चंडीगढ़ और जीरकपुर के बीच रोजाना लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने ट्रिब्यून चौक से जीरकपुर सीमा तक प्रस्तावित एलिवेटेड फ्लाईओवर परियोजना को आगे बढ़ाते हुए इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से इसके लिए एक सलाहकार एजेंसी नियुक्त की गई है, जो आगामी तीन महीनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
करीब 4.5 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को सिग्नल-फ्री बनाने की योजना है। अधिकारियों के मुताबिक इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान लगाया गया है। फ्लाईओवर बनने के बाद ट्रिब्यून चौक से जीरकपुर तक वाहन बिना किसी रेड लाइट पर रुके सीधे सफर कर सकेंगे, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
दो चरणों में विकसित होगा प्रोजेक्ट
तकनीकी कारणों के चलते इस फ्लाईओवर को एक ही हिस्से में बनाना संभव नहीं माना गया। पोल्ट्री फार्म चौक के समीप पहले से मौजूद रेलवे ओवरब्रिज के कारण इंजीनियरों ने परियोजना को दो भागों में विभाजित करने का फैसला लिया है।
योजना के तहत पहला हिस्सा ट्रिब्यून चौक के आसपास तैयार किया जाएगा, जबकि दूसरा फ्लाईओवर रेलवे ओवरब्रिज के पास से शुरू होकर जीरकपुर सीमा पर प्रस्तावित संरचना से जोड़ा जाएगा। इससे पोल्ट्री फार्म चौक, हल्लोमाजरा लाइट प्वाइंट और पुराने एयरपोर्ट रोड पर लंबे समय से बनी ट्रैफिक समस्या में काफी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
रोजाना डेढ़ लाख के करीब वाहनों का दबाव
ट्रिब्यून चौक चंडीगढ़ के सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शनों में गिना जाता है। यहां प्रतिदिन लगभग 1.43 लाख वाहन गुजरते हैं, जिनमें निजी कारों और अन्य यात्री वाहनों की संख्या सबसे अधिक है। सुबह ऑफिस समय और शाम को वापसी के दौरान यहां कई किलोमीटर लंबा जाम लगना आम बात बन चुकी है।
प्रशासन का मानना है कि फ्लाईओवर बनने के बाद ट्रैफिक का दबाव बंट जाएगा और पंचकूला, मोहाली तथा जीरकपुर की ओर जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के सफर का समय भी कम हो सकेगा।
पर्यावरण और मास्टर प्लान को लेकर विवाद
परियोजना को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं भी सामने आई हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फिलहाल फ्लाईओवर निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। अदालत में दायर याचिका में दावा किया गया कि यह प्रोजेक्ट शहर के हेरिटेज स्वरूप और मास्टर प्लान के अनुरूप नहीं है।
हालांकि यूटी प्रशासन ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मास्टर प्लान-2031 में इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की अनुमति दी गई है। प्रशासन ने यह भी जानकारी दी कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए काटे जाने वाले प्रत्येक पेड़ के बदले पांच पौधे लगाने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत लगभग 2,799 पौधे लगाए जाएंगे।
पहले चरण का काम जल्द शुरू होने की संभावना
ट्रिब्यून चौक पर बनने वाले पहले फ्लाईओवर का ठेका हाल ही में सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया है। लगभग 148 करोड़ रुपये की लागत वाले इस हिस्से में फ्लाईओवर के साथ रोटरी और अंडरपास भी बनाए जाएंगे। प्रशासन ने निर्माण कार्य मई 2026 से शुरू करने और अगले दो वर्षों में इसे पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी हो जाती है तो चंडीगढ़-जीरकपुर मार्ग उत्तर भारत के सबसे आधुनिक और तेज ट्रैफिक कॉरिडोर में शामिल हो सकता है।




