पंजाब को IT और सेमीकंडक्टर हब बनाने की तैयारी, आंध्र मॉडल का अध्ययन कर तैयार होगा नया आर्थिक विजन: सांसद सतनाम सिंह संधू

पंजाब को IT और सेमीकंडक्टर हब बनाने की तैयारी, आंध्र मॉडल का अध्ययन कर तैयार होगा नया आर्थिक विजन: सांसद सतनाम सिंह संधू

राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा है कि पंजाब को आर्थिक ठहराव से बाहर निकालने और राज्य को नई औद्योगिक दिशा देने के लिए एक व्यापक विकास रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इस योजना के तहत आंध्र प्रदेश के तेज प्रशासनिक और तकनीकी विकास मॉडल का अध्ययन कर पंजाब में निवेश, रोजगार और आधुनिक उद्योगों को बढ़ावा देने की रणनीति बनाई जाएगी।

इसी सिलसिले में राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने श्री एन. चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच आंध्र प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और टेक्नोलॉजी आधारित गवर्नेंस मॉडल पर विस्तृत चर्चा हुई।

संधू ने कहा कि पंजाब को केवल पारंपरिक कृषि आधारित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रखा जा सकता। राज्य को अब IT, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, हेल्थ सर्विसेज और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य पंजाब को देश के एक बहुआयामी विकास केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश में लागू “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” से आगे बढ़कर “स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस” मॉडल ने निवेश आकर्षित करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इसी नीति के चलते राज्य को 8.67 लाख करोड़ रुपए के 216 मेगा इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट मिले हैं।

संधू ने कहा कि यदि पंजाब में भाजपा सरकार बनती है तो इसी प्रकार का हाई-स्पीड प्रशासनिक मॉडल लागू करने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने आंध्र के “4P मॉडल” — पीपल, पब्लिक, प्राइवेट और पार्टनरशिप — को भी पंजाब के लिए उपयोगी बताया। इस मॉडल के तहत उद्योगों को 100 प्रतिशत SGST रिफंड और रियायती दरों पर जमीन उपलब्ध कराई जाती है।

उन्होंने विशेष रूप से आंध्र प्रदेश की “वन फैमिली, वन एंटरप्रेन्योर” योजना की सराहना की और कहा कि यह मॉडल पंजाब के गांवों और शहरों में स्वरोजगार बढ़ाने और युवाओं की उद्यमशीलता क्षमता को मजबूत करने में कारगर साबित हो सकता है।

अपने दौरे के दौरान सांसद संधू ने देश के पहले स्वदेशी ओपन-एक्सेस क्वांटम कंप्यूटर “अमरावती क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी” का भी अवलोकन किया। इसके साथ उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार के “रियल-टाइम गवर्नेंस सेंटर” का दौरा किया, जहां सभी सरकारी विभागों को एक डिजिटल कमांड सिस्टम से जोड़ा गया है।

उन्होंने कहा कि पंजाब को भी पारदर्शी, जवाबदेह और तेज प्रशासन के लिए इसी तरह के टेक्नोलॉजी-आधारित गवर्नेंस मॉडल की जरूरत है। उनके अनुसार इससे जनता की शिकायतों का तेजी से समाधान और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकती है।

संधू ने Hyderabad के IT विकास मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि 1998 में हाई-टेक सिटी, साइबर टावर्स और जीनोम वैली की स्थापना ने शहर को वैश्विक IT हब में बदल दिया। आज वहां 1500 से अधिक कंपनियां कार्यरत हैं और लाखों युवाओं को रोजगार मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश अब विशाखापत्तनम में प्रस्तावित गूगल के 15 बिलियन डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के जरिए AI और डेटा इकोनॉमी में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने IBM, IIT मद्रास और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े संस्थानों के साथ समझौते किए हैं और लाखों युवाओं को क्वांटम कंप्यूटिंग, AI और साइबर सिक्योरिटी की ट्रेनिंग देने की योजना पर काम हो रहा है।

संधू ने पंजाब के औद्योगिक भविष्य को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने “इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन” के तहत मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी (SML) के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए 4,500 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं। यदि पंजाब अपनी औद्योगिक नीतियों को आधुनिक तकनीकी जरूरतों के अनुरूप ढालता है तो मोहाली देश का बड़ा चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है।

इसके अलावा उन्होंने आंध्र प्रदेश के “क्लाइमेट रेजिलिएंट जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग” मॉडल की भी सराहना की और कहा कि पंजाब में फसल विविधीकरण के लिए इस तरह की प्राकृतिक खेती प्रणाली पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

बैठक में भारत की भविष्यवादी “ग्लोबल सिटी” अमरावती परियोजना पर भी चर्चा हुई। इस शहर को वर्ष 2050 तक 35 लाख आबादी और 15 लाख रोजगार क्षमता के साथ विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। यहां अलग-अलग थीम आधारित सब-सिटीज बनाई जा रही हैं और इसे दुनिया का पहला 100 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी आधारित महानगर बनाने की दिशा में काम चल रहा है।

संधू ने कहा कि पंजाब के लोग अब पारदर्शी शासन, आर्थिक पुनरुद्धार और स्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना था कि यदि पंजाब को आधुनिक तकनीक, तेज प्रशासन और निवेश आधारित विकास मॉडल से जोड़ा जाए तो राज्य में रोजगार के बड़े अवसर पैदा किए जा सकते हैं और युवाओं का विदेशों की ओर पलायन भी कम किया जा सकता है।