ईरान पर ट्रम्प का सख्त संदेश: “समझौता नहीं तो भारी तबाही”, युद्ध में अमेरिका का खर्च पहुंचा अरबों डॉलर

ईरान पर ट्रम्प का सख्त संदेश: “समझौता नहीं तो भारी तबाही”, युद्ध में अमेरिका का खर्च पहुंचा अरबों डॉलर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बेहद कड़ा बयान दिया है। चीन दौरे पर रवाना होने से पहले ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष में पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन के पास हर परिस्थिति से निपटने के लिए सभी विकल्प खुले हैं और जरूरत पड़ी तो अमेरिका निर्णायक कार्रवाई करेगा।

ट्रम्प ने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के सामने अब सिर्फ दो रास्ते हैं, या तो वह समझौते की टेबल पर आए या फिर गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहे। उनके मुताबिक अमेरिका इस जंग को किसी भी कीमत पर जीतना चाहता है और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह भी बताया कि उनकी चीन यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक में ईरान और होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा भी प्रमुख रूप से उठेगा। हालांकि उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते और आर्थिक समझौते इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा रहेंगे। इसके बावजूद मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर चर्चा होना तय माना जा रहा है।

दरअसल होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर बड़ा असर डाल सकता है। इसी वजह से अमेरिका समेत कई पश्चिमी देश इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

इस बीच युद्ध को लेकर एक बड़ी आर्थिक रिपोर्ट भी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने अब तक इस संघर्ष में भारी रकम खर्च कर दी है। बताया जा रहा है कि करीब 74 दिनों के भीतर अमेरिकी सैन्य अभियान पर लगभग 29 अरब डॉलर खर्च किए जा चुके हैं। यह खर्च मुख्य रूप से हथियारों, मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों पर हुआ है। इसमें युद्ध के दौरान सैन्य ठिकानों को पहुंचे नुकसान या अन्य लॉजिस्टिक खर्च शामिल नहीं हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार बढ़ते सैन्य ऑपरेशन की वजह से अमेरिकी रक्षा बजट पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी को देखते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कांग्रेस से अतिरिक्त फंड की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका को दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकत बनाए रखना है, तो रक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश की जरूरत पड़ेगी।

हेगसेथ के मुताबिक आने वाले समय में आधुनिक हथियारों, एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम, साइबर सुरक्षा और नई सैन्य तकनीकों पर भारी खर्च करना होगा। उन्होंने दावा किया कि बदलते वैश्विक हालात में अमेरिका को अपनी सैन्य क्षमता और अधिक मजबूत करनी पड़ेगी, ताकि किसी भी बड़े खतरे का तुरंत जवाब दिया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को लेकर अमेरिका का यह आक्रामक रुख आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति को और गर्म कर सकता है। वहीं चीन, रूस और पश्चिमी देशों की प्रतिक्रियाएं भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभाएंगी।