अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकते हुए सीजफायर को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। यह कदम पाकिस्तान की ओर से आई अपील के बाद उठाया गया है, जिसमें कुछ समय के लिए तनाव कम करने और बातचीत का रास्ता निकालने की बात कही गई थी।
इसी कड़ी में, पाकिस्तानी विदेश मंत्री Ishaq Dar ने मंगलवार को अमेरिकी राजनयिक नताली बेकर से मुलाकात कर अमेरिका से सीजफायर बढ़ाने की अपील की। इस बातचीत को हालात को शांत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
ट्रम्प ने साफ किया कि ईरान के अंदर इस समय राजनीतिक और नेतृत्व स्तर पर एकजुटता की कमी दिखाई दे रही है। ऐसे हालात में सीधे सैन्य दबाव बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक प्रक्रिया को मौका देना जरूरी समझा गया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और वहां की सेना के शीर्ष अधिकारियों ने अमेरिका से आग्रह किया था कि ईरान को एक साझा और ठोस प्रस्ताव तैयार करने के लिए समय दिया जाए।
इसी के तहत अमेरिकी सेना को फिलहाल हमले रोकने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि ट्रम्प ने यह भी स्पष्ट किया कि सेना को पूरी तरह अलर्ट मोड में रखा गया है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है। इसके साथ ही ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए समुद्री नाकेबंदी (ब्लॉकेड) जारी रखने की बात भी सामने आई है। ट्रम्प के मुताबिक यह युद्धविराम तब तक जारी रहेगा, जब तक ईरान अपनी ओर से कोई स्पष्ट और एकजुट प्रस्ताव पेश नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत का नतीजा चाहे जो भी निकले, अमेरिका अपने हितों से समझौता नहीं करेगा।
बीते 24 घंटों में घटनाक्रम तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पिछले एक दिन में कई अहम मोड़ देखने को मिले हैं, जो इस संकट की गंभीरता को और बढ़ाते हैं। सबसे पहले, ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई ठोस शांति समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि सीजफायर को अनिश्चितकाल तक बढ़ाया नहीं जाएगा।
दूसरी ओर, वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम Strait of Hormuz को लेकर भी हलचल तेज हो गई है। इस जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए ब्रिटेन और फ्रांस ने करीब 30 देशों की बैठक बुलाने का फैसला किया है, जो लंदन में आयोजित हो रही है। इस बैठक को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance की पाकिस्तान यात्रा को अचानक स्थगित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि ईरान ने बातचीत के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान भेजने से इनकार कर दिया, जिसके बाद यह दौरा टालना पड़ा।
वहीं, यमन में सक्रिय Houthi movement ने चेतावनी दी है कि यह संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। उनके मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच हुआ युद्धविराम बेहद कमजोर है और आने वाले समय में स्थिति और बिगड़ सकती है। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी को अमेरिका की बड़ी रणनीतिक गलती करार दिया और कहा कि इस कदम के बाद ईरान का रुख पहले से ज्यादा सख्त हो गया है।
आगे क्या?
फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। एक ओर कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य तैयारियां भी अपने चरम पर हैं। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या ईरान कोई ऐसा प्रस्ताव पेश कर पाएगा, जिससे तनाव स्थायी रूप से कम हो सके या फिर यह संघर्ष एक बार फिर भड़क सकता है।




