चंडीगढ़ में औद्योगिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से यूटी प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहल की है। प्रशासन ने चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में संशोधन संबंधी एडेंडम जारी करते हुए औद्योगिक भूखंडों के उपयोग को अधिक लचीला बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद बड़े इंडस्ट्रियल प्लॉट्स को निर्धारित शर्तों के तहत छोटे हिस्सों में विभाजित किया जा सकेगा, जिससे निवेश, रोजगार और नए उद्यमों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन का मानना है कि शहर में औद्योगिक भूमि की सीमित उपलब्धता को देखते हुए उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग जरूरी है। वर्तमान व्यवस्था में औद्योगिक प्लॉट्स को जोड़ने (अमलगमेशन) की अनुमति तो है, लेकिन किसी बड़े प्लॉट को छोटे भूखंडों में बांटने का प्रावधान नहीं है। यही कारण है कि कई उद्यमी और निवेशक लंबे समय से इस नियम में बदलाव की मांग कर रहे थे।
प्रस्तावित बदलाव के तहत औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 में स्थित बड़े प्लॉट्स का विभाजन संभव हो सकेगा। इससे एक ही परिसर में विभिन्न कारोबारी इकाइयों के संचालन का रास्ता खुलेगा। विशेष रूप से माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई), स्टार्टअप्स, आईटी सेवाओं, डिजाइन, इंजीनियरिंग और अन्य सेवा आधारित उद्योगों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में कई औद्योगिक भूखंडों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। यदि इन्हें छोटे-छोटे हिस्सों में विकसित किया जाता है तो अधिक उद्यमियों को कारोबार शुरू करने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
प्रशासन द्वारा प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार प्लॉट विभाजन की अनुमति स्वतः नहीं मिलेगी। इसके लिए संशोधित प्लानिंग मानकों, जोनिंग नियमों और अन्य निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। विभाजन प्रक्रिया को नियंत्रित करने और अव्यवस्थित विकास को रोकने के लिए अलग से विस्तृत नीति अधिसूचित की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, यूटी प्रशासन इस संबंध में पड़ोसी क्षेत्रों के सफल मॉडलों का भी अध्ययन कर रहा है। विशेष रूप से मोहाली और पंजाब के औद्योगिक क्षेत्रों में लागू प्लॉट विभाजन व्यवस्था का मूल्यांकन किया जा रहा है, जहां इस मॉडल ने छोटे और मध्यम उद्योगों को विस्तार का अवसर प्रदान किया है।
व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे चंडीगढ़ में निवेश आकर्षित होगा, खाली या कम उपयोग हो रही औद्योगिक संपत्तियों का बेहतर उपयोग संभव होगा और शहर का औद्योगिक आधार पहले की तुलना में अधिक मजबूत बन सकेगा। आने वाले समय में यह फैसला चंडीगढ़ को सेवा क्षेत्र और नवाचार आधारित उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित हो सकता है।



