चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में वर्षों तक पद खाली रखना गंभीर लापरवाही है और केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए। कोर्ट की सख्ती के बाद अब प्रशासन ने 582 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया तेज करने का भरोसा दिया है।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का पूरा ब्योरा रखा गया। अदालत को बताया गया कि चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में कुल 4,798 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से करीब 1,010 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। यानी लगभग हर पांचवां पद रिक्त है। इस पर कोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि जब शिक्षक-छात्र अनुपात सीधे शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है तो इतनी बड़ी संख्या में पद अब तक क्यों नहीं भरे गए।
यूटी प्रशासन की ओर से दलील दी गई कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत फिलहाल छात्र-शिक्षक अनुपात औसतन 27:1 है, जो निर्धारित मानकों के भीतर आता है। प्रशासन ने कहा कि प्राथमिक स्तर पर 30:1 और उच्च प्राथमिक स्तर पर 35:1 का मानक तय है, इसलिए तकनीकी रूप से नियमों का उल्लंघन नहीं हो रहा। हालांकि प्रशासन ने यह भी माना कि जमीनी स्तर पर शिक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
अदालत को यह भी बताया गया कि पिछले वर्ष 780 शिक्षकों की भर्ती की गई थी और अब 582 नए पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। प्रशासन के अनुसार भर्ती संबंधी प्रस्ताव वित्त विभाग को भेज दिया गया है और जुलाई 2026 तक भर्ती विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने प्रशासन के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्पष्ट कहा कि केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। अदालत ने आदेश दिया कि 31 जुलाई तक कम से कम 582 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया जाए और अगली सुनवाई में चरणबद्ध भर्ती की विस्तृत योजना पेश की जाए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “यदि इच्छाशक्ति हो तो कुछ भी कठिन नहीं।” अदालत ने यह भी संकेत दिए कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में प्रशासनिक ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मामले में निजी स्कूल एसोसिएशन ने भी हस्तक्षेप किया। एसोसिएशन ने अदालत को बताया कि केवल स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों (एसएमसी) की बैठकें दिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरटीई एक्ट की धारा 8 और 34 के तहत गुणवत्ता शिक्षा सुनिश्चित करना और राज्य सलाहकार परिषद की नियमित बैठकें कराना भी जरूरी है।
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में हाईकोर्ट द्वारा हर दो महीने में राज्य सलाहकार परिषद की बैठक कराने के आदेश दिए गए थे, लेकिन उनका पालन नियमित रूप से नहीं हुआ। इस पर अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए शिक्षा सचिव को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने प्रशासन से स्कूलवार विस्तृत डेटा भी मांगा है। इसमें प्रत्येक स्कूल में शिक्षकों की संख्या, रिक्त पदों की स्थिति, छात्रों की संख्या, स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों की बैठक का रिकॉर्ड और स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की जानकारी शामिल होगी। अदालत ने कहा कि प्रशासन को यह भी बताना होगा कि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।


