हिमाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी माहौल को देखते हुए कड़ा रुख अपनाते हुए करोड़ों रुपये की नई निविदाओं को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आदर्श आचार संहिता लागू रहने तक किसी भी नई टेंडर प्रक्रिया को शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
आयोग के अनुसार, 31 मई तक सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी प्रकार की नई निविदाएं जारी न करें और न ही उससे संबंधित प्रस्ताव भेजें। यह फैसला चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आचार संहिता के दौरान नए विकास कार्यों की घोषणा, स्वीकृति या टेंडर जारी करना नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। यदि किसी विभाग द्वारा इन निर्देशों की अनदेखी की जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
इस फैसले के तहत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जल शक्ति विभाग समेत कई अन्य विभागों द्वारा प्रस्तावित करोड़ों रुपये के टेंडरों को फिलहाल रोक दिया गया है। आयोग ने विभागों को यह भी हिदायत दी है कि इस अवधि में टेंडरों से जुड़े किसी भी प्रकार के आवेदन भेजने की आवश्यकता नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में विभिन्न विभागों ने सड़कों, पेयजल योजनाओं, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए बड़े स्तर पर निविदाएं जारी करने की अनुमति मांगी थी। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत करोड़ों रुपये में थी, लेकिन आयोग ने सभी प्रस्तावों को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
आयोग के इस फैसले का असर विकास कार्यों की गति पर अस्थायी रूप से पड़ सकता है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यह कदम चुनावी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी है। चुनाव खत्म होने के बाद इन परियोजनाओं को फिर से प्रक्रिया में लाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आचार संहिता के दौरान इस तरह की सख्ती लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाती है और यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी मशीनरी का उपयोग चुनावी लाभ के लिए न किया जाए।
फिलहाल, सभी विभाग आयोग के निर्देशों का पालन करने में जुटे हैं और आगे की रणनीति चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही तय की जाएगी।


