पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच वाहनों से जुड़े शुल्क को लेकर नया विवाद सामने आया है। पंजाब सीमा पर कुछ निहंग संगठनों द्वारा हिमाचल प्रदेश नंबर वाले वाहनों से कथित तौर पर “खालसा कर” के नाम पर राशि मांगे जाने के मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे राज्य के नागरिकों और पर्यटकों के हितों से जुड़ा मामला बताया है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मुद्दे को सीधे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के समक्ष उठाया है। राज्य सरकार का कहना है कि किसी भी गैर-सरकारी संगठन या समूह को सार्वजनिक सड़कों पर वाहनों से किसी प्रकार का शुल्क या कर वसूलने का अधिकार नहीं है और इस मामले में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पंजाब सीमा पर हिमाचल के वाहनों को रोककर “खालसा कर” के नाम पर धनराशि मांगने की घटनाएं चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यटन सीजन शुरू होने से ठीक पहले इस तरह की गतिविधियां हिमाचल की पर्यटन छवि को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती हैं।
नेगी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल है और हर वर्ष लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। ऐसे समय में जब पर्यटन गतिविधियां तेज होने वाली हैं, सीमा पर इस प्रकार के विवाद पैदा होना राज्य के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं और किसी भी प्रकार का तनाव पैदा करने वाले कदमों को रोकना जरूरी है।
मंत्री ने हाल ही में कुल्लू जिले के कसोल क्षेत्र में हुई एक घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें पंजाब के कुछ पर्यटकों पर स्थानीय व्यक्ति को गोली मारकर घायल करने का आरोप लगा था। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद सीमा पर कर वसूली जैसे मामले माहौल को और अधिक संवेदनशील बना सकते हैं।
दूसरी ओर, “खालसा कर” अभियान से जुड़े निहंग समूह के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति से जबरन पैसा लेना नहीं है। उनका दावा है कि यह केवल एक सांकेतिक विरोध है, जिसके माध्यम से हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बाहरी राज्यों के वाहनों पर लगाए जाने वाले प्रवेश शुल्क के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई जा रही है।
समूह के नेताओं का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करने वाले अन्य राज्यों के वाहनों से शुल्क लिया जाता है, इसलिए वे भी प्रतीकात्मक रूप से यात्रियों से सहयोग राशि देने की अपील कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने दावा किया कि किसी वाहन चालक पर भुगतान के लिए दबाव नहीं बनाया जाता।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक अप्रैल से बाहरी राज्यों के वाहनों पर लगने वाले प्रवेश शुल्क में संशोधन किया था। नई दरों के तहत विभिन्न श्रेणियों के वाहनों के लिए शुल्क बढ़ाया गया है, जो वाहन के प्रकार के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार का तर्क है कि यह राशि सड़क बुनियादी ढांचे के रखरखाव, पर्यटन सुविधाओं के विकास और स्थानीय संसाधनों पर बढ़ते दबाव को संतुलित करने के लिए आवश्यक है।
अब यह मामला दोनों राज्यों की सरकारों के स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर पर्यटन, अंतरराज्यीय आवाजाही और दोनों राज्यों के संबंधों पर पड़ सकता है। ऐसे में सभी की नजरें पंजाब सरकार की आगामी कार्रवाई और दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हुई हैं।




