निवेशकों के लिए बड़ी राहत की तैयारी करते हुए Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो से जुड़े नॉमिनेशन नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव पेश किया है। इस बदलाव का मकसद अकाउंट खोलने की प्रक्रिया को आसान बनाना और इंडस्ट्री में आ रही दिक्कतों को कम करना है।
क्या बदल सकता है?
SEBI के सुझाव के मुताबिक, नॉमिनी जोड़ने के लिए अब केवल दो जरूरी जानकारी मांगी जा सकती है—नॉमिनी का नाम और निवेशक से उसका संबंध। बाकी डिटेल्स जैसे पता, संपर्क जानकारी या हिस्सेदारी प्रतिशत को वैकल्पिक रखा जा सकता है।
नॉमिनी को मिल सकता है ज्यादा अधिकार
प्रस्ताव में यह भी शामिल है कि निवेशक चाहें तो अपने नॉमिनी को ऐसा अधिकार दे सकते हैं कि जरूरत पड़ने पर वह अकाउंट या फोलियो को ऑपरेट कर सके। यह सुविधा खासकर उन स्थितियों में उपयोगी होगी जब निवेशक खुद अकाउंट संभालने में सक्षम न हो।
नए अकाउंट में नॉमिनेशन होगा डिफॉल्ट
SEBI का सुझाव है कि नए डीमैट या म्यूचुअल फंड खाते खोलते समय नॉमिनेशन को डिफॉल्ट ऑप्शन बना दिया जाए। वहीं जिन खातों में अभी नॉमिनेशन नहीं है, उन्हें ईमेल और SMS के जरिए बार-बार रिमाइंडर भेजे जाएंगे।
नॉमिनी और जॉइंट होल्डर्स की सीमा
म्यूचुअल फंड में अधिकतम 4 नॉमिनी जोड़ने की अनुमति दी जा सकती है, जबकि जॉइंट अकाउंट होल्डर्स की संख्या पहले की तरह 3 ही रहेगी।
विशेष मामलों के लिए प्रावधान
अगर कोई निवेशक शारीरिक रूप से असमर्थ है लेकिन मानसिक रूप से सक्षम है, तो ऐसे मामलों में पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) के इस्तेमाल की अनुमति देने पर भी विचार किया जा रहा है।
मौजूदा नियमों में क्या परेशानी?
SEBI के अनुसार, वर्तमान नॉमिनेशन नियमों में कई चुनौतियां सामने आई हैं—जैसे ज्यादा अनुपालन लागत, ऑडिट ट्रेल बनाए रखने में कठिनाई, धोखाधड़ी का जोखिम और कानूनी विवाद।
आगे क्या होगा?
फिलहाल इन प्रस्तावों पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं। सभी प्रतिक्रियाओं के आधार पर SEBI अंतिम नियम तय करेगा, जिससे निवेशकों और इंडस्ट्री दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है।




