Easter 2026: आखिर ईस्टर पर अंडों को रंगने की परंपरा क्यों है? जानिए इसके पीछे का धार्मिक अर्थ

Easter 2026: आखिर ईस्टर पर अंडों को रंगने की परंपरा क्यों है? जानिए इसके पीछे का धार्मिक अर्थ

रविवार को दुनियाभर में ईस्टर का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। ईसाई समुदाय के लिए यह दिन बेहद खास होता है, क्योंकि इसे प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान (Resurrection) से जोड़ा जाता है। इस मौके पर चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं, लोग मोमबत्तियां जलाते हैं और भक्ति गीतों के जरिए अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।

ईस्टर के दिन एक खास परंपरा भी देखने को मिलती है, अंडों को रंगना और सजाना। रंग-बिरंगे अंडों को डिजाइन कर उन्हें उपहार के रूप में एक-दूसरे को दिया जाता है। लेकिन इसके पीछे सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। दरअसल, अंडे को नए जीवन और पुनर्जन्म का प्रतीक माना जाता है। जिस तरह अंडे से एक नया जीवन जन्म लेता है, उसी तरह ईसा मसीह ने मृत्यु के बाद फिर से जीवन प्राप्त किया था। यही वजह है कि ईस्टर के अवसर पर अंडों को सजाने की परंपरा शुरू हुई। इतिहास के अनुसार, यह परंपरा करीब 13वीं शताब्दी से चली आ रही है।

शुरुआती समय में अंडों को खासतौर पर लाल रंग से रंगा जाता था। यह रंग यीशु मसीह के बलिदान और उनके रक्त का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि यह प्रथा प्राचीन मेसोपोटामिया के ईसाइयों से शुरू हुई थी, जो समय के साथ दुनियाभर में फैल गई। ईस्टर के मौके पर “ईस्टर एग हंट” भी काफी लोकप्रिय है। इसमें अंडों को घर या बगीचे में छिपाया जाता है और बच्चे उन्हें खोजते हैं। यह खेल न सिर्फ मनोरंजन का साधन है, बल्कि बच्चों को इस त्योहार की परंपराओं और महत्व से भी जोड़ता है।

ईस्टर का त्योहार गुड फ्राइडे के बाद आने वाले रविवार को मनाया जाता है। ईसाई मान्यताओं के अनुसार, गुड फ्राइडे के दिन यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था, लेकिन तीसरे दिन यानी रविवार को वे पुनर्जीवित हो गए। यही कारण है कि इस दिन को ईस्टर संडे कहा जाता है। यह पर्व एक गहरा संदेश देता है, अंधकार के बाद प्रकाश आता है, दुख के बाद खुशी मिलती है और अंत के बाद एक नई शुरुआत होती है। ईस्टर न सिर्फ एक धार्मिक त्योहार है, बल्कि उम्मीद, विश्वास और नए जीवन का प्रतीक भी है।