चंडीगढ़ में सुरक्षा का नया कवच: बॉर्डर सीलिंग से साइबर मॉनिटरिंग तक, अपराधियों पर शिकंजा कसने की तैयारी

चंडीगढ़ में सुरक्षा का नया कवच: बॉर्डर सीलिंग से साइबर मॉनिटरिंग तक, अपराधियों पर शिकंजा कसने की तैयारी

चंडीगढ़ में कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। शहर में वारदात के बाद अपराधियों के आसानी से फरार होने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पुनर्गठित करने का फैसला लिया गया है। अब मोहाली, पंचकूला और न्यू चंडीगढ़ मुल्लांपुर से जुड़े प्रवेश मार्गों पर चौबीस घंटे पुलिस तैनाती और कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि ट्राईसिटी क्षेत्र की बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ती आवाजाही के कारण अपराधियों को शहर से बाहर निकलने के कई रास्ते मिल जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब सीमावर्ती नाकों को तकनीकी रूप से भी मजबूत किया जाएगा। कई प्रमुख एंट्री और एग्जिट प्वाइंट्स पर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, वाहन जांच प्रणाली और संदिग्ध गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग बढ़ाई जाएगी।

इस पूरे सुरक्षा ढांचे की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने गृह विभाग और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़, डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा, आईजीपी पुष्पेंद्र कुमार, एसएसपी सुरक्षा एवं ट्रैफिक सुमेर प्रताप सिंह, एसएसपी कंवरदीप कौर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने शहर की मौजूदा अपराध स्थिति, ट्रैफिक प्रबंधन, पुलिसिंग सिस्टम और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

बैठक के दौरान यह भी तय किया गया कि शहर में बीट बॉक्स प्रणाली को और अधिक सक्रिय बनाया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर पुलिस की उपस्थिति मजबूत हो और किसी भी घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके। प्रशासन का फोकस केवल अपराध रोकने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाने पर भी रहेगा।

पुलिस कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने साइबर अपराधों को लेकर विशेष चिंता जताई। ऑनलाइन फ्रॉड, डिजिटल ठगी, फर्जी लिंक और सोशल मीडिया के जरिए बढ़ रहे अपराधों से निपटने के लिए साइबर सेल की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि साइबर अपराधों की जांच में विशेषज्ञ टीमों को और प्रशिक्षित किया जाए तथा तकनीकी संसाधनों को मजबूत किया जाए।

इसके अलावा जघन्य अपराधों, एनडीपीएस मामलों और साइबर अपराधों में दोषसिद्धि दर बढ़ाने के लिए भी विशेष रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए। पुलिसिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बॉडी कैमरों के इस्तेमाल की नियमित निगरानी होगी। अधिकारियों को मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) तैयार करने और आकस्मिक निरीक्षण बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए।

प्रशासन का मानना है कि आधुनिक तकनीक, मजबूत फील्ड पुलिसिंग और सीमावर्ती निगरानी के संयोजन से चंडीगढ़ की सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और अपराधियों के लिए शहर में वारदात कर बच निकलना पहले जितना आसान नहीं रहेगा।