पंजाब में रेलवे का मेगा विस्तार: दशकों से अटकी परियोजनाओं को मिली रफ्तार, बोले बिट्टू- अब बदल रहा विकास का नक्शा

पंजाब में रेलवे का मेगा विस्तार: दशकों से अटकी परियोजनाओं को मिली रफ्तार, बोले बिट्टू- अब बदल रहा विकास का नक्शा

पंजाब में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने और लंबे समय से अटकी परियोजनाओं को गति देने को लेकर केंद्र सरकार ने बड़े स्तर पर काम शुरू किया है। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने कहा कि पंजाब आज रेलवे विकास के एक नए दौर का गवाह बन रहा है, जहां आधुनिक रेल परियोजनाएं राज्य की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदलने का काम कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि विकास की रीढ़ है। जहां रेल कनेक्टिविटी मजबूत होती है, वहां उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर अपने आप पैदा होने लगते हैं। पंजाब में भी अब यही बदलाव दिखाई देने लगा है।

रवनीत बिट्टू ने कहा कि कई दशकों तक पंजाब की महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाएं सरकारी फाइलों में ही अटकी रहीं। भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक देरी, समन्वय की कमी और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव के कारण राज्य को भारी नुकसान उठाना पड़ा। खासकर मालवा क्षेत्र, सीमावर्ती जिलों और औद्योगिक इलाकों में आधुनिक रेलवे ढांचे की कमी लंबे समय तक महसूस की जाती रही।

उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ और मालवा क्षेत्र के बीच आधुनिक रेल संपर्क का सपना भी वर्षों तक अधूरा रहा। राजपुरा-मोहाली रेल लिंक, जिसकी योजना 1970 के दशक में बनी थी, दशकों तक शुरू नहीं हो सकी। इसी तरह कादियां-ब्यास रेल लाइन परियोजना भी लंबे समय तक प्रशासनिक अड़चनों में फंसी रही।

रेल राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पंजाब के रेलवे विकास को नई दिशा मिली। केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे को विकास का आधार मानते हुए पंजाब की लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता दी। उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का भी विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उनके सहयोग और सक्रिय कार्यशैली के कारण वर्षों से लंबित परियोजनाएं अब तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

बिट्टू ने बताया कि रेल राज्य मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने पंजाब से जुड़ी सभी प्रमुख परियोजनाओं की व्यक्तिगत समीक्षा की। राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए उन्होंने रेलवे मंत्रालय से आग्रह किया कि कई परियोजनाओं का खर्च भारतीय रेलवे स्वयं वहन करे, ताकि विकास कार्यों में देरी न हो। लगातार बैठकों और समन्वय के बाद कई रुकी हुई परियोजनाएं दोबारा शुरू की गईं।

उन्होंने कहा कि आज पंजाब को रेलवे क्षेत्र में रिकॉर्ड बजट मिल रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए पंजाब का रेलवे बजट बढ़ाकर 5,673 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 2009-14 की औसत वार्षिक राशि से लगभग 25 गुना अधिक है। वर्तमान में राज्यभर में 26 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

इनमें 13,770 करोड़ रुपये की भनुपल्ली-बेरी नई रेल लाइन परियोजना, 842 करोड़ रुपये की कादियां-ब्यास रेल लाइन, 443 करोड़ रुपये की राजपुरा-मोहाली रेल लाइन, 300 करोड़ रुपये की फिरोजपुर-पट्टी नई लाइन और 449 करोड़ रुपये की रमन-मौर रेलवे लाइन जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा लुधियाना-किला रायपुर और लुधियाना-मुल्लांपुर रेल लाइन डबलिंग का काम भी तेजी से चल रहा है।

उन्होंने बताया कि 2,312 करोड़ रुपये की लागत से बन रही नंगल डैम-तलवाड़ा रेलवे परियोजना भी प्रदेश के लिए ऐतिहासिक साबित होगी। इससे पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और स्थानीय व्यापार तथा पर्यटन को बड़ा फायदा मिलेगा।

रेल मंत्रालय का दावा है कि आने वाले वर्षों में पंजाब का रेलवे नेटवर्क न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास को भी नई गति देगा।