भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की दूरी मई में भी बनी रही। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने महीने के दौरान 32,963 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की, जिससे चालू वर्ष 2026 में कुल बिकवाली का आंकड़ा बढ़कर करीब 2.25 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया। NSDL के आंकड़ों के अनुसार, इस साल विदेशी निवेशकों ने फरवरी को छोड़कर हर महीने भारतीय बाजार से पैसा निकाला है। दिलचस्प बात यह है कि 2026 की अब तक की बिकवाली, पूरे 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपए की निकासी से भी अधिक हो चुकी है।
विदेशी निवेशक भारत से क्यों बना रहे दूरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कंपनियों की आय वृद्धि (Earnings Growth) उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। दूसरी ओर अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजार बेहतर रिटर्न दे रहे हैं। यही वजह है कि विदेशी फंड अपनी पूंजी इन देशों की ओर शिफ्ट कर रहे हैं। इसके अलावा AI सेक्टर में तेज उछाल ने भी ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों को निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है।
कमजोर रुपया भी बड़ी वजह
रुपये में लगातार गिरावट ने विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 2026 में अब तक भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले लगभग 6% कमजोर हो चुकी है, जबकि पिछले एक वर्ष में इसमें करीब 10% की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपए की कमजोरी से विदेशी निवेशकों का डॉलर आधारित रिटर्न घट जाता है, जिससे वे भारतीय बाजार में निवेश कम करने लगते हैं।
कच्चे तेल की महंगाई ने बढ़ाया दबाव
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से बढ़कर 95-105 डॉलर प्रति बैरल के दायरे तक पहुंच गया, जिससे भारत के आयात खर्च और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ा है।
मई में निकासी जारी, लेकिन रफ्तार घटी
हालांकि, पिछले महीनों की तुलना में मई में बिकवाली की गति कुछ धीमी रही। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक व्यापार तनाव और टैरिफ संबंधी चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन निवेशकों का भरोसा पहले के मुकाबले थोड़ा बेहतर हुआ है। इसी वजह से आउटफ्लो में कमी देखने को मिली।
2026 में FPI का मासिक ट्रेंड
- जनवरी: ₹35,962 करोड़ की निकासी
- फरवरी: ₹22,615 करोड़ का निवेश (17 महीनों का सबसे बड़ा इनफ्लो)
- मार्च: ₹1.17 लाख करोड़ की रिकॉर्ड बिकवाली
- अप्रैल: ₹60,847 करोड़ का आउटफ्लो
- मई: ₹32,963 करोड़ की निकासी
आगे क्या रह सकता है रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक रुपए की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और देश के आर्थिक संकेतकों में ठोस सुधार नहीं दिखता, तब तक विदेशी निवेशकों की बड़े पैमाने पर वापसी की संभावना कम नजर आती है।
FPI क्या होते हैं?
फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) वे विदेशी निवेशक या संस्थाएं होती हैं जो किसी देश के शेयर, बॉन्ड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश करती हैं। भारतीय बाजार में इनके निवेश और निकासी का असर बाजार की दिशा और निवेशकों के भरोसे पर महत्वपूर्ण रूप से पड़ता है।




