DNA टेक्नोलॉजी से जिद्दी बैक्टीरिया पर वार: IIT बॉम्बे की खोज से फिर असरदार बन सकती हैं पुरानी एंटीबायोटिक्स

DNA टेक्नोलॉजी से जिद्दी बैक्टीरिया पर वार: IIT बॉम्बे की खोज से फिर असरदार बन सकती हैं पुरानी एंटीबायोटिक्स

दुनिया भर में बढ़ती एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या को लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से चिंतित हैं। जब आम संक्रमण तक की दवाएं असर करना बंद कर दें, तो इलाज मुश्किल हो जाता है। इसी चुनौती का हल खोजने की दिशा में IIT बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने एक नई उम्मीद जगाई है।

संस्थान के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी डीएनए आधारित तकनीक विकसित की है, जो सीधे नई दवा बनाने की बजाय मौजूदा एंटीबायोटिक्स को फिर से कारगर बनाने पर फोकस करती है। इस रिसर्च का नेतृत्व प्रोफेसर रुचि आनंद और प्रोफेसर पी.आई. प्रदीपकुमार ने किया है, जिसमें दो अहम अध्ययन शामिल हैं।

इस तकनीक की खास बात है “एप्टामर्स” का उपयोग। ये छोटे-छोटे सिंथेटिक डीएनए सीक्वेंस होते हैं, जिन्हें खास तरह से डिजाइन किया जाता है। जब बैक्टीरिया खुद को बचाने के लिए विशेष एंजाइम तैयार करते हैं, तो ये एप्टामर्स उन्हीं एंजाइम्स को निशाना बनाकर निष्क्रिय कर देते हैं।

सरल शब्दों में कहें तो, यह तकनीक बैक्टीरिया की सुरक्षा ढाल को ही कमजोर कर देती है, जिससे पुरानी एंटीबायोटिक दवाएं दोबारा अपना असर दिखा पाती हैं। पारंपरिक दवाओं की तुलना में ये डीएनए आधारित अणु ज्यादा स्थिर होते हैं, आसानी से बनाए जा सकते हैं और जरूरत के अनुसार बदले भी जा सकते हैं।

अगर यह तकनीक आगे सफल साबित होती है, तो यह एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी गंभीर वैश्विक समस्या के खिलाफ एक बड़ा हथियार साबित हो सकती है।