अमेरिका और भारत के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताएं अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को अंतिम रूप दिए जाने में अब केवल कुछ सप्ताह का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली और वॉशिंगटन दोनों ही इस समझौते को जल्द पूरा करने के इच्छुक हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के समक्ष पेश होते हुए रुबियो ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का अहम रणनीतिक सहयोगी बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिहाज से भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।
रुबियो ने QUAD समूह को भी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि इस वर्ष सदस्य देशों के नेताओं की बैठक आयोजित करने की योजना पर काम चल रहा है। उनके मुताबिक, यह बैठक किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हो सकती है, जिससे सभी नेताओं की मौजूदगी सुनिश्चित करना आसान होगा। QUAD में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद अमी बेरा के सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि QUAD देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है और नेताओं की मुलाकात इस प्रक्रिया को और गति देगी। हालांकि उन्होंने बैठक की तारीख या स्थान को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
इस दौरान रुबियो ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव का भी उल्लेख किया। विदेश विभाग को सौंपे गए लिखित बयान में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने में भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि स्थिति दो परमाणु शक्तियों के बीच व्यापक संघर्ष की ओर बढ़ रही थी, जिसे कूटनीतिक प्रयासों के जरिए नियंत्रित किया गया।
हालांकि भारत पहले ही अमेरिका के इस दावे को खारिज कर चुका है। नई दिल्ली का कहना है कि मई में हुए सैन्य टकराव का अंत दोनों देशों के सैन्य और सरकारी अधिकारियों के बीच हुई सीधी बातचीत के जरिए हुआ था और इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता शामिल नहीं थी।




