी हुई है। यही वजह है कि प्रशासन अब पारंपरिक विस्तार मॉडल की बजाय एफएआर बढ़ाने, बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन और मिश्रित भूमि उपयोग जैसे विकल्पों पर भी काम कर रहा है। फ्रेगमेंटेशन पॉलिसी को इसी व्यापक सुधार योजना का हिस्सा माना जा रहा है।
अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो यह चंडीगढ़ की औद्योगिक नीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे निवेश बढ़ने, नए उद्योग स्थापित होने और रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
व्यापार मंडल के चेयरमैन चरणजीव सिंह ने कहा कि पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी व्यापार और उद्योगों के हित में सुविधाएं और नीतियां लागू की जानी चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा समय में कारोबारी कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जिनका समाधान जरूरी है।




