देशभर में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच व्यापारिक संगठन चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने केंद्र सरकार से बड़ा कदम उठाने की मांग की है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पेट्रोल-डीजल को GST के तहत लाने की अपील की है।
CTI का कहना है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग टैक्स वसूलती हैं, जिसकी वजह से आम जनता और उद्योग जगत पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है। संगठन के अनुसार, अगर इन ईंधनों को GST के दायरे में लाया जाता है तो कीमतों में कमी आ सकती है और देशभर में दरें समान हो जाएंगी।
बृजेश गोयल ने बताया कि अलग-अलग राज्यों में VAT की दरें भिन्न होने के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम भी अलग हैं। उदाहरण के तौर पर तेलंगाना में सबसे ज्यादा VAT लगाए जाने से वहां पेट्रोल महंगा है, जबकि अंडमान-निकोबार में बेहद कम VAT होने से ईंधन सस्ता मिलता है।
उन्होंने कहा कि 2017 में GST लागू करते समय ‘वन नेशन, वन टैक्स’ का नारा दिया गया था, लेकिन पेट्रोल और डीजल अब भी इससे बाहर हैं। CTI का मानना है कि यह व्यवस्था उस अवधारणा के विपरीत है, क्योंकि हर राज्य अपनी दरों के हिसाब से टैक्स तय कर रहा है।
संगठन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में 22 मई तक पेट्रोल की बेस कीमत करीब 66 रुपये थी, लेकिन एक्साइज ड्यूटी, VAT और डीलर कमीशन जुड़ने के बाद इसकी कीमत काफी बढ़ गई। इसी तरह डीजल पर भी भारी टैक्स लगाया जा रहा है।
CTI ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी और VAT को हटाकर इन्हें सीधे GST के तहत शामिल किया जाए, ताकि व्यापारियों, उद्योगों और आम लोगों को राहत मिल सके।
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