दिल्ली: सांसद आवास परिसर में लगी भीषण आग का जिम्मेदार कौन? निवासियों ने बताया कहां दिखी लापरवाही

दिल्ली: सांसद आवास परिसर में लगी भीषण आग का जिम्मेदार कौन? निवासियों ने बताया कहां दिखी लापरवाही <p style=”text-align: justify;”>दिल्ली के एक अपार्टमेंट परिसर में शनिवार (18 अक्टबूर) दोपहर लगी भीषण आग के बाद निवासियों ने कहा कि इस बाई सिक्योरिटी एरिया में सांसदों और उनके कर्मचारियों का आवास होने के बावजूद इसमें आग से सुरक्षा की बुनियादी तैयारी तक नहीं थी और रखरखाव की हालत भी खराब थी.</p>
<p style=”text-align: justify;”>निवासियों का दावा है कि बाबा खड़ग सिंह मार्ग स्थित ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट में लगी आग में कुछ बच्चे घायल हुए हैं और उन्हें अस्पताल ले जाया गया है. कई परिवारों को भारी नुकसान हुआ है. निवासियों ने बताया कि आग ग्राउंड फ्लोर के पार्किंग एरिया में लगी थी, लेकिन वहां फर्नीचर, पॉलिशिंग सामग्री और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं का अंबार पड़ा था.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>पटाखे जलाते समय फर्नीचर में लगी आग</h3>
<p style=”text-align: justify;”>अधिकारियों ने कहा कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन निवासियों का कहना है कि यह आग तब लगी जब पटाखे फोड़ने के दौरान फर्नीचर के ढेर में आग लग गई, जो बाद में तेजी से फैली. उन्होंने कहा, &lsquo;&lsquo;यह लगभग सोफा के गोदाम जैसा लग रहा था. हम पानी के लिए दौड़े, लेकिन कुछ भी काम नहीं आया. हम अग्निशमक यंत्रों और पाइपों के पास गए, लेकिन पानी की आपूर्ति नहीं थी.&rsquo;&rsquo;</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>फायर डिपार्टमेंट लगे देरी के आरोप</h3>
<p style=”text-align: justify;”>पीटीआई-भाषा की रिपोर्रट के मुताबिक, कई सांसदों के लिए काम करने वाले और इस घटना को सबसे पहले देखने वालों में से एक गंगाराम वाल्मीकि जानकारी दी है, &lsquo;&lsquo;जब तक दमकल की गाड़ियां पहुंचीं, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. वे करीब एक घंटा देरी से आए.&rsquo;&rsquo; हालांकि, दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) ने देरी के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि सूचना मिलते ही कई टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं.</p>
<p style=”text-align: justify;”>अधिकारियों के अनुसार, डीएफएस को दोपहर 1.22 बजे आग लगने की सूचना मिली और 1.40 बजे तक कार्रवाई शुरू कर दी गई. उन्होंने कहा कि 14 दमकल गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं और दोपहर 2.10 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>उत्तराखंड सांसद के सहायक ने दी आग की जानकारी</h3>
<p style=”text-align: justify;”>उत्तराखंड के सांसद नरेश बंसल के निजी सहायक कमल गहतोड़ी ने बताया कि पहली मंजिल सबसे अधिक प्रभावित हुई है. वह उसी मंजिल पर रहते हैं. उन्होंने बताया कि जब आग लगी, तब वे एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे और उनका परिवार दिवाली की छुट्टियों में शहर से बाहर गया हुआ है. उन्होंने कहा कि उनका रसोइया काम पर गया हुआ था जबकि उसकी पत्नी, दो छोटे बच्चे और उसकी बुज़ुर्ग मां घर में ही थीं.</p>
<p style=”text-align: justify;”>गहतोड़ी ने कहा, &lsquo;&lsquo;रसोइये की पत्नी दूध लेने नीचे गई थी और जब वह वापस आई, तो उसने आग देखी. वह तुरंत अपने परिवार को बचाने के लिए घर के अंदर भागी. उसकी बुज़ुर्ग सास हिल भी नहीं पा रही थी, लेकिन किसी तरह वह उन्हें बचाने में कामयाब रही.&rsquo;&rsquo;</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>पहली मंजिल पर थे 8 क्वार्टर, सबसे ज्यादा प्रभावित</h3>
<p style=”text-align: justify;”>घर के अंदर सब कुछ जलकर खाक हो गया था. कमल गहतोड़ी ने बताया, &lsquo;&lsquo;अलमारियों में रखा हमारा सारा सामान, दस्तावेज, गहने, कपड़े, यहां तक कि साड़ियां भी जलकर खाक हो गईं. अब सब कुछ खत्म हो गया है.&rsquo;&rsquo; हर मंजिल पर आठ कर्मचारियों के क्वार्टर हैं. पहली मंज़िल पूरी तरह से जलकर खाक हो गई है और सबसे अधिक प्रभावित हुई है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>कई निवासियों ने सरकारी आवासीय भवनों के रखरखाव और सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने बताया कि इस घटना के कारण कई कर्मचारियों के परिवार बेघर हो गए हैं. कमल वाल्मीकि ने बताया कि धनतेरस की पूर्व संध्या पर करीब 20 परिवारों को भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा, &lsquo;&lsquo;आज धनतेरस है और लोग त्योहार की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब कई परिवार अपना सब कुछ खो चुके हैं.&rsquo;&rsquo;&nbsp;</p>

नारनौल में भारी मात्रा में बम-पटाखे पकड़े:निर्माणाधीन मकान में बिक्री के लिए रखे; पुलिस को देख युवक ताला लगा कर भागा

नारनौल में भारी मात्रा में बम-पटाखे पकड़े:निर्माणाधीन मकान में बिक्री के लिए रखे; पुलिस को देख युवक ताला लगा कर भागा महेंद्रगढ़ के नारनौल में दीपावली से पहले सीआईए टीम ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए मोहल्ला खड़खड़ी स्थित एक निर्माणाधीन मकान में छापा मारा। यहां छानबीन में अवैध रूप से रखे गए बम-पटाखे और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में प्रतिबंधित पटाखे बरामद किए हैं। जानकारी अनुसार, नारनौल शहर में नागरिक अस्पताल के पास पुलिस टीम गश्त पर थी। इसी दौरान मुखबिर ने सूचना दी कि मोहल्ला खड़खड़ी निवासी रमन चौहान अपने निर्माणाधीन मकान में अवैध रूप से बम-पटाखों की बिक्री कर रहा है। सूचना सही मानकर पुलिस ने तुरंत रेडिंग पार्टी तैयार की और बताए स्थान पर पहुंची। पुलिस को देख कमरे का ताला लगा कर भागा पुलिस टीम को मकान के बाहर एक युवक दिखाई दिया जो पुलिस को देखकर कमरे को ताला लगाकर मौके से फरार हो गया। बाद में वार्ड नंबर 19 के पार्षद धूप सिंह की मौजूदगी में कमरे का ताला तोड़ा गया। तलाशी के दौरान कमरे से तीन कार्टन और दो सफेद प्लास्टिक के कट्टे बरामद हुए। जिनमें बड़ी मात्रा में बम-पटाखे और विस्फोटक सामग्री भरी थी। बरामद पटाखे में स्काई शॉट, फिरकी, सूतली बम, जेली बेली बम, बुलेट बम सहित कई नामी ब्रांडों के खतरनाक पटाखे शामिल थे। पुलिस ने आरोपी रमन के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल आरोपी फरार है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है।

तरनतारन उप-चुनाव, 23 नामांकन हुए:नीटू शटरांवाला अनपढ़, पारिवारिक आय 13.75 लाख; मनदीप का परिवार 1.27 करोड़ का मालिक; दोनों बिना कार के

तरनतारन उप-चुनाव, 23 नामांकन हुए:नीटू शटरांवाला अनपढ़, पारिवारिक आय 13.75 लाख; मनदीप का परिवार 1.27 करोड़ का मालिक; दोनों बिना कार के तरनतारन के उप-चुनावों के लिए नामांकन के 6 दिन पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक मात्र 26 आवेदन ही मिले हैं। लेकिन इनमें अधिकतर रिपीट व कवरिंग कैंडिडेट हैं, जिन्हें स्क्रूटनी व वापसी के समय हटा दिया जाएगा। अभी तक सभी प्रमुख पार्टियों ने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया स्टार नीटू शटरांवाला ने भी अपना 12वां नामांकन भरा है। नामांकन में दी जानकारी के अनुसार, आजाद उम्मीदवार बने नीटू शटरांवाला की पारिवारिक आय तो 13.75 लाख है, लेकिन ना तो उनके पास कोई घर है, ना कार और ना ही गेहना। इतना ही नहीं, नीटू अनपढ़ भी है और पूरा एफिडेविट उन्होंने अंग्रेजी में भरा है। इसके अलावा खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे के उम्मीदवार मनदीप सिंह मैदान में हैं। तरनतारन विधानसभा सीट पूर्व विधायक डॉ. कश्मीर सिंह सोहल के निधन के बाद खाली हो गई थी। मुख्य मुकाबला आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल के अलावा खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे के उम्मीदवारों के बीच है। जानें नीटू शटरांवाले ने अपने नामांकन हल्फनामे में क्या भरा 41 साल के नीटू ने बताया कि ये उनका 12वां नामांकन है। वे शाह सिकंदर महल्ला जालंधर के रहने वाले हैं और अनपढ़ हैं। पांच साल में नीटू की आमदनी ढाई गुणा तक बढ़ चुकी है। ये इनकम उनकी ही नहीं, उनकी पत्नी की भी बढ़ी है। दोनों की इनकम 2021-22 में जहां तकरीबन 5 लाख वार्षिक थी, वहीं अब 2025-26 में ये आमदनी बढ़कर 13.75 लाख वार्षिक हो चुकी है। नीटू ने बताया कि उन्हें आय शटरिंग व अपने आर्टिस्ट होने के कारण मिल जाती है। लेकिन उनकी पत्नी गृहिणी है और यहीं से उनकी आमदनी भी इकट्ठी हो जाती है। इसके अलावा ना तो उनके पास व ना ही उनकी पत्नी के पास कोई प्रॉपर्टी, वाहन और खेत-खलिहान हैं। करोड़ों के मालिक, लेकिन बिना कार के 39 साल के मनदीप सिंह अमृतसर के कोट बाबा दीप सिंह के रहने वाले हैं। परिवार की इनकम 13.61 लाख है, जो चार साल पहले 2021-22 में 9.24 लाख रुपए रही। मनदीप सिंह पर आज तक कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। उनकी चल संपत्ति 52 लाख है, जबकि अचल प्रॉपर्टी 75 लाख रुपए के करीब है। 10वीं पास मनदीप सिंह की छवि बेदाग है। उनके पास कोई कार नहीं है, जबकि उनकी पत्नी के पास 8 तोले व उनके पास 3 तोल ही सोना है।

बांके बिहारी का खोला खजाना, निकला कुछ नहीं:ज्वेलरी बॉक्स खाली मिले; ‌‌VIDEO में देखिए 54 साल से बंद खजाने का रहस्य

बांके बिहारी का खोला खजाना, निकला कुछ नहीं:ज्वेलरी बॉक्स खाली मिले; ‌‌VIDEO में देखिए 54 साल से बंद खजाने का रहस्य मथुरा के बांके बिहारी मंदिर का खजाना 54 साल बाद खोला गया। 160 साल पुराने इस खजाने को लेकर बहुत उम्मीद थी। पहले दरवाजे को जब काटा गया, तो एक लोहे, एक लकड़ी का बॉक्स और 3 कलश मिले। जब बॉक्स खोले गए, तो उसके अंदर ज्वेलरी बॉक्स मिले। लोगों में खुशी हुई। लेकिन, जब ज्वेलरी बॉक्स खोले गए, तो वो खाली थे। VIDEO में देखिए बांके बिहारी के खजाने की पूरी रिपोर्ट…

रामपुर लवी मेले में दिखेगी स्पीति घोड़ों की दौड़:एक से तीन नवंबर लगेगी अश्व प्रदर्शनी. 11 से 14 तक आयोजित होगा अंतरराष्ट्रीय मेला

रामपुर लवी मेले में दिखेगी स्पीति घोड़ों की दौड़:एक से तीन नवंबर लगेगी अश्व प्रदर्शनी. 11 से 14 तक आयोजित होगा अंतरराष्ट्रीय मेला अंतर्राष्ट्रीय लवी मेले के उपलक्ष्य में इस वर्ष एक से तीन नवंबर तक अश्व प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इसमें उन्नत नस्ल के घोड़ों की दौड़ भी देखने को मिलेगी। प्रशासन ने लवी मेले में लगने वाली अस्थाई दुकानों को देखते हुए प्रदर्शनी लगाने का निर्णय लिया है। रामपुर व्यापारिक व ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। यहां का अंतर्राष्ट्रीय लवी मेला इस साल 11 से 14 नवंबर तक आयोजित हो रहा है। यह मेला न केवल रोजमर्रा के सामान के व्यापार का केंद्र है, बल्कि पशु व्यापार, विशेषकर स्पीति नस्ल के घोड़ों के लिए भी प्रसिद्ध है। अश्व प्रदर्शनी में क्या होगा अश्व प्रदर्शनी के दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 1 नवंबर को पशुपालन विभाग द्वारा घोड़ों का पंजीकरण किया जाएगा। 2 नवंबर को अश्वपालकों के लिए उन्नत प्रजनन तकनीक और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए गोष्ठी का आयोजन होगा। 3 नवंबर को उत्तम घोड़ों का चयन, 400 मीटर और 800 मीटर की रोमांचक घुड़दौड़, तथा गुब्बारा फोड़ प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। स्पीति घोड़ों को क्यों कहते हैं शीत मरुस्थल का जहाज स्पीति घोड़े मजबूत कद-काठी, भारी बर्फ में चलने और ऊंचाई पर कार्य करने की योग्यता के लिए जाने जाते हैं। इन्हें “शीत मरुस्थल का जहाज़” भी कहा जाता है। मूल रूप से तिब्बत के पठार में उत्पन्न होने वाले ये घोड़े बाद में व्यापारियों द्वारा लाहौल-स्पीति और किन्नौर के दुर्गम क्षेत्रों में लाए गए थे। वर्तमान में ये मुख्यतः स्पीति घाटी की पिन वैली और किन्नौर जिले की भाबा वैली में पाए जाते हैं। उत्तराखंड से भी आते हैं व्यापारी प्रदर्शनी के समापन पर मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कार वितरण समारोह होगा। पशुपालन विभाग द्वारा अश्व प्रदर्शनी में भाग लेने वाले सभी घोड़ों को निःशुल्क चारा और दाना प्रदान किया जाएगा। यह मेला कुल्लू, मंडी, उत्तराखंड और अन्य क्षेत्रों से खरीदारों और पशु प्रेमियों को आकर्षित करता है।

थार चालक को पकड़ नहीं पाई पुलिस

थार चालक को पकड़ नहीं पाई पुलिस जालंधर| रामा मंडी से जंडू सिंघा रोड पर जौहलां गेट के पास तीन दिन पहले थार की टक्कर से पूर्व सरपंच हरदेव सिंह की मौत के मामले में पुलिस अभी तक थार चालक को गिरफ्तार ही नहीं कर पाई। जबकि थार चालक का सारा एड्रेस और जानकारी पुलिस के पास है। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से पारिवारिक मेंबर भी नाखुश हैं। आरोपी थार चालक सवरनजीत सिंह के खिलाफ पुलिस ने मृतक हरदेव सिंह के दामाद के बयानों के आधार पर मामला दर्ज किया है। वहीं अभी संस्कार नहीं किया गया। क्योंकि हरदेव सिंह के बेटे का इंतजार किया जा रहा है जो अमेरिका में रहता है। रविवार को बेटा जालंधर पहुंच जाएगा और उसके बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। जानकारी के अनुसार हरदेव सिंह को सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई थी। जिस कारण उनकी मौत हो गई। जब थार ने एक्टिवा को टक्कर मारी तो उसके बाद कुछ ही दूरी पर जाकर डिवाइडर पर जा टकराई। जिसके बाद थार को आग लग गई। इस मामले में पुलिस अभी आरोपी की तलाश ही कर रही है।

महिला बोली- कामदगिरि की परिक्रमा से दूर हुई गरीबी:जो मांगते हैं, मिलता है; दिवाली तक चित्रकूट 40 लाख श्रद्धालु आएंगे

महिला बोली- कामदगिरि की परिक्रमा से दूर हुई गरीबी:जो मांगते हैं, मिलता है; दिवाली तक चित्रकूट 40 लाख श्रद्धालु आएंगे ‘हम पिछले 16 साल से रोज कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर रहे हैं। यह हमारी आस्था का प्रतीक है। यहां आने के बाद हम एक विशेष ऊर्जा से भर जाते हैं। हम सामाजिक और जनहित में जो भी काम करते हैं। ऐसा लगता है कि उसमें हमें यहां की ईश्वरीय शक्ति सहयोग करती है। आगे हमेशा ऐसे ही करते रहेंगे।’ ये कहना है श्रद्धालु अक्षांश पंडित का। अक्षांश की ही तरह ही हजारों लोग चित्रकूट के कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर रहे हैं। दीपावली तक इस परिक्रमा में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 40 लाख तक पहुंच जाती है। आखिर इसका महत्व क्या है, इतिहास क्या है? शुरुआत कहां से होती है? किन मनोकामनाओं के साथ यहां लोग पहुंच रहे हैं? इन सारे सवालों के जवाब तलाशते हुए दैनिक भास्कर की टीम चित्रकूट पहुंची। आइए इस ऐतिहासिक और पवित्र परिक्रमा के बारे में जानते हैं… दीपावली तक 40 लाख श्रद्धालु आएंगे
चित्रकूट…वही नगरी, जहां त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने अपने 14 साल के वनवास में साढ़े 11 साल निवास किया था। दीपावली पर इस जगह का महत्व बढ़ जाता है। इसीलिए यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। इसमें जितने श्रद्धालु यूपी के होते हैं, उतने ही मध्यप्रदेश के भी होते हैं। चित्रकूट दोनों प्रदेशों को जोड़ता है। प्रशासन का दावा है कि यहां 18 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक 40 लाख श्रद्धालु आएंगे। उनके दर्शन-पूजन और परिक्रमा के लिए प्रशासन मुस्तैदी से लगा है। हम सबसे पहले रामघाट पहुंचे। यहां से मंदाकिनी नदी गुजरी है। दोनों तरफ पक्के घाट बने हैं। एक तरफ का हिस्सा यूपी, दूसरी तरफ का हिस्सा मध्यप्रदेश है। जो भी श्रद्धालु कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा करने आते हैं, वो सबसे पहले यहां आते हैं और मंदाकिनी नदी में स्नान करते हैं। एक प्रसिद्ध दोहा है- ‘चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर, तुलसीदास चंदन घिसे, तिलक करे रघुवीर’। मान्यता है कि यहीं तुलसीदास जी को प्रभु श्रीराम के दर्शन मिले थे। वह चंदन घिस रहे थे और श्रीराम उसे लगा रहे थे। कामदगिरि को देखने मात्र से दुख खत्म होते हैं
दीपावली को देखते हुए घाट को साफ-सुथरा कर दिया गया है। रामघाट पर ही हमें विष्णुदत्त मिश्रा मिले। वह कहते हैं- जो भी लोग यहां आते हैं, वो पहले यहीं स्नान करते हैं। यहां भगवान शिव के दर्शन करते हैं। फिर 2 किलोमीटर दूर कामद गिरि पर्वत की परिक्रमा के लिए चले जाते हैं। उनके बगल में बैठे शिवाकांत कहते हैं- त्रेता युग में जब भगवान राम यहां आए थे, तो मंदाकिनी में स्नान के बाद ही कामदगिरि पर्वत की तरफ गए थे। परिक्रमा के चलते गरीबी हट गई
रामघाट के बाद हम 2 किलोमीटर दूर कामदगिरि पर्वत की तरफ बढ़े। यहीं प्रसिद्ध भगवान कामतानाथ का मंदिर है। लोग उनका दर्शन करने के बाद अपनी परिक्रमा की शुरुआत करते हैं। रीवा से आई शकुंतला, सुशीला और रानी मिलीं। सुशीला कहती हैं- हम भगवान से चाहते हैं कि हमारे बच्चे आगे बढ़ें, मंजिल तक पहुंचे। शकुंतला और रानी कहती हैं- हम सब भी यही सोचकर आते हैं कि हमारा परिवार आगे बढ़े। हमारी मुलाकात यहीं अक्षांश पंडित से हुई। अक्षांश भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव हैं। वह कहते हैं- मैं पिछले साढ़े 16 साल से रोज परिक्रमा कर रहा हूं। परिक्रमा करने से हमारे मन में एक विशेष ऊर्जा का प्रवाह होता है। एक प्रसिद्ध दोहा है- चित्रकूट चिंता हरण, आए सुख के चैन, पाप कटै युग चार के, देख कामता नैन। मतलब यहां 4-4 युग के पाप कट रहे हैं। कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा 4 स्थानों से शुरू होती है। उत्तर द्वार पर कुबेर, दक्षिणी द्वार पर धर्मराज, पूर्वी द्वार पर इंद्र और पश्चिमी द्वार पर वरुण देव द्वारपाल हैं। इन्हीं चार स्थानों से परिक्रमा की शुरुआत होती है। नियम यह है कि जहां से परिक्रमा शुरू होगी, वहीं आकर खत्म भी होती है। पूरी परिक्रमा 5 किलोमीटर लंबी होती है। इसमें ढाई-ढाई किलोमीटर यूपी और एमपी का हिस्सा पड़ता है। प्रशासन ने पूरे रास्ते को पक्का बनाया है। जगह-जगह पर टीन शेड लगाए गए हैं। करीब 200 मंदिर रास्ते में पड़ते हैं, जहां लोग दर्शन करते हुए आगे बढ़ते हैं। बहुत चलना पड़ा, अब नहीं आएंगे
परिक्रमा मार्ग पर हमें रायबरेली से आया एक ग्रुप मिला। इस ग्रुप में कई महिलाएं शामिल हैं। इसी में से एक 65 साल की राजपत्ता देवी पहली बार चित्रकूट आई हैं। कहती हैं- चलते-चलते एकदम थक गए। पांव से हम चल नहीं पाते, बहुत दिक्कत होती है। हम यह सोच के आए थे कि प्रभु ठीक कर देंगे, लेकिन इतना ज्यादा थक गए कि अब नहीं आएंगे। अगर भगवान ठीक कर देंगे, तो आ जाएंगे। राजपत्ता के ही साथ राजरानी और सुबोधा आई थीं। राजरानी कहती हैं- हमारा घर-परिवार अच्छा रहे, हमारी तबीयत ठीक रहे, बस यही भगवान से कहने आते हैं। सुबोधा कहती हैं- यहां सब अच्छा लग रहा, लेकिन चलते-चलते थक गए। अब भगवान अगर सुन लें तो सब ठीक हो जाएगा। लड़के-बच्चे अच्छे रहें, उनको रोटी मिलती रहे, इससे ज्यादा क्या ही चाहिए। धर्म के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आ रहे
परिक्रमा के दौरान कई ऐसे लोग मिले, जो अलग-अलग जिलों और राज्यों से आए थे। प्रतापगढ़ के कुंडा से आए अभिषेक तिवारी कहते हैं- हमारी कोशिश है कि लोग भी जागरूक हों। भगवान राम ने जो कुछ किया, वो लोग देखें और उसका अनुसरण करें। साथ आए मिथिलेश शुक्ला कहते हैं- हर बार की तरह इस बार भी भगवान का दर्शन करने आए हैं। भगवान ने यहीं कामदगिरि में पूजा-अर्चना की थी। उसी का महत्व है, इसीलिए यहां की दीपावली खास है। रास्ते में हमें औघड़ बाबा मिले। वह दावा करते हैं कि यह विश्व प्रसिद्ध पर्वत है। इसकी परिक्रमा कर लेने से आम लोगों का उद्धार हो जाता है। जो कहते हैं कि यह पत्थर का पर्वत है, वह गलत कहते हैं, क्योंकि यह तो सोने का पर्वत है। इस पर जो वृक्ष हैं, वह सामान्य नहीं, बल्कि ऋषि-मुनि हैं, जो तपस्या में लीन हैं। भगवान राम के वरदान के चलते आते हैं लोग
चित्रकूट को लेकर एक कहानी प्रचलित है। त्रेतायुग में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण यहां साढ़े 11 साल तक रहे। एक वक्त के बाद भगवान राम ने इस नगरी को छोड़ने का फैसला किया। उस वक्त चित्रकूट पर्वत दुखी हो गया। भगवान राम से कहा कि जब तक आप यहां थे, तब तक यह भूमि पवित्र मानी जाती थी। लेकिन, आपके चले जाने के बाद इसे कौन पूछेगा? भगवान राम ने पर्वत को वरदान दिया कि अब आप कामद हो जाएंगे, जो भी आपकी परिक्रमा कर लेगा उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाएगीं। हमारी कृपा भी उसके ऊपर बनी रहेगी। इसके बाद से ही पर्वत को कामदगिरि कहा जाने लगा। पर्वत के नीचे विराजमान कामतानाथ भगवान राम का ही एक स्वरूप हैं। इस पर्वत की एक खासियत यह भी है कि इसे किधर से भी देखा जाए, यह धनुष की तरह ही नजर आता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… राजा भैया ने खरीदी ढाई करोड़ की कार, यूपी की पहली रेंज रोवर डिफेंडर भी काफिले में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने 4 सीटर Lexus LM350h लग्जरी गाड़ी खरीदी है। इस गाड़ी की कीमत है, ₹2.15 करोड़ से शुरू होती है, जो 7-सीटर VIP वेरिएंट के लिए है। वहीं, 4-सीटर अल्ट्रा लग्जरी वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत ₹2.69 करोड़ है। 16 अक्टूबर को खरीदी गई यह गाड़ी 4-सीटर अल्ट्रा लग्जरी वेरिएंट है। दरअसल, राजा भैया लग्जरी गाड़ियों के शौकीन हैं। उनकी कुंडा की हवेली से लेकर लखनऊ के बंगले तक में करोड़ों की कीमत की गाड़ियां खड़ी हैं। इसके साथ ही उन्हें गाड़ी के नंबर में भी खासी दिलचस्पी है। उनके काफिले की गाड़ियों का नंबर 0001 ही रहता है। इससे पहले पूर्वांचल के बाहुबली नेता धनंजय सिंह ने भी लैंड क्रूजर और वेलफायर गाड़ियां खरीदी थीं। पढ़िए पूरी खबर…

राहुल-सोनिया को विदेशी खून बताने वाले को मायावती माफ करेंगी:लखनऊ में पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश की आज होगी घर वापसी

राहुल-सोनिया को विदेशी खून बताने वाले को मायावती माफ करेंगी:लखनऊ में पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश की आज होगी घर वापसी बहुजन समाज पार्टी की रविवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक है। इसमें कई अहम फैसले के साथ पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और नेशनल कोऑर्डिनेटर रहे जयप्रकाश सिंह की घर वापसी पर भी मुहर लग सकती है। एक सोर्स का दावा है कि जयप्रकाश की एक बड़े नेता के जरिए बसपा सुप्रीमो मायावती से बात हो चुकी है। हालांकि, जयप्रकाश खुद ऐसी किसी मुलाकात को खारिज कर रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में ये जरूर कहा कि उन्होंने पार्टी में वापसी के लिए बसपा प्रमुख मायावती से अपील की है। अपनी पुरानी गलतियों के लिए माफी भी मांगी है। जानिए कौन हैं जयप्रकाश सिंह जाटव समाज से आने वाले गौतमबुद्धनगर में जन्मे 40 साल के जयप्रकाश सिंह के पिता शिक्षक और भाई सरकारी वकील हैं। एलएलएम डिग्री धारक जयप्रकाश ने साल-2009 में घर-परिवार छोड़कर खुद को बहुजन आंदोलन के लिए समर्पित कर दिया था। बसपा के कद्दावर नेताओं में शामिल धर्मवीर अशोक के जरिए जयप्रकाश की बसपा में एंट्री हुई थी। पहले वह बसपा कार्यालय में बैठते थे। वहीं से वह मायावती के छोटे भाई आनंद के संपर्क में आए। बसपा के लिए समर्पित और अविवाहित जयप्रकाश सिंह ने बहुत कम समय में मायावती के खास लोगों में अपनी गिनती करा ली। मायावती ने पहले उन्हें धर्मवीर अशोक के साथ हरियाणा में लगाया, फिर राजस्थान की जिम्मेदारी सौंपी। मायावती ने जयप्रकाश का कद बढ़ाते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और नेशनल कोऑर्डिनेटर बना दिया। बसपा से निकाले जाने से पहले तक वह इसी पद पर थे। मायावती अक्सर अपनी सभाओं में कहती रहती थीं कि उनका उत्तराधिकारी जाटव हाेगा। उसकी उम्र मुझसे 20-30 साल छोटी होगी। तब लोग कयास लगाते थे कि ये चेहरा जयप्रकाश सिंह ही होंगे। जयप्रकाश सिंह को यही मुगालता भारी पड़ा। राहुल-सोनिया को विदेशी मूल का कहने पर हुआ था निष्कासन
मायावती को करीब से जानने वाले कहते हैं कि वह अनुशासन के मामले में काफी कठोर हैं। पिछले लोकसभा में उन्होंने भतीजे आकाश को सिर्फ इस वजह से निष्कासित कर दिया था कि वे चुनाव में पीएम मोदी को टारगेट कर रहे थे। 8 साल पहले इसी तरह के फैसले में जयप्रकाश सिंह का भी निष्कासन हुआ था। 17 जुलाई, 2018 को जयप्रकाश लखनऊ में बसपा के कोऑर्डिनेटरों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस बैठक में सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर जमकर हमला बोला था। जयप्रकाश ने कहा था कि राहुल गांधी अगर अपने पिता पर गए होते तो कुछ उम्मीद भी थी, लेकिन वो अपनी मां पर गए हैं। उसकी मां सोनिया गांधी विदेशी हैं, उसमें भी विदेशी खून है। इसलिए मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि वो भारतीय राजनीति में कभी सफल नहीं हो सकता। जयप्रकाश ने तब राहुल गांधी के पीएम की दावेदारी को खारिज करते हुए कहा था कि भारत का प्रधानमंत्री पेट से नहीं, बल्कि पेटी (बैलेट बाक्स) से निकलेगा। अब गांधी की टोपी में वोट नहीं बचा, वोट अंबेडकर के कोट में भरा पड़ा है। वेद, मनुस्मृति, गीता, रामायण सारे के सारे खोखले पड़ गए। एक पलड़े पर सारे ग्रंथ रख दीजिए और दूसरे पर संविधान, तो संविधान ही सब पर भारी है। जयप्रकाश ने मुख्यमंत्री योगी पर भी टिप्पणी करते हुए कहा था कि मंदिर में शक्ति होती, तो योगी गोरखपुर का मंदिर छोड़कर मुख्यमंत्री न बनते। उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद और उमा भारती का भी उदाहरण देते हुए कहा था कि इन सभी धार्मिक लोगों ने अपना मठ छोड़कर आप लोगों को मंदिर की घंटी बजाने में लगा दिया। उस समय हरियाणा और राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए बसपा का कांग्रेस से गठबंधन होने की बात चल रही थी। मायावती ने इस बयान के बाद जयप्रकाश को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पार्टी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर पद से हटाने के साथ ही निष्कासित भी कर दिया था। तब मायावती ने कार्रवाई करते हुए कहा था कि मुझे बसपा के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर जय प्रकाश सिंह के भाषण के बारे में पता चला। जिसमें उन्होंने बसपा की विचारधारा के खिलाफ बात कही है। उन्होंने दूसरे दलों के नेतृत्व के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी भी की। यह उनकी व्यक्तिगत राय है, जिससे पार्टी सहमत नहीं। ऐसे में उन्हें तत्काल सभी पदों से हटाया जाता है। 2021 में बसपा के नाम पर बटोर रहे थे चंदा, पुलिस से शिकायत हुई थी
बसपा से निकाले जाने के बाद जयप्रकाश सिंह 2021 में एक बार फिर सुर्खियों में तब जाए, जब उन पर खुद बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने चंदा वसूली का आरोप लगाया। मायावती ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि जयप्रकाश सिंह पार्टी से निष्कासित होने के बाद उन्हें सीएम बनाने के नाम पर घूम-घूमकर चंदा मांग रहे हैं। यह घोर अनुचित है। जयप्रकाश सिंह बसपा के मूवमेंट सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय की सोच से भटके हुए हैं। इसके बाद बसपा की नोएडा में तत्कालीन जिलाध्यक्ष रहीं लक्ष्मी सिंह ने बादलपुर थाने में इसकी शिकायत की थी। इसमें कहा था कि 19 जुलाई, 2021 को सोशल मीडिया के जरिए पता चला है कि पार्टी से निष्कासित जयप्रकाश और अन्य लोग पूर्व सीएम मायावती का नाम, फोटो और पार्टी के झंडे-बैनर का जाली तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ ही पार्टी के कार्यकर्ताओं से झूठ बोलकर चंदा वसूल रहे हैं। तब उन्होंने चंदे के नाम ठगी करते हुए एक बस को रथ बनाकर (कांशीराम विचार यात्रा) शुरू की थी। निष्कासन के बाद आकाश पर अक्सर करते रहते थे हमले
बसपा से निकाले जाने के बाद जयप्रकाश अक्सर मायावती के भतीजे आकाश पर सियासी वार करते रहते थे। वे सोशल मीडिया और कई मीडिया इंटरव्यू में दावे के साथ कहते थे कि बसपा को चंदे के रूप में मिले पैसे को आकाश करोड़ों के मकान बनाने और फैक्ट्री खोलने में खर्च कर रहे हैं। फिर इन फैक्ट्री में घाटा बताकर वह बहन मायावती से और पैसे मांगते हैं। इसके लिए उन्हें फिर चंदा लेना पड़ता है। एक इंटरव्यू में तो उन्होंने यहां तक दावा किया था कि पूरे यूपी को दो हिस्सों में बांट कर एक मुझे दे दो। दूसरा आकाश को दे दो। वे दावा करते थे कि मैं अपने आधे हिस्से को जीत कर अकेले मायावती को सीएम बना सकता हूं। कुछ महीने से सोशल मीडिया पर हृदय परिवर्तन दिखा रहे
बसपा से निकाले जाने के बाद जयप्रकाश सिंह जिस तेजी से आगे बढ़े थे, उसी तेजी से फर्श पर आ गए। बीच में चंद्रशेखर की तारीफ करने लगे थे। पिछले कुछ दिनों से वे सोशल मीडिया पर बसपा की तारीफ में जुटे हैं। मायावती ने जब 9 अक्टूबर के कार्यक्रम की घोषणा की थी, तो वे इसे सफल बनाने के लिए भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं से भी अपील करते हुए सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए थे। अपने कई वीडियो में वे कह रहे थे कि राजनीतिक रूप से बसपा ही दलितों की एकमात्र पार्टी है। वैचारिक रूप से हमारे अलग-अलग संगठन हो सकते हैं। वे 2027 के विधानसभा चुनाव में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी बसपा के पक्ष में वोट देने की अपील कर रहे हैं। बसपा से जुड़े एक पदाधिकारी की मानें, तो ऐसा वो घर वापसी के लिए कर रहे हैं। हालांकि उनकी ये कोशिश रंग लाती हुई दिख रही है। सूत्रों की मानें, तो उनकी घर वापसी की पूरी पटकथा लिखी जा चुकी है। वे माफी मांगते हुए पार्टी में वापसी की अपील कर चुके हैं। बस उस पर बसपा प्रमुख मायावती का सार्वजनिक मुहर लगाना बाकी है। क्यों अहम है बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक
बसपा सुप्रीमो मायावती 9 अक्टूबर के सफल कार्यक्रम के बाद अब अपने संगठन को धार देने में जुटी हैं। 16 अक्टूबर को वह यूपी-उत्तराखंड के पदाधिकारियों की बैठक लेकर संगठन से जुड़े अभियानों की समीक्षा कर चुकी हैं। इन दोनों राज्यों में बसपा ने 2027 का चुनाव अकेले लड़ने का निर्णय लिया है। रविवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। सुबह 11 बजे बैठक लखनऊ में ही पार्टी मुख्यालय में शुरू होगी। इस कार्यकारिणी की बैठक में यूपी-उत्तराखंड को छोड़कर देश भर के प्रदेश अध्यक्ष और राज्य प्रभारी सहित अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। मायावती की इस राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में राष्ट्रीय समन्वयक बनाए गए आकाश आनंद भी शामिल होंगे। 16 अक्टूबर की बैठक में स्वास्थ्य कारणों से वह शामिल नहीं हो पाए थे। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बिहार चुनाव के साथ अगले साल मई-जून में होने वाले राज्यों असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल व पुडुचेरी के विधानसभा को लेकर चर्चा होगी। पार्टी इन राज्यों में अपना जनाधार बढ़ाने के साथ विधानसभा चुनाव में भी मजबूती से उतरने की रणनीति बनाने में जुटी है। 2027 में यूपी-उत्तराखंड सहित कई राज्यों में चुनाव
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में 2027 में होने वाले यूपी-उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव के साथ गोवा, मणिपुर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और साल के आखिरी में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर अहम निर्णय लिए जाएंगे। 2028 मार्च में मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा में तो कर्नाटक में मई में विधानसभा चुनाव होने हैं। अगले 3 साल तक लगातार विधानसभा चुनाव और फिर 2029 में लोकसभा चुनाव होने हैं। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तय होगा कि बसपा कितने राज्यों में अकेले और कहां गठबंधन के साथ आगे बढ़ेगी। ————————— ये खबर भी पढ़ें… मैंने पति खोया, ससुराल में सुहाग तक उतरने नहीं दिया, यूपी में मॉब लिंचिंग के शिकार दलित युवक की पत्नी का दर्द ‘मैंने अपना पति खोया। ससुराल पहुंची तो ननद, सास, देवर ने मेरी गर्दन दबाते हुए मारपीट शुरू कर दी। मेरा सुहाग तक नहीं उतरने दिया और घर से भगा दिया…बेटी को लेकर पिता के घर में रह रही हूं। सरकार ने मुझे नौकरी का आश्वासन दिया था। पर नौकरी ननद को दे दी गई। मेरे ससुर सरकारी पेंशन पाते हैं। ननद कल को शादी के बाद अपने घर चली जाएगी। कल को मेरे पिता नहीं रहे, तो मैं बेटी को लेकर कहां जाऊंगी?’ ये कहते हुए माॅब लिंचिंग के शिकार हरिओम वाल्मीकि की पत्नी संगीता उर्फ रिंकी फफक पड़ती हैं। पढ़ें पूरी खबर

दीपावली पर तांत्रिक परंपराएं और जीव बलि:उल्लू-कछुए जैसे जीवों के लिए क्यों काल बन जाती है अमावस्या की रात?

दीपावली पर तांत्रिक परंपराएं और जीव बलि:उल्लू-कछुए जैसे जीवों के लिए क्यों काल बन जाती है अमावस्या की रात? दीपावली की रात तांत्रिक सिद्धियों के लिए जानी जाती है। मान्यता है, अमावस्या की रात तंत्र क्रियाओं से मां लक्ष्मी को प्रसन्न किया जा सकता है। यही वजह है कि कुछ खास जीव-जंतुओं के लिए यह रात जानलेवा साबित होती है। विशेषकर उल्लू और कछुए जैसे जीवों के लिए। इनको मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। लोक मान्यता है कि इनकी बलि देने या इन्हें तांत्रिक क्रियाओं में शामिल करने से धन, वैभव और सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इस बार संडे स्टोरी में पढ़िए दीपावली की रात तांत्रिक अनुष्ठान की मान्यता क्या है? किन जीव-वनस्पतियों का इस्तेमाल इन अनुष्ठान में किया जाता है? तांत्रिक और ज्योतिष से जुड़े जानकार इसे लेकर क्या कहते हैं? जानिए किन जीव और वनस्पतियों पर संकट यूपी में प्रमुख तांत्रिक केंद्र अब जानिए ज्योतिष के विद्वान क्या कहते हैं? बलि से नहीं, सच्ची शुभता सही कर्म, पूजा, दान और भक्ति से आती है
बीएचयू के ज्योतिषशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पांडेय बताते हैं- कुछ तांत्रिक मानते हैं कि किसी जीव की बलि देने से मंत्र या जादुई शक्तियां बढ़ती हैं। वे सोचते हैं कि यह राक्षस या नकारात्मक ऊर्जा को नियंत्रित करने का तरीका है। कुछ लोग कहते हैं कि बलि देने से धन, प्रेम, काम या शक्ति संबंधी इच्छाएं पूरी होती हैं। यह पूरी तरह से मानसिक और आस्था पर आधारित होता है। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। तांत्रिक कभी-कभी लोगों को डराकर या भय दिखाकर बलि देने को कहते हैं। जिससे लोग उनका सम्मान या पालन करें। पुराने समय में कुछ संस्कृतियों में बलि होती थी, लेकिन आज इसे गैरकानूनी और अमानवीय माना जाता है। डॉ. विनय कुमार पांडेय बताते हैं- आधुनिक तंत्र में बलि की जरूरत नहीं, बल्कि मंत्र, पूजा और ध्यान से ही कार्य सिद्ध हो सकते हैं। बलि देना गलत है, क्योंकि उल्लू को लक्ष्मी का वाहन बताते हैं। इसी वजह से कुछ लोगों को लगता है कि उल्लू को रख लेंगे तो लक्ष्मी हमेशा रहेंगी। लेकिन, ऐसा करने से लक्ष्मी रहती नहीं, चली जाती हैं। कुछ जगहों पर मान्यता है कि दीपावली की रात उल्लू की बलि देने से घर में धन, सौभाग्य और बुरी आत्माओं से सुरक्षा मिलती है। लेकिन, यह कानूनी और नैतिक रूप से गलत है। किसी जानवर की बलि देने से सकारात्मक ऊर्जा या शुभता नहीं आती। सच्ची शुभता सही कर्म, पूजा, दान और भक्ति से आती है। दीपावली की रात जीवित कछुए को अपने घर में रखने से लक्ष्मी ठहर जाती हैं। इसे लेकर डॉ. विनय कुमार पांडेय का कहना है कि यह मान्यता अंधविश्वास और शास्त्र विरुद्ध है। जीवित प्राणी को कैद या कष्ट देना पाप और कानूनी अपराध दोनों है। शास्त्रों में वर्णित सात्विक विधि-विधान सभी सामान्य जन के लिए उपयोगी हितकारक एंव प्रकृति के अनुकूल है। ग्रंथों में उल्लू की बलि का कोई विधान नहीं
कामाख्या संप्रदाय में अभिषिक्त तांत्रिक साकेत कुमार मिश्रा के अनुसार, इंद्रजाल के आधार पर टोना-टोटका और तांत्रिक प्रयोगों का उल्लेख मिलता है। दीपावली की रात को कुछ तांत्रिक लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए उल्लू की बलि देते हैं। ऐसा माना जाता है कि उल्लू माता लक्ष्मी का वाहन है। इसलिए उसकी बलि से तंत्र सिद्धि या धन प्राप्ति होती है। हालांकि, शास्त्रीय दृष्टि से यह पूरी तरह अमान्य और अनुचित है। वैदिक या धर्मशास्त्रीय ग्रंथों में उल्लू की बलि का कोई विधान नहीं है। यह प्रथा केवल इंद्रजाल तंत्र जैसी लोक-मान्य और अप्रामाणिक पुस्तकों में वर्णित है। जिनमें सोखा, ओझा या तांत्रिक रात्रि के निशा काल (रात 11 बजे के बाद) में ऐसे कर्म करते हैं। वास्तव में, शास्त्रीय ग्रंथों में केवल भैंसे या बकरी की बलि का उल्लेख है। वह भी विशिष्ट देवताओं की उपासना या तंत्र साधना के संदर्भ में, न कि लक्ष्मी पूजन के लिए। बलि प्रतीकात्मक इसका मतलब भेंट-अर्पण
तांत्रिक आयुष रुद्रा बताते हैं- तंत्र के तीन अलग-अलग तरीके हैं। टीवी पर जो तंत्र दिखाया जाता है, ऐसे होता नहीं है। दीपावली के दिन दो तरह की पूजा होती है। इच्छा पूर्ति के लिए और सिद्धि के लिए। इच्छा की कामना के लिए बलि दी जाती है। लेकिन बलि का मतलब भेंट-अर्पण होता है। दीपावली के लिए दिन जो धन वैभव के लिए पूजा की जो भेंट दी जाती है, उसमें फल कद्दू लौकी की बलि दी जाती है। कामाख्या तारापीठ में बलि का प्रावधान है। हालांकि, वहां के तरीके अलग हैं। कहीं भी नरबलि या जानवर बलि का प्रावधान नहीं है। जिनको जानकारी नहीं है, वो ऐसी चीजों को बढ़ावा देकर लाइम लाइट में रहते हैं। तंत्र एक विज्ञान है। लेकिन, लोगों ने इसको गलत तरीके से पेश करके गलत बना दिया है। लोग दुष्प्रचार कर जीवों की बलि जैसी बातें जोड़ते हैं
काशी अघोर पीठ के कपाली बाबा बताते हैं- दीपावली की रात को तंत्र साधना और पूजा के कई प्रकार होते हैं। लेकिन, वर्तमान में सोशल मीडिया और लोक कथाओं में कई भ्रांतियां फैल रही हैं। तांत्रिक परंपरा के विशेषज्ञों के अनुसार, दीपावली की रात के तंत्र प्रयोग शास्त्रीय और अहिंसात्मक होते हैं। इसमें कभी भी जीव हत्या या उल्लू की बलि शामिल नहीं होती। कपाली बाबा बताते हैं- दीपावली की रात 3 तरह के तांत्रिक प्रयोग होते हैं। आम का बांदा, कद्दू और लौकी जैसी वनस्पतियां त्रयोदशी की रात लाकर चतुर्दशी को पूजा में प्रयोग की जाती हैं। इसका उद्देश्य व्यापार और आर्थिक वृद्धि होता है। बंगाली तंत्र और कामाख्या तंत्र में पीला सिंदूर और प्रतीकात्मक सियार की सींग का प्रयोग लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किया जाता है। इसमें श्रीयंत्र या श्री चक्र की पूजा की जाती है। देवी की अर्चना 8 प्रकार से की जाती है। कपाली बाबा बताते हैं- काली कुल के याचक और यम द्वितीया पूजा अगले दिन तक चलती हैं। कई अबोध लोग इन प्रयोगों का गलत विवरण फैलाते हैं और जीवों की बलि देने जैसी बातें जोड़ते हैं। यह केवल सनसनी फैलाने और फेमस होने के लिए किया जाता है। शास्त्रीय और वैदिक परंपरा में दीपावली की रात का तंत्र प्रयोग सुरक्षित, प्रतीकात्मक और अहिंसात्मक होता है। इसका मुख्य उद्देश्य धन, वैभव और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करना है। तंत्र विद्या को लेकर क्या कहता है साइंस
ज्योतिषाचार्य श्रीधर पांडेय बताते हैं- तंत्र विद्या को अक्सर रहस्यमय और अंधविश्वासी माना जाता है। लेकिन, इसके पीछे वास्तविक विज्ञान और मनोविज्ञान मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, तंत्र केवल मंत्र, यंत्र और पूजन का समूह नहीं है। यह ऊर्जा, मानसिक एकाग्रता और वातावरणीय संतुलन पर आधारित प्रणाली है। तंत्र में इस्तेमाल मंत्र और यंत्र, हमारे मस्तिष्क और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और कंपन पैदा करते हैं। ध्यान और विजुलाइजेशन जैसी क्रियाएं मानसिक शक्ति और फोकस बढ़ाती हैं। वहीं दीपक, धूप और जल के प्रयोग से शरीर में मूड सुधारने वाले हार्मोन सक्रिय होते हैं और तनाव कम होता है। वन विभाग के डीएफओ सितांशु पांडेय कहते हैं दीपावली पर तांत्रिक क्रियाओं के नाम पर प्रतिबंधित प्रजातियों का अवैध शिकार और व्यापार चरम पर पहुंच जाता है। हमने रेंज के सभी वन कर्मियों को स्थानीय सूचना तंत्र मजबूत करने, सघन गश्त और रात्रि निगरानी के सख्त निर्देश जारी किए हैं। …………….. ये खबर भी पढ़ें… बागपत में चिताओं से अस्थियां गायब हो रहीं:8 महीने से गांववाले परेशान; क्या दिवाली पर तंत्र–मंत्र के लिए तांत्रिक चुरा रहे यूपी में बागपत के हिम्मतपुर सूजती गांव में लोग डरे हुए हैं। श्मशान घाट से अस्थियां गायब हो रही हैं। कुछ दिन पहले एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार हुआ। परिवार जब तीसरे दिन अस्थियां लेने गया, तो चिता के पास दीपक जल रहा था, उपले सुलग रहे थे और तंत्र-मंत्र का सामान बिखरा हुआ था। अस्थियां गायब थीं। पिछले आठ महीनों से श्मशान में ऐसी ही घटनाएं हो रही हैं। गांव वाले बताते हैं- पहले लगता था किसी जानवर का काम होगा, लेकिन हर बार चिता के पास पूजा-सामग्री, अगरबत्ती, नींबू और राख मिलती है। प्रशासन का कहना है कि ऐसी शिकायतें मिल रही हैं, हमारी टीम जांच कर रही है। पढ़िए पूरी खबर…

दिल्ली सीएम से मिले भाजपा नेता आर.पी. सिंह:बम धमाके के दोषी भुल्लर की रिहाई की मांग; अमृतसर मेडिकल कॉलेज में चल रहा इलाज

दिल्ली सीएम से मिले भाजपा नेता आर.पी. सिंह:बम धमाके के दोषी भुल्लर की रिहाई की मांग; अमृतसर मेडिकल कॉलेज में चल रहा इलाज बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता से मुलाकात की है और उन्हें एक पत्र भी लिखा है। उन्होंने दविंदर पाल सिंह भुल्लर के मामले की पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार मामले को सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (SRB) के सामने पेश किए जाने पर जोर दिया है। दिल्ली में हुए बम धमाकों के पीछे के दोषी दविंदर पाल सिंह भुल्लर की अब मानसिक हालत ठीक नहीं है। वे ना तो किसी को पहचानते हैं और ना ही किसी से बातचीत करते हैं। जानें आर.पी. सिंह​​​​​​​ ने क्या लिखा पत्र में दिल्ली सीएम को लिखा गया खत जानिए कौन हैं दविंदर पाल सिंह भुल्लर दविंदर पाल सिंह भुल्लर एक पूर्व इंजीनियरिंग प्रोफेसर हैं, जिनका जन्म 1965 में पंजाब में हुआ था। उन्हें 1993 में दिल्ली में हुए बम धमाके के लिए दोषी ठहराया गया, जिसमें 9 लोगों की मौत और 30 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस हमले का निशाना कांग्रेस नेता एमएस बिट्टा थे। भुल्लर को 2001 में टाडा कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई, लेकिन 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य आधार पर सजा को उम्रकैद में बदल दिया। वे पिछले 14 वर्षों से सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और अमृतसर के अस्पताल में जहरे इलाज हैं। लंबे समय से उनकी रिहाई या संवेदनशील पुनर्विचार की मांग विभिन्न संगठनों और परिजनों द्वारा की जा रही है।