कांग्रेस अपना 2017 का घोषणापत्र पेश करे और बताए कितने वादे पूरे किए: कुलदीप सिंह धालीवाल

कांग्रेस अपना 2017 का घोषणापत्र पेश करे और बताए कितने वादे पूरे किए: कुलदीप सिंह धालीवाल

पंजाब की राजनीति में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के बीच एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने पंजाब विधानसभा में कांग्रेस के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष को सदन में मिले समय का उपयोग नियमों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने विधानसभा में रचनात्मक बहस करने की बजाय राजनीतिक बयानबाजी को प्राथमिकता दी।

धालीवाल ने विशेष रूप से विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें कांग्रेस की ओर से मिले समय का संतुलित उपयोग करना चाहिए था, ताकि अन्य कांग्रेस विधायकों को भी अपनी बात रखने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक चर्चा का मंच है, जहां प्रत्येक सदस्य को निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी बात रखने का अधिकार और अवसर मिलना चाहिए।

विधानसभा में समय के उपयोग को लेकर उठाए सवाल

कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि पंजाब विधानसभा की कार्यवाही निर्धारित नियमों, प्रक्रियाओं और समय सीमा के अनुसार संचालित होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्टी को निर्धारित समय दिया गया था, लेकिन विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने अधिकांश समय स्वयं बोलने में व्यतीत किया।

उनके अनुसार इससे कांग्रेस के अन्य विधायकों को सदन में अपने विचार रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका। धालीवाल ने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को सदन में समय आवंटित किया जाता है तो उसका उपयोग सभी सदस्यों के बीच संतुलित तरीके से होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक निर्वाचित विधायक की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है और सदन की कार्यवाही में सभी सदस्यों की सक्रिय भूमिका लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करती है।

विधानसभा को निजी मंच की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता

धालीवाल ने अपने बयान में कहा कि विधानसभा एक संवैधानिक संस्था है और इसकी कार्यवाही निश्चित नियमों एवं संसदीय परंपराओं के अनुसार संचालित होती है। उन्होंने कहा कि इसे किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक मंच की तरह उपयोग नहीं किया जा सकता।

उनका कहना था कि सदन में सभी सदस्यों को नियमों का पालन करते हुए अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा की गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और विधायकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय लोकतंत्र में अनुशासन और प्रक्रियाओं का पालन लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक माना जाता है।

कांग्रेस विधायकों को बोलने का अवसर नहीं मिलने का आरोप

कुलदीप सिंह धालीवाल ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने न केवल अधिकांश समय स्वयं लिया बल्कि कांग्रेस के अन्य विधायकों को भी पर्याप्त अवसर नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि यदि किसी दल के अन्य विधायक अपनी बात रखना चाहते हैं तो उन्हें भी सदन में बोलने का अवसर मिलना चाहिए। धालीवाल के अनुसार सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों की आवाज विधानसभा में सुनी जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी दल के सदस्य सदन के भीतर अपनी बात नहीं रख पाते तो बाद में सार्वजनिक मंचों पर बयान देने से बेहतर है कि उन्हें विधानसभा में ही चर्चा का अवसर मिले।

संसदीय शिष्टाचार का पालन करने की सलाह

धालीवाल ने अपने बयान में प्रताप सिंह बाजवा द्वारा अपने पूर्व पदों का उल्लेख करने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विधानसभा में चर्चा वर्तमान मुद्दों और जनहित के विषयों पर केंद्रित होनी चाहिए।

उनका कहना था कि संसदीय परंपराओं के अनुसार सभी सदस्यों को समान सम्मान के साथ चर्चा में भाग लेना चाहिए और व्यक्तिगत उपलब्धियों या पूर्व पदों की बजाय वर्तमान जिम्मेदारियों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में प्रत्येक सदस्य संविधान और विधानसभा के नियमों के अंतर्गत कार्य करता है तथा सभी को संसदीय मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।

2017 के कांग्रेस घोषणापत्र का किया जिक्र

आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान जारी किए गए कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि चुनाव के समय किए गए वादों में से कितने वादों को सरकार बनने के बाद पूरा किया गया।

धालीवाल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी घोषणापत्र राजनीतिक दलों की प्रतिबद्धता का दस्तावेज माना जाता है। इसलिए जनता को यह जानने का अधिकार है कि चुनाव के दौरान किए गए वादों पर कितना अमल हुआ।

पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के कार्यकाल का उल्लेख

धालीवाल ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने विभिन्न क्षेत्रों में कई घोषणाएं की थीं।

उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को उन वादों और उनके क्रियान्वयन पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए। उनके अनुसार जनता के सामने यह जानकारी आनी चाहिए कि सरकार के कार्यकाल के दौरान किन योजनाओं को पूरा किया गया और किन पर कार्य अधूरा रहा।

धालीवाल ने कहा कि राजनीतिक दलों को समय-समय पर अपने प्रदर्शन का मूल्यांकन जनता के सामने प्रस्तुत करना चाहिए।

आप ने प्रदर्शन पर बहस की दी चुनौती

कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी अपने चुनावी वादों और सरकार के कामकाज पर खुली चर्चा के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस अपने वर्ष 2017 के घोषणापत्र और सरकार के प्रदर्शन पर चर्चा करना चाहती है तो आम आदमी पार्टी भी वर्ष 2022 के अपने चुनावी वादों और अब तक किए गए कार्यों को लेकर खुली बहस करने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि ऐसी बहस से जनता को दोनों दलों के दावों और उपलब्धियों की तुलना करने का अवसर मिलेगा।

चुनावी वादों पर सार्वजनिक चर्चा की मांग

धालीवाल ने कहा कि चुनावी घोषणापत्र केवल चुनाव जीतने का माध्यम नहीं होना चाहिए, बल्कि जनता के प्रति राजनीतिक दलों की जवाबदेही का आधार भी होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को समय-समय पर जनता को यह बताना चाहिए कि उनके चुनावी वादों की वर्तमान स्थिति क्या है और किन योजनाओं पर कितना कार्य पूरा हुआ है।

उनके अनुसार इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और मतदाताओं को भविष्य में निर्णय लेने में भी सुविधा होगी।

विधानसभा में रचनात्मक बहस पर दिया जोर

अपने बयान में धालीवाल ने कहा कि विधानसभा का उद्देश्य केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं बल्कि जनहित के विषयों पर गंभीर और रचनात्मक चर्चा करना है।

उन्होंने कहा कि सदन में किसानों, युवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, वित्तीय स्थिति और विकास योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए ताकि जनता की समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की भूमिका लोकतंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, लेकिन विपक्ष को भी रचनात्मक सुझाव देने और नियमों के अनुसार चर्चा में भाग लेने की परंपरा को मजबूत करना चाहिए।

राजनीतिक जवाबदेही पर दिया जोर

धालीवाल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता समय-समय पर राजनीतिक दलों के कार्यों का मूल्यांकन करती है। इसलिए प्रत्येक दल को अपने चुनावी वादों, सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों के बारे में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र और कार्यों पर खुली चर्चा के लिए तैयार रहते हैं तो इससे लोकतंत्र और अधिक मजबूत होता है तथा जनता को वास्तविक तथ्यों के आधार पर अपनी राय बनाने का अवसर मिलता है।

उन्होंने दोहराया कि आम आदमी पार्टी अपने चुनावी वादों और सरकार के प्रदर्शन पर किसी भी मंच पर चर्चा करने के लिए तैयार है और कांग्रेस को भी वर्ष 2017 के अपने घोषणापत्र तथा उसके क्रियान्वयन का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि जनता स्वयं दोनों दलों के दावों और कार्यों का आकलन कर सके।

Leave a Reply