अवैध खनन पर हाईकोर्ट की सख्ती, हरियाणा सरकार से पूछा- नियम तोड़ने वालों को भविष्य में ठेके से बाहर क्यों नहीं किया?

अवैध खनन पर हाईकोर्ट की सख्ती, हरियाणा सरकार से पूछा- नियम तोड़ने वालों को भविष्य में ठेके से बाहर क्यों नहीं किया?

हरियाणा में लगातार सामने आ रहे अवैध खनन मामलों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता, यदि ठेकेदारों द्वारा नियमों का उल्लंघन साबित हो चुका है। कोर्ट ने पूछा कि ऐसे लोगों को भविष्य में खनन कार्यों से प्रतिबंधित या ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया।

चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस की खंडपीठ ने खान एवं भूविज्ञान विभाग के महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि वे तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथ पत्र दाखिल कर यह बताएं कि अवैध खनन करने वालों के खिलाफ अब तक क्या-क्या कार्रवाई की गई और उन्हें भविष्य के लिए अयोग्य घोषित करने पर क्या निर्णय लिया गया। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई तय की गई है।

यह मामला एक जनहित याचिका के माध्यम से अदालत पहुंचा, जिसमें आरोप लगाया गया कि राज्य में अवैध खनन के बावजूद प्रशासन प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि कई मामलों में नियमों की खुली अनदेखी हुई, लेकिन दोषियों पर केवल आर्थिक दंड लगाकर मामला निपटा दिया गया।

सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि अवैध खनन में संलिप्त पाए गए ठेकेदारों से करीब 33.90 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है। इस पर हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि उल्लंघन गंभीर था तो केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त कार्रवाई कैसे माना जा सकता है।

सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि संबंधित कंपनियां और ठेकेदार शॉर्ट टर्म परमिट के तहत काम कर रहे थे। हालांकि कोर्ट इस तर्क से संतुष्ट नजर नहीं आया। अदालत ने हरियाणा माइनर मिनरल रूल्स-2012 का हवाला देते हुए कहा कि माइनिंग परमिट, कॉन्ट्रैक्ट और लीज — तीनों ही “मिनरल कंसेशन” की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सभी पर समान रूप से सख्त कार्रवाई लागू होनी चाहिए।

हाई कोर्ट ने संकेत दिए कि पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में प्रशासनिक नरमी स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अवैध खनन रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और कड़े निर्देश जारी किए जा सकते हैं।