हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली उपमंडल की पालकवाह पंचायत के रिहायशी इलाके में सोमवार को एक तेंदुआ घुस आया। तेंदुए ने ग्रामीणों पर हमला कर दिया, जिसमें तीन लोग घायल हो गए। घायलों में से एक व्यक्ति की आंख में गंभीर चोट लगी है, जबकि दो अन्य को मामूली चोटें आई हैं। तेंदुए के गांव में घुसने के बाद ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से उस पर हमला किया। इसके बाद तेंदुआ ग्रामीणों से बचकर जंगल की ओर भाग गया। तेंदुए के हमले में 3 घायल जानकारी के अनुसार, तेंदुआ खेतों के बीच उगी झाड़ियों में शिकार की तलाश में बैठा था। जब कुछ लोग वहां से गुजर रहे थे, तो उनकी आवाज सुनकर तेंदुआ रिहायशी इलाके की ओर भागा। इसी भागदौड़ में तीन ग्रामीण तेंदुए की चपेट में आ गए। वन विभाग से पकड़ने की अपील ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़कर रिहायशी इलाके से दूर छोड़ने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि यह तेंदुआ पहले भी कई बार खेतों के आसपास देखा गया है। ग्रामीणों और बच्चों का खेतों की ओर आना-जाना लगा रहता है, जिससे किसी अनहोनी का खतरा बना रहता है। सोमवार को सारा दिन आसपास के गांव में लोगों में दहशत का माहौल बना रहा। हालात ऐसे हो गए कि लोगों ने न केवल अपने मवेशियों को मवेशी खानों में बंद कर दिया वही बच्चों को भी दीपावली त्योहार पर घर में दुबकने को मजबूर कर दिया। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली उपमंडल की पालकवाह पंचायत के रिहायशी इलाके में सोमवार को एक तेंदुआ घुस आया। तेंदुए ने ग्रामीणों पर हमला कर दिया, जिसमें तीन लोग घायल हो गए। घायलों में से एक व्यक्ति की आंख में गंभीर चोट लगी है, जबकि दो अन्य को मामूली चोटें आई हैं। तेंदुए के गांव में घुसने के बाद ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से उस पर हमला किया। इसके बाद तेंदुआ ग्रामीणों से बचकर जंगल की ओर भाग गया। तेंदुए के हमले में 3 घायल जानकारी के अनुसार, तेंदुआ खेतों के बीच उगी झाड़ियों में शिकार की तलाश में बैठा था। जब कुछ लोग वहां से गुजर रहे थे, तो उनकी आवाज सुनकर तेंदुआ रिहायशी इलाके की ओर भागा। इसी भागदौड़ में तीन ग्रामीण तेंदुए की चपेट में आ गए। वन विभाग से पकड़ने की अपील ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़कर रिहायशी इलाके से दूर छोड़ने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि यह तेंदुआ पहले भी कई बार खेतों के आसपास देखा गया है। ग्रामीणों और बच्चों का खेतों की ओर आना-जाना लगा रहता है, जिससे किसी अनहोनी का खतरा बना रहता है। सोमवार को सारा दिन आसपास के गांव में लोगों में दहशत का माहौल बना रहा। हालात ऐसे हो गए कि लोगों ने न केवल अपने मवेशियों को मवेशी खानों में बंद कर दिया वही बच्चों को भी दीपावली त्योहार पर घर में दुबकने को मजबूर कर दिया। हिमाचल | दैनिक भास्कर
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धर्मशाला साइबर पुलिस ने 5 ठगों को पकड़ा:68.85 लाख रुपए की ऑनलाइन धोखाधड़ी, 9.20 लाख नकद बरामद धर्मशाला साइबर पुलिस ने साइबर अपराधों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। नॉर्थ रेंज धर्मशाला की साइबर पुलिस ने राजस्थान के जोधपुर जिले से पांच शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। इन ठगों ने हिमाचल और अन्य राज्यों के लोगों से फर्जीवाड़े के जरिए ₹68.85 लाख से अधिक की ऑनलाइन ठगी की थी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹9.20 लाख नकद भी बरामद किए हैं। यह गिरोह फर्जी निवेश योजनाओं, ऑनलाइन नौकरी के प्रस्तावों और ई-कॉमर्स धोखाधड़ी के माध्यम से लोगों को अपना शिकार बनाता था। यह बड़ी कार्रवाई साइबर पुलिस टीम ने इंस्पेक्टर कमलेश कुमार के नेतृत्व में की। टीम ने राजस्थान में कई दिनों तक दबिश देकर इन आरोपियों को गिरफ्तार किया। ठगी के 3 अलग-अलग मामले पुलिस ने इन पांच आरोपियों को तीन अलग-अलग साइबर ठगी के मामलों में गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों की उम्र 25 से 31 साल के बीच है। पहले मामले में, 2 जून 2023 को दर्ज शिकायत के आधार पर जोधपुर की मादेरना कॉलोनी निवासी खुशदीप दिवाकर को गिरफ्तार किया गया। उस पर फर्जी निवेश योजनाओं और ऑनलाइन डीलिंग के नाम पर ₹40 लाख की ठगी का आरोप है। दूसरे मामले में, 30 सितंबर 2023 को दर्ज शिकायत के बाद जोधपुर के तीन आरोपियों – शाहरुख खान, अहमद राज और राहुल चौधरी को पकड़ा गया। इन पर सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स साइट्स के माध्यम से फर्जी लेन-देन कर ₹6.60 लाख की ठगी करने का आरोप है। आरोपी राहुल चौधरी को पुलिस धर्मशाला लेकर आई है। तीसरे मामले में, 5 फरवरी 2024 को दर्ज शिकायत के अनुसार लूणी (जोधपुर) निवासी दिनेश को गिरफ्तार किया गया। उस पर ऑनलाइन ट्रेडिंग और जॉब ऑफर के नाम पर ₹22.25 लाख की ठगी करने का आरोप है। पुलिस क्या बोली? बरामदगी और आगे की जांच एएसपी (साइबर क्राइम) धर्मशाला, प्रवीन धीमान ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से अब तक ₹9.20 लाख की राशि बरामद कर ली गई है, जिसमें ₹7.40 लाख रुपए गिरफ्तार आरोपियों से मिले हैं। उन्होंने बताया कि इस गिरोह का नेटवर्क केवल जोधपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैले होने का शक है। पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए अन्य राज्यों में भी टीमें भेजी गई हैं। पुलिस डिजिटल ट्रेल, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की मदद से बाकी सदस्यों तक पहुंचने में जुटी है। पुलिस की चेतावनी ऑनलाइन झांसे से बचें साइबर पुलिस के अनुसार, यह गिरोह फर्जी वेबसाइट्स, सोशल मीडिया विज्ञापनों और व्हाट्सएप, मैसेज के जरिए लोगों को आसान निवेश या पार्ट-टाइम नौकरी का झांसा देकर फंसाता था। एएसपी साइबर क्राइम, प्रवीन धीमान ने जनता से अपील की है, “ऑनलाइन निवेश, पार्ट-टाइम जॉब या लॉटरी जैसे झांसे में न आएं। किसी भी लिंक या QR कोड को स्कैन करने से पहले सोचें, वर्ना बैंक बैलेंस गायब हो सकता है। कोई भी ऑनलाइन लिंक या ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच जरूर करें और 1930 साइबर हेल्पलाइन या www.cybercrime.gov.in पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।”
हिमाचल शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा पैटर्न बदला:10वीं-12वीं में A-B-C प्रश्नपत्रों का अंतर समाप्त, 20 प्रतिशत बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे
हिमाचल शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा पैटर्न बदला:10वीं-12वीं में A-B-C प्रश्नपत्रों का अंतर समाप्त, 20 प्रतिशत बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे हिमाचल प्रदेश विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने विद्यार्थियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मार्च 2026 से कक्षा दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में प्रश्न पत्रों की तीनों श्रृंखलाओं (ए, बी और सी) में अब समान प्रश्न होंगे। केवल प्रश्नों का क्रम बदला जाएगा, जिससे सभी विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें। बोर्ड के अध्यक्ष डॉक्टर राजेश शर्मा ने बताया कि अभी तक तीनों श्रृंखलाओं में प्रश्न अलग-अलग होते थे, जिससे छात्रों को कई बार असमान स्तर की परीक्षा देनी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि नई प्रणाली पारदर्शी और निष्पक्ष होगी, जिससे सभी विद्यार्थियों का मूल्यांकन समान रूप से किया जा सके। अगले साल से नया पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बोर्ड ने एक और बड़ा बदलाव किया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के कक्षा चार से छह तक के विद्यार्थियों के लिए दिल्ली एनसीईआरटी द्वारा तैयार नया पाठ्यक्रम लागू होगा। इस नई व्यवस्था से छात्रों को पूरे देश में समान स्तर की शिक्षा प्राप्त होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि सभी पाठ्यपुस्तकें एनसीईआरटी, दिल्ली के साथ प्रकाशन अनुबंध के तहत ही मुद्रित और वितरित की जाएंगी। इससे गुणवत्ता और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।राज्य के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे नीट और जेईई के लिए तैयार करने के उद्देश्य से बोर्ड ने परीक्षा प्रणाली में एक और सुधार किया है। अब बोर्ड परीक्षाओं में बीस प्रतिशत प्रश्न वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) होंगे और उनके उत्तर ओएमआर पत्रक में अंकित किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय परीक्षा प्रारूप का अनुभव प्राप्त होगा। इन सभी सुधारों का उद्देश्य एक समान, निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था विकसित करना है, ताकि हिमाचल के विद्यार्थी राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें। यह कदम शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, विश्वसनीय और विद्यार्थी-केंद्रित बनाएगा।
रामपुर लवी मेले में दिखेगी स्पीति घोड़ों की दौड़:एक से तीन नवंबर लगेगी अश्व प्रदर्शनी. 11 से 14 तक आयोजित होगा अंतरराष्ट्रीय मेला
रामपुर लवी मेले में दिखेगी स्पीति घोड़ों की दौड़:एक से तीन नवंबर लगेगी अश्व प्रदर्शनी. 11 से 14 तक आयोजित होगा अंतरराष्ट्रीय मेला अंतर्राष्ट्रीय लवी मेले के उपलक्ष्य में इस वर्ष एक से तीन नवंबर तक अश्व प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इसमें उन्नत नस्ल के घोड़ों की दौड़ भी देखने को मिलेगी। प्रशासन ने लवी मेले में लगने वाली अस्थाई दुकानों को देखते हुए प्रदर्शनी लगाने का निर्णय लिया है। रामपुर व्यापारिक व ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। यहां का अंतर्राष्ट्रीय लवी मेला इस साल 11 से 14 नवंबर तक आयोजित हो रहा है। यह मेला न केवल रोजमर्रा के सामान के व्यापार का केंद्र है, बल्कि पशु व्यापार, विशेषकर स्पीति नस्ल के घोड़ों के लिए भी प्रसिद्ध है। अश्व प्रदर्शनी में क्या होगा अश्व प्रदर्शनी के दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 1 नवंबर को पशुपालन विभाग द्वारा घोड़ों का पंजीकरण किया जाएगा। 2 नवंबर को अश्वपालकों के लिए उन्नत प्रजनन तकनीक और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए गोष्ठी का आयोजन होगा। 3 नवंबर को उत्तम घोड़ों का चयन, 400 मीटर और 800 मीटर की रोमांचक घुड़दौड़, तथा गुब्बारा फोड़ प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। स्पीति घोड़ों को क्यों कहते हैं शीत मरुस्थल का जहाज स्पीति घोड़े मजबूत कद-काठी, भारी बर्फ में चलने और ऊंचाई पर कार्य करने की योग्यता के लिए जाने जाते हैं। इन्हें “शीत मरुस्थल का जहाज़” भी कहा जाता है। मूल रूप से तिब्बत के पठार में उत्पन्न होने वाले ये घोड़े बाद में व्यापारियों द्वारा लाहौल-स्पीति और किन्नौर के दुर्गम क्षेत्रों में लाए गए थे। वर्तमान में ये मुख्यतः स्पीति घाटी की पिन वैली और किन्नौर जिले की भाबा वैली में पाए जाते हैं। उत्तराखंड से भी आते हैं व्यापारी प्रदर्शनी के समापन पर मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कार वितरण समारोह होगा। पशुपालन विभाग द्वारा अश्व प्रदर्शनी में भाग लेने वाले सभी घोड़ों को निःशुल्क चारा और दाना प्रदान किया जाएगा। यह मेला कुल्लू, मंडी, उत्तराखंड और अन्य क्षेत्रों से खरीदारों और पशु प्रेमियों को आकर्षित करता है।
