पंजाब की सियासत में उस समय नई हलचल पैदा हो गई जब शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम मजीठिया ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि एक केंद्रीय जांच एजेंसी ने पंजाब विजीलेंस ब्यूरो के कार्यालय में छापेमारी की है। मजीठिया के इस दावे के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया।
मजीठिया ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि कथित रिश्वतखोरी और एक बड़े सौदे से जुड़े मामले की जांच चल रही है। उन्होंने दावा किया कि एक फाइव स्टार होटल से संबंधित कथित डील को लेकर जांच एजेंसियां सक्रिय हुई हैं। अकाली नेता ने यह भी कहा कि आने वाले समय में इस मामले से जुड़ी और “सनसनीखेज” जानकारियां सामने लाई जाएंगी।
हालांकि खबर लिखे जाने तक किसी भी सरकारी एजेंसी या पंजाब सरकार की ओर से इस कथित छापेमारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस दावे को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सूत्रों के हवाले से यह जानकारी भी सामने आई कि केंद्रीय जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation की एक टीम ने देर रात मोहाली के सेक्टर-68 स्थित विजीलेंस कार्यालय में पहुंचकर कुछ दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की। बताया जा रहा है कि टीम करीब ढाई घंटे तक कार्यालय में मौजूद रही और बाद में कुछ रिकॉर्ड अपने साथ लेकर रवाना हुई। हालांकि इस कार्रवाई की प्रकृति और उद्देश्य को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस दावे में सच्चाई पाई जाती है तो यह मामला पंजाब की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है। खासकर ऐसे समय में जब राज्य में पहले से ही केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिशोध को लेकर बहस चल रही है।
विपक्षी दल लगातार पंजाब सरकार और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष भाजपा और केंद्र सरकार पर एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगा रहा है। ऐसे माहौल में विजीलेंस कार्यालय पर कथित कार्रवाई की खबर ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।
उधर प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि किसी जांच एजेंसी ने कोई कार्रवाई की भी है तो वह कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगी। लेकिन आधिकारिक पुष्टि के अभाव में फिलहाल पूरे मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा रही।
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बता रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या केंद्रीय एजेंसियां या पंजाब सरकार इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती हैं या नहीं।




