पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों की स्वास्थ्य व्यवस्था में लगातार सामने आ रही कमियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की खाली पड़ी पोस्टों को भरने के लिए तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए और जिला स्तर पर आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने कहा कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।
चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आज के समय में सीटी स्कैन, एमआरआई और आईसीयू जैसी सुविधाओं को विलासिता नहीं माना जा सकता। ये हर बड़े सरकारी अस्पताल में उपलब्ध होना जरूरी है ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके और उन्हें निजी अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े।
अदालत ने दोनों राज्यों में डॉक्टरों की भारी कमी पर भी गहरी चिंता जताई। सुनवाई के दौरान सामने आया कि पंजाब में मेडिकल अफसर (जनरल) के 2042 पद और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के 835 पद खाली पड़े हैं। वहीं हरियाणा सरकार अदालत के समक्ष रिक्त पदों का स्पष्ट आंकड़ा पेश नहीं कर सकी, जिस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। अदालत ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से खाली पद रहना सीधे तौर पर आम जनता के इलाज को प्रभावित करता है।
खंडपीठ ने मालेरकोटला जिला अस्पताल में आईसीयू सुविधा उपलब्ध न होने पर भी सवाल उठाए और कहा कि जिला अस्पतालों में न्यूनतम आपात चिकित्सा सुविधाओं का अभाव गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। अदालत ने सरकारों को निर्देश दिए कि सभी जिला अस्पतालों की स्थिति का व्यापक आकलन कर जरूरी संसाधन तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पतालों में लगने वाली आधुनिक मशीनों की खरीद, स्थापना और संचालन सरकार की निगरानी में होना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि स्वास्थ्य सेवाओं जैसी मूलभूत जिम्मेदारियों को पूरी तरह निजी एजेंसियों के हवाले करना उचित नहीं माना जा सकता। यदि सरकारें अपनी मूलभूत जिम्मेदारियों से पीछे हटती हैं तो इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों पर पड़ता है।
यह मामला भीष्म किंगर द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उठा। अदालत ने दोनों राज्य सरकारों को अगली सुनवाई से पहले विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को निर्धारित की गई है, जिसमें भर्ती प्रक्रिया और स्वास्थ्य सुविधाओं की प्रगति का ब्यौरा पेश करना होगा।




