भारत और नेपाल के रिश्ते ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक जुड़ाव से मजबूत माने जाते हैं। दोनों देशों के नागरिकों के बीच लंबे समय से घनिष्ठ संबंध रहे हैं, लेकिन सीमा से जुड़े कुछ विवाद ऐसे हैं जो समय-समय पर दोनों पड़ोसियों के बीच मतभेद की वजह बन जाते हैं। हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के एक बयान के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है।
1816 की संधि से शुरू हुआ विवाद
भारत-नेपाल सीमा विवाद की पृष्ठभूमि 1816 में हुई सुगौली संधि से जुड़ी हुई है। इस समझौते में महाकाली (काली) नदी को दोनों देशों की सीमा माना गया था। हालांकि बाद में नदी के वास्तविक उद्गम स्थल को लेकर दोनों पक्षों के बीच अलग-अलग व्याख्याएं सामने आईं, जिससे विवाद की नींव पड़ गई।
कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा पर टकराव
सीमा विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्र हैं, जो भारत, नेपाल और चीन की सीमाओं के निकट स्थित हैं। भारत का दावा है कि काली नदी का उद्गम कालापानी क्षेत्र के पास है, इसलिए यह इलाका भारतीय सीमा में आता है। वहीं नेपाल का कहना है कि नदी की शुरुआत लिंपियाधुरा से होती है और इसी आधार पर वह पूरे क्षेत्र पर अपना दावा करता है।
2020 में बढ़ी थी तनातनी
विवाद उस समय और गहरा गया जब भारत ने लिपुलेख तक संपर्क मार्ग का उद्घाटन किया। इसके जवाब में नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को अपने क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया। इस कदम के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई थी।
सुस्ता क्षेत्र भी विवाद का हिस्सा
उत्तराखंड के अलावा बिहार सीमा के पास स्थित सुस्ता क्षेत्र को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद है। माना जाता है कि नारायणी नदी का प्रवाह समय के साथ बदलने से सीमा निर्धारण को लेकर भ्रम पैदा हुआ। नेपाल का दावा है कि यह इलाका मूल रूप से उसके हिस्से में आता था, जबकि नदी के मार्ग परिवर्तन के बाद स्थिति जटिल हो गई।
कैलाश मानसरोवर मार्ग पर उठे सवाल
हाल के दिनों में भारत और चीन के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग को दोबारा शुरू करने पर सहमति बनने के बाद नेपाल ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। नेपाल का कहना है कि यदि यात्रा मार्ग विवादित क्षेत्र से होकर गुजरता है, तो उससे जुड़े किसी भी फैसले में उसकी सहमति आवश्यक है। इसी मुद्दे ने एक बार फिर सीमा विवाद को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अधिकांश सीमा पर सहमति
हालांकि दोनों देशों के बीच करीब 1,850 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है और अधिकांश हिस्सों पर सहमति बनी हुई है, लेकिन कालापानी-लिपुलेख और सुस्ता जैसे कुछ क्षेत्रों को लेकर विवाद अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका है। यही कारण है कि समय-समय पर यह मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में तनाव का कारण बन जाता है।
(Photo : AI Generated)




