RBI का सख्त कदम: बैंकों की डॉलर होल्डिंग पर लिमिट, रुपए को सहारा देने की कोशिश

RBI का सख्त कदम: बैंकों की डॉलर होल्डिंग पर लिमिट, रुपए को सहारा देने की कोशिश

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गिरते रुपए और बढ़ती मार्केट अस्थिरता को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। अब बैंकों को हर कारोबारी दिन के अंत में अपने पास 100 मिलियन डॉलर (लगभग ₹950 करोड़) से अधिक विदेशी मुद्रा रखने की अनुमति नहीं होगी। पहले यह सीमा व्यवहारिक रूप से काफी ज्यादा थी और बैंक 300 से 500 मिलियन डॉलर तक होल्ड कर रहे थे।

इस नए नियम के तहत RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपनी नेट ओपन पोजिशन (NOP-INR) को तय सीमा के भीतर रखें। इसका मतलब है कि बैंकों को अपने अनहेज्ड विदेशी मुद्रा एक्सपोजर को नियंत्रित करना होगा, जिससे फॉरेक्स मार्केट में अनावश्यक उतार-चढ़ाव कम हो सके।

10 अप्रैल तक पालन अनिवार्य

RBI ने सभी अधिकृत फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स को 10 अप्रैल तक इस नियम को लागू करने के लिए समय दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे बैंकों की सट्टेबाजी वाली डॉलर पोजीशन कम होगी और अचानक होने वाली तेज गिरावट पर रोक लगेगी।

रुपए पर दबाव क्यों बढ़ा?

हाल ही में रुपया डॉलर के मुकाबले ₹94.59 तक गिरकर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। बीते 10 ट्रेडिंग सत्रों में कई बार यह नया लो बना चुका है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

खासतौर पर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। फरवरी के अंत से अब तक रुपए में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई है।

रुपया और गिर सकता है?

कुछ विदेशी ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि यदि वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे तो रुपया ₹98 प्रति डॉलर तक भी जा सकता है। मौजूदा वित्त वर्ष में ही भारतीय मुद्रा करीब 10% कमजोर हो चुकी है, जो पिछले कई सालों में सबसे बड़ी गिरावट में से एक है।

इस फैसले का आम लोगों पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, जब बैंक अतिरिक्त डॉलर बाजार में बेचेंगे तो रुपए को मजबूती मिल सकती है। इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिल सकता है—विदेश यात्रा, पढ़ाई और आयातित सामान जैसे मोबाइल, लैपटॉप आदि सस्ते हो सकते हैं।

नेट ओपन पोजिशन क्या है?

नेट ओपन पोजिशन का अर्थ उस विदेशी मुद्रा से है जिसे बैंक ने खरीदा या बेचा है लेकिन उसे पूरी तरह सुरक्षित (हेज) नहीं किया है। पहले बैंक अपनी पूंजी के 25% तक की सीमा खुद तय कर सकते थे, लेकिन अब RBI ने इसे निश्चित रूप से 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया है।

ऐतिहासिक गिरावट की ओर इशारा

वित्त वर्ष 2025-26 में रुपए की गिरावट ने पिछले 14 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इससे पहले 2011-12 में यूरोजोन संकट के दौरान इतनी बड़ी गिरावट देखी गई थी।