अवैध रेहड़ी-फड़ी कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन, चंडीगढ़ प्रशासन की जवाबदेही तय

अवैध रेहड़ी-फड़ी कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन, चंडीगढ़ प्रशासन की जवाबदेही तय

चंडीगढ़ में अवैध वेंडरों और वेंडिंग जोन व्यवस्था को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट की सख्त निगरानी में पहुंच चुका है। मंगलवार को होने वाली अहम सुनवाई में नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार, मेयर एवं अपीलेट अथॉरिटी सौरभ जोशी और ग्रिवांस रिड्रेसल एंड डिस्प्यूट्स रेजोल्यूशन कमेटी (जीआरडीआरसी) की चेयरपर्सन को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी।

दरअसल, शहर में लंबे समय से अवैध वेंडिंग, अतिक्रमण और वेंडिंग जोन की अव्यवस्थित स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए पूछा था कि जब नियम और पॉलिसी पहले से मौजूद हैं तो फिर अवैध कब्जों और बिना अनुमति कारोबार पर रोक क्यों नहीं लगाई जा सकी। कोर्ट ने निगम द्वारा दाखिल हलफनामे पर भी असंतोष जताया था और साफ कहा था कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद निगम प्रशासन अचानक सक्रिय नजर आया। वर्षों से लंबित पड़े करीब 400 मामलों को महज चार दिनों में निपटा दिया गया। इनमें बड़ी संख्या उन मामलों की थी जिन पर स्टे लगा हुआ था और निगम कार्रवाई नहीं कर पा रहा था। अब ज्यादातर मामलों में स्टे हटाकर आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ किया गया है।

अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शहर से अवैध वेंडरों को हटाया जाए और पंजीकृत वेंडरों को तय वेंडिंग जोन में व्यवस्थित तरीके से बैठाया जाए। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि शहर के कई वेंडिंग जोन अब तक पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए हैं। कई स्थानों पर पीने के पानी, सार्वजनिक शौचालय, बिजली और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। कोर्ट की सख्ती के बाद अब निगम ने रोड विंग के जूनियर इंजीनियरों को नोडल अधिकारी नियुक्त कर इन सुविधाओं की जिम्मेदारी सौंपी है।

वहीं, कार्रवाई को लेकर निगम की कार्यशैली पर सवाल भी उठ रहे हैं। कई वेंडरों का आरोप है कि कार्रवाई चुनिंदा लोगों के खिलाफ ही की जा रही है जबकि शहर की प्रमुख और व्यस्त मार्केटों में नियमों का खुला उल्लंघन करने वालों पर कोई असर नहीं दिख रहा। सेक्टर-9, सेक्टर-22 और अन्य प्राइम लोकेशनों पर वर्षों से अतिरिक्त जगह घेरकर कारोबार करने वाले कई वेंडरों पर कार्रवाई न होने से पक्षपात के आरोप लगने लगे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, निगम की एंफोर्समेंट टीम इन दिनों रात के समय सड़क किनारे छोड़ा गया सामान जब्त कर रही है। लेकिन छोटे वेंडरों का कहना है कि जिनके पास पहुंच और प्रभाव है, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। कई रेहड़ी संचालकों ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित वसूली के चलते कुछ लोगों को संरक्षण मिलता है, जबकि कमजोर वर्ग के वेंडरों पर सख्ती दिखाई जाती है।

शहर के व्यापारी संगठनों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों का कहना है कि अवैध कब्जों से ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती है और पैदल चलने वालों को परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं दूसरी ओर वेंडरों का तर्क है कि पर्याप्त और सुविधाजनक वेंडिंग जोन उपलब्ध कराए बिना उन्हें हटाना उनके रोजगार पर सीधा हमला होगा।

अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की मंगलवार की सुनवाई पर टिकी है। माना जा रहा है कि अदालत निगम प्रशासन से अब तक की कार्रवाई, वेंडिंग जोन की स्थिति और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत जवाब मांग सकती है। अगर अदालत संतुष्ट नहीं हुई तो प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ और सख्त निर्देश भी जारी हो सकते हैं।