पाकिस्तान के ऐतिहासिक शहर लाहौर में कई इलाकों को फिर से उनके पुराने नाम दिए जा रहे हैं। पंजाब सरकार ने हाल ही में शहर की 9 जगहों के नाम बदलकर उन्हें हिंदू और ब्रिटिश दौर की पहचान से जोड़ दिया है। इसके तहत इस्लामपुरा का नाम अब दोबारा कृष्णनगर कर दिया गया है, जबकि बाबरी मस्जिद चौक को फिर से जैन मंदिर चौक कहा जाएगा। नए नामों वाले बोर्ड भी शहर में लगाए जा चुके हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इस फैसले के बाद पाकिस्तान में किसी बड़े धार्मिक संगठन या कट्टरपंथी समूह की तरफ से विरोध देखने को नहीं मिला। पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने कहा कि लाहौर की ऐतिहासिक विरासत को बचाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने शहर के पुराने दरवाजों, खासकर दिल्ली गेट समेत परकोटा क्षेत्र के संरक्षण और मरम्मत की भी घोषणा की है।
सूत्रों के मुताबिक, यह अभियान सिर्फ लाहौर तक सीमित नहीं रहेगा। अगले चरण में सिंध और खैबर पख्तूनख्वाह के कई शहरों में भी पुराने नाम बहाल किए जा सकते हैं।
लोगों ने कहा- पुरानी पहचान से जुड़ी हैं भावनाएं
बीकनहाउस यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले साद मलिक का कहना है कि वे हमेशा लक्ष्मी चौक को उसी नाम से बुलाते आए हैं। उनके मुताबिक, सरकारी रिकॉर्ड में भले इसका नाम बदल दिया गया था, लेकिन आम लोगों की जुबान पर पुराना नाम ही बना रहा। उनका मानना है कि ऐतिहासिक नाम किसी शहर की सांस्कृतिक यादों का हिस्सा होते हैं।
वहीं अनारकली इलाके के मौलाना वाजिद कादरी ने कहा कि किसी चौक या इलाके का नाम मंदिर या गुरुद्वारे पर होना इस्लाम के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि 90 के दशक में राजनीतिक माहौल के कारण कई नाम बदले गए थे, लेकिन स्थानीय लोग आज भी पुराने नामों को ज्यादा पसंद करते हैं।
नवाज शरीफ ने कहा- इतिहास मिटाना सही नहीं
मार्च महीने में नवाज शरीफ और मरियम नवाज की मौजूदगी में हुई एक बैठक में लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल प्रोजेक्ट पर चर्चा की गई थी। इसी दौरान पुराने नाम बहाल करने का फैसला लिया गया। नवाज शरीफ ने कहा कि यूरोप के देशों की तरह पाकिस्तान को भी अपनी ऐतिहासिक पहचान बचाकर रखनी चाहिए।
बाबरी मस्जिद विवाद के बाद बदले गए थे नाम
लाहौर में जगहों के नाम बदलने की शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी। बाबरी मस्जिद ढांचा गिराए जाने के बाद कई इलाकों के नाम इस्लामी पहचान के आधार पर बदले गए थे। उस समय पाकिस्तान में अलग-अलग दौर में नवाज शरीफ, बेनजीर भुट्टो और परवेज मुशर्रफ की सरकारें रहीं। हालांकि इमरान खान के कार्यकाल में इस तरह के बदलाव नहीं किए गए।



