सिटी ब्यूटीफुल कहे जाने वाले Chandigarh में अब ट्रैफिक और पार्किंग सबसे बड़ी शहरी चुनौती बनते जा रहे हैं। हालात ऐसे हो चुके हैं कि शहर में लगभग हर तीन मिनट में एक नई कार सड़कों पर उतर रही है। तेजी से बढ़ते वाहनों ने न सिर्फ पार्किंग व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है, बल्कि ग्रीन बेल्ट, फुटपाथ, साइकिल ट्रैक और पार्क भी अब अस्थायी पार्किंग स्थलों में बदलते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस नीति नहीं बनाई गई तो आने वाले वर्षों में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
करीब पांच लाख लोगों की आबादी को ध्यान में रखकर बसाए गए शहर की आबादी अब 12 लाख के पार पहुंच चुकी है। वहीं ट्राईसिटी क्षेत्र—चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला—की संयुक्त आबादी लगातार तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि वर्ष 2051 तक अकेले चंडीगढ़ की आबादी 23 लाख तक पहुंच सकती है, जबकि पूरे ट्राईसिटी क्षेत्र में यह आंकड़ा 45 लाख के करीब होगा। ऐसे में सड़कें, पार्किंग और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ना तय माना जा रहा है।
पार्किंग की जगह खत्म, सड़कें बनीं अस्थायी स्टैंड
शहर के कई सेक्टरों में पार्किंग की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। आवासीय इलाकों में लोग अपने वाहनों को पार्कों, ग्रीन बेल्ट और यहां तक कि खेल मैदानों के किनारे खड़ा करने को मजबूर हैं। जिन छोटे पार्कों को बच्चों और बुजुर्गों के लिए बनाया गया था, वहां अब कारों की कतारें दिखाई देती हैं। कई क्षेत्रों में दोहरी लाइन में खड़ी गाड़ियों के कारण सड़कें संकरी हो चुकी हैं और ट्रैफिक जाम आम बात बन गई है।
स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर के प्रमुख सरकारी कार्यालयों, अदालत परिसरों और व्यावसायिक क्षेत्रों में भी पार्किंग पूरी तरह भर चुकी है। Punjab and Haryana High Court और जिला अदालत परिसर के बाहर वाहनों की लंबी कतारें रोज दिखाई देती हैं। कई बार एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को भी रास्ता बनाने में परेशानी होती है।
देश में सबसे अधिक कार घनत्व वाला शहर
चंडीगढ़ देश में प्रति हजार लोगों पर सबसे अधिक कारों वाला शहर बन चुका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार शहर में प्रति 1000 लोगों पर 731 कारें हैं, जो देश के अन्य बड़े शहरों की तुलना में कहीं अधिक है। यह आंकड़ा शहर की बढ़ती आर्थिक क्षमता को दर्शाता है, लेकिन साथ ही यह भी बताता है कि सार्वजनिक परिवहन पर लोगों की निर्भरता लगातार घट रही है।
वर्ष 2025 में अब तक कुल 49,533 नए वाहनों का पंजीकरण हुआ है। इनमें लगभग 20,489 कारें और 24,904 दोपहिया वाहन शामिल हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है और करीब 600 इलेक्ट्रिक कारें पंजीकृत हुई हैं। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक शहर में रोजाना 175 से अधिक नए वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं।
पड़ोसी शहरों का दबाव भी बढ़ा रहा परेशानी
चंडीगढ़ की ट्रैफिक समस्या केवल स्थानीय वाहनों तक सीमित नहीं है। पंचकूला-मोहाली से भी प्रतिदिन करीब डेढ़ लाख वाहन शहर में प्रवेश करते हैं। नौकरी, शिक्षा, कारोबार और सरकारी कामकाज के लिए बड़ी संख्या में लोग रोजाना चंडीगढ़ आते हैं, जिससे पार्किंग और ट्रैफिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ट्राईसिटी के लिए एकीकृत ट्रांसपोर्ट प्लान तैयार नहीं किया गया तो आने वाले समय में हालात और खराब हो सकते हैं। मेट्रो, बेहतर बस नेटवर्क, मल्टीलेवल पार्किंग और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदम अब बेहद जरूरी हो चुके हैं।
पार्किंग स्थलों की संख्या कम पड़ रही
शहर में फिलहाल 89 पेड पार्किंग स्थल हैं, जिनमें करीब 22,725 कारों के लिए जगह उपलब्ध है। इसके अलावा लगभग 200 फ्री पार्किंग क्षेत्र भी हैं, लेकिन इसके बावजूद वाहन चालकों को पार्किंग नहीं मिल रही। कई बाजारों और रिहायशी सेक्टरों में लोग सड़क किनारे वाहन खड़े करने को मजबूर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहर की मूल डिजाइन में इतने बड़े वाहन दबाव की कल्पना नहीं की गई थी। फ्रांसीसी वास्तुकार ली कार्बूजिए ने जिस आधुनिक और व्यवस्थित शहर की परिकल्पना की थी, वह अब बढ़ती आबादी और वाहनों के बोझ से जूझ रहा है।
समाधान की दिशा में क्या जरूरी?
शहरी योजनाकारों का मानना है कि केवल चालान या पार्किंग शुल्क बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए दीर्घकालिक नीति बनानी होगी। मल्टीलेवल पार्किंग, पार्क एंड राइड सुविधा, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, साइकिल ट्रैक की सुरक्षा और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम करना जरूरी है। इसके साथ ही आवासीय क्षेत्रों में नई पार्किंग नीति लागू करने की भी जरूरत महसूस की जा रही है।
यदि अभी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में चंडीगढ़ की पहचान साफ-सुथरे और व्यवस्थित शहर की बजाय ट्रैफिक और पार्किंग संकट से जूझते शहर के रूप में होने लगेगी।


