राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह को लेकर हाल ही में खूब चर्चा देखने को मिली। इस खास मौके पर फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम शामिल हुए, जिनमें विक्की कौशल, शिल्पा शेट्टी, रणबीर कपूर और करण जौहर जैसे सितारे नजर आए। लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियां सलमान खान की मौजूदगी ने बटोरी। जैसे ही ‘संघ यात्रा के 100 वर्ष: नई उड़ान’ कार्यक्रम में सलमान दिखे, सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कई लोगों ने उनके शामिल होने पर सवाल खड़े कर दिए।
सलमान की मौजूदगी पर क्यों उठा विवाद?
कुछ यूजर्स ने सलमान खान को RSS से जोड़कर राजनीतिक नजरिए से देखना शुरू कर दिया। इसी को लेकर इंटरनेट पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ता देख महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सामने आए और उन्होंने आलोचनाओं पर खुलकर जवाब दिया।
ANI से बातचीत में एकनाथ शिंदे ने कहा कि सलमान खान को किसी राजनीतिक चश्मे से देखना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया, “सलमान खान अगर RSS के कार्यक्रम में जाते हैं तो इसमें हैरानी कैसी? क्या वो भारतीय नागरिक नहीं हैं?”
शिंदे ने आगे कहा कि सलमान भारतीय संस्कृति का सम्मान करते हैं, उनके घर में गणपति बप्पा की स्थापना होती है और उनका परिवार देश की परंपराओं को मानता है। ऐसे में उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाना बेबुनियाद है।
इस कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने सलमान खान का जिक्र करते हुए उनके प्रभाव की बात कही। उन्होंने बताया कि आज के युवा सलमान के पहनावे और स्टाइल को बिना सोचे-समझे फॉलो करते हैं। कॉलेज स्टूडेंट्स से जब पूछा जाता है कि उन्होंने ऐसा क्यों पहना है, तो जवाब मिलता है “सलमान पहनते हैं, इसलिए।” भागवत ने कहा कि समाज में ऐसे लोगों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, क्योंकि वही ट्रेंडसेटर होते हैं और उन्हें अच्छे मूल्यों को भी फैशन बनाना चाहिए। इस दौरान सलमान खान मुस्कुराते हुए उनकी बातों को ध्यान से सुनते नजर आए।
बैटल ऑफ गलवान को लेकर भी चर्चा में सलमान
वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ को लेकर सुर्खियों में हैं। पहले इसे अप्रैल में रिलीज करने की तैयारी थी, लेकिन अब खबरें हैं कि फिल्म अगस्त तक टल सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो बॉक्स ऑफिस पर इसकी टक्कर सनी देओल की ‘लाहौर 1947’ से हो सकती है। इस फिल्म में सलमान के साथ चित्रांगदा सिंह नजर आएंगी।
कुल मिलाकर, RSS कार्यक्रम में सलमान खान की मौजूदगी ने जहां एक ओर बहस छेड़ी, वहीं दूसरी ओर नेताओं और संगठन के प्रमुखों के बयानों ने इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया।




