न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ने हाल ही में ब्रिटेन के राजा King Charles III और रानी Queen Camilla से मुलाकात की। यह मुलाकात उस समय हुई जब शाही दंपति 9/11 मेमोरियल पहुंचे थे और 11 सितंबर 2001 के हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। इस बैठक से पहले मेयर ने संकेत दिया था कि यदि उन्हें अलग से बात करने का अवसर मिला, तो वे ऐतिहासिक Koh-i-Noor हीरे को भारत लौटाने का मुद्दा उठा सकते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि इस संक्षिप्त मुलाकात के दौरान यह विषय सामने आया या नहीं। मेयर के कार्यालय की ओर से भी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
कोहिनूर: 19वीं सदी से ब्रिटेन में
कोहिनूर हीरा 1849 से ब्रिटेन के पास है। द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध के बाद जब अंग्रेजों ने पंजाब पर कब्जा किया, तब कम उम्र के महाराजा Duleep Singh से लाहौर संधि पर हस्ताक्षर करवाए गए। इस समझौते के तहत न केवल राज्य ब्रिटिश नियंत्रण में गया, बल्कि कोहिनूर भी ब्रिटिश हुकूमत को सौंप दिया गया। बाद में यह हीरा ब्रिटेन ले जाकर महारानी Queen Victoria को दे दिया गया।
इतिहास में कई हाथों से गुजरा यह हीरा
कोहिनूर का इतिहास बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। माना जाता है कि यह हीरा मुगलों के पास भी रहा और बाद में 1739 में फारसी शासक Nader Shah इसे भारत से ले गया। उनकी मौत के बाद यह अफगान शासकों के पास पहुंचा और फिर सिख साम्राज्य के महाराजा Ranjit Singh के पास आया।
भारत का दावा और लगातार उठती मांग
आज कोहिनूर ब्रिटिश शाही ताज का हिस्सा है और Tower of London में सुरक्षित रखा गया है। भारत कई बार इस हीरे को वापस पाने का दावा कर चुका है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। महारानी एलिजाबेथ के निधन के बाद भी यह मुद्दा समय-समय पर चर्चा में आता रहा है।
कीमत और प्रतीकात्मक महत्व
कोहिनूर को दुनिया के सबसे प्रसिद्ध हीरों में गिना जाता है। इसकी अनुमानित कीमत सैकड़ों मिलियन डॉलर बताई जाती है, लेकिन इसकी असली अहमियत इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व में है—जो आज भी भारत और ब्रिटेन के बीच बहस का विषय बना हुआ है।




