नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े करोड़ों निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने एन्युइटी पॉलिसी से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। नए फैसले के तहत अब कुछ विशेष परिस्थितियों में पॉलिसीधारक अपनी एन्युइटी योजना को बीच में बंद कर जमा राशि निकाल सकेंगे।
PFRDA की ओर से 14 मई को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि यदि एन्युइटी लेने वाले व्यक्ति या उसके परिवार के किसी सदस्य को गंभीर बीमारी हो जाती है, तो ऐसे मामलों में पॉलिसी सरेंडर की अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए संबंधित एन्युइटी सर्विस प्रोवाइडर (ASP) बीमारी की गंभीरता की जांच करेगा और तय नियमों के आधार पर फैसला लेगा।
नए नियमों के अनुसार, वे पुरानी एन्युइटी पॉलिसियां भी सरेंडर की जा सकेंगी, जो 24 अक्टूबर 2024 से पहले जारी हुई थीं और जिनमें सरेंडर का विकल्प पहले से मौजूद था। इससे पहले PFRDA ने अक्टूबर 2024 में जारी दिशा-निर्देशों में फ्री-लुक पीरियड खत्म होने के बाद एन्युइटी बंद करने पर लगभग पूरी तरह रोक लगा दी थी। उस समय उद्देश्य यह था कि रिटायरमेंट के बाद लोगों को नियमित पेंशन मिलती रहे और उनकी आय सुरक्षित बनी रहे।
हालांकि, अब रेगुलेटर ने कुछ मानवीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियमों में ढील दी है। PFRDA के मुताबिक, लगातार मिल रही शिकायतों और सुझावों के बाद यह फैसला लिया गया। कई लोगों ने बताया था कि गंभीर बीमारी जैसी आपात स्थिति में पैसों की जरूरत होने पर वे अपनी ही जमा राशि का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे।
संस्था ने यह भी स्पष्ट किया है कि फ्री-लुक पीरियड के अलावा सामान्य परिस्थितियों में एन्युइटी सरेंडर की अनुमति नहीं होगी। वहीं, सरेंडर के बाद मिलने वाली राशि का उपयोग नई एन्युइटी खरीदने के लिए किया जा सकता है, चाहे वह उसी सर्विस प्रोवाइडर से हो या किसी दूसरे से।
PFRDA के इस फैसले से खास तौर पर उन NPS सब्सक्राइबर्स को राहत मिलने की उम्मीद है, जो गंभीर स्वास्थ्य संकट के दौरान आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।




