देश में बढ़ती तेल कीमतों और विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार अब पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। फिलहाल भारत में E20 फ्यूल का उपयोग हो रहा है, यानी पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाया जाता है। अब सरकार ने E30 यानी 30 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मानक भी तय कर दिए हैं।
सरकार का मानना है कि इससे एक तरफ पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी तो दूसरी तरफ किसानों को भी गन्ने की बेहतर कीमत मिल सकेगी। खासतौर पर ऐसे समय में यह फैसला अहम माना जा रहा है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल संकट गहराता जा रहा है और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
क्या होता है इथेनॉल?
इथेनॉल एक तरह का बायोफ्यूल है, जिसे प्राकृतिक स्रोतों से तैयार किया जाता है। भारत में इसका सबसे बड़ा स्रोत गन्ना है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होने के कारण यहां इथेनॉल उत्पादन भी तेजी से बढ़ रहा है।
गन्ने से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया
सबसे पहले निकाला जाता है गन्ने का रस
इथेनॉल तैयार करने के लिए गन्ने को चीनी मिलों में भेजा जाता है, जहां मशीनों की मदद से उसका रस निकाला जाता है। गन्ने को कई बार दबाकर उसमें मौजूद सुक्रोज, ग्लूकोज और फ्रक्टोज वाला रस अलग किया जाता है। रस निकालने के बाद जो रेशेदार हिस्सा बचता है उसे बगास कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन में किया जाता है।
रस को साफ कर शुरू होता है फर्मेंटेशन
निकाले गए रस में कई तरह की अशुद्धियां होती हैं। इन्हें हटाने के लिए उसमें चूने का पानी मिलाकर गर्म किया जाता है। इसके बाद साफ रस को बड़े फर्मेंटेशन टैंकों में डाला जाता है, जहां यीस्ट मिलाया जाता है। यही यीस्ट शर्करा को इथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड में बदलने का काम करता है। यह प्रक्रिया करीब 24 से 72 घंटे तक चलती है। इस दौरान तापमान को नियंत्रित रखा जाता है। फर्मेंटेशन के बाद तैयार मिश्रण में लगभग 8 से 12 प्रतिशत तक इथेनॉल मौजूद होता है।
आसवन से बढ़ाई जाती है शुद्धता
फर्मेंटेशन के बाद मिले तरल को आसवन प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसमें मिश्रण को गर्म कर उसकी भाप तैयार की जाती है और फिर उसे ठंडा कर इथेनॉल अलग किया जाता है। इस स्टेज पर करीब 95 फीसदी शुद्ध इथेनॉल प्राप्त होता है।
आखिर में हटाया जाता है पानी
फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए इथेनॉल को और अधिक शुद्ध बनाना जरूरी होता है। 95 फीसदी इथेनॉल में मौजूद पानी को विशेष तकनीक से हटाकर इसकी शुद्धता करीब 99 फीसदी तक पहुंचाई जाती है। इसके बाद तैयार उत्पाद को फ्यूल ग्रेड इथेनॉल कहा जाता है, जिसे पेट्रोल में मिलाया जाता है।
क्यों बढ़ रहा है इथेनॉल का इस्तेमाल?
विशेषज्ञों के मुताबिक पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से प्रदूषण कम होता है और देश का आयात बिल भी घटता है। इसके अलावा चीनी मिलों और किसानों को भी अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है। यही वजह है कि सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को लगातार आगे बढ़ा रही है।
(Photo : AI Generated)




