हरियाणा में सामने आए 590 करोड़ रुपये के कथित बैंक फंड घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। सी.बी.आई. ने मामले में जांच का दायरा तेज करते हुए मंगलवार को दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों से करीब चार घंटे तक लंबी पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी को डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग लेनदेन से जुड़े ऐसे अहम इनपुट मिले हैं, जिनके आधार पर एक वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी भी जल्द संभव मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि जांच के दौरान बैंक अधिकारियों और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कथित वित्तीय लेनदेन, फंड प्लेसमेंट और अनियमित निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। एजेंसी को मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल बैकअप और दस्तावेजी रिकॉर्ड से ऐसे संकेत मिले हैं, जो सरकारी फंड को चुनिंदा बैंकों में जमा करवाने के बदले कथित सौदेबाजी की ओर इशारा करते हैं।
सूत्रों का कहना है कि अब तक पांच आईएएस अधिकारियों और एक अन्य अधिकारी से पूछताछ हो चुकी है। जांच टीम ने दो अधिकारियों के मोबाइल फोन भी कब्जे में लिए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है। इन अधिकारियों का संबंध पंचायत विभाग और हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम से बताया जा रहा है। एजेंसी अब दो अन्य अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी में है, जिनमें एक वरिष्ठ आईएएस और एक एचसीएस रैंक अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। इनके खिलाफ भी धारा 17-ए के तहत मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है।
जांच में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब सीबीआई को जब्त मोबाइल फोन से डिलीट किए गए डेटा, व्हाट्सऐप चैट्स और एन्क्रिप्टेड कॉल बैकअप हासिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, इन डिजिटल रिकॉर्ड्स में कथित तौर पर सरकारी राशि को विशेष बैंकों में रखने के बदले लाभ पहुंचाने की चर्चाएं सामने आई हैं। साथ ही कुछ बातचीत में फंड को बेनामी संपत्तियों और हवाला नेटवर्क के जरिए ठिकाने लगाने से जुड़े संकेत भी मिले हैं।
मामले में कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग्स भी जांच एजेंसियों के हाथ लगी हैं। इन रिकॉर्डिंग्स में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आने का दावा किया जा रहा है। जांच एजेंसियां इन ऑडियो फाइलों की फॉरेंसिक जांच करवा रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि फंड ट्रांसफर, खातों के संचालन और कार्रवाई से बचने के लिए किस स्तर पर बातचीत हुई थी।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे हरियाणा की नौकरशाही में हलचल बढ़ती जा रही है। प्रशासनिक गलियारों में इस मामले को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं, क्योंकि पहली बार इतने बड़े स्तर पर आईएएस अधिकारियों के खिलाफ पूछताछ के लिए मंजूरी दी गई है।
इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पहले एसीबी और बाद में सीबीआई को जांच सौंपने का निर्णय लिया था। सरकार द्वारा कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति दिए जाने को भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। सीबीआई अब वित्तीय ट्रेल, संदिग्ध बैंक खातों, प्रॉपर्टी निवेश और डिजिटल कम्युनिकेशन नेटवर्क को खंगाल रही है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच पूरी होगी, वैसे-वैसे इस बहुचर्चित घोटाले में कई नए नाम भी सामने आ सकते हैं।


