पश्चिम बंगाल की राजनीति में हालिया विधानसभा चुनावों के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी ने भारी जीत दर्ज करते हुए राज्य में नई सरकार बनाई, जिसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस का लंबे समय से चला आ रहा शासन खत्म हो गया। इसके बाद सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर होने लगी।
हालांकि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद ममता बनर्जी को मिलने वाली कई विशेष सरकारी सुविधाओं में कटौती की गई है, लेकिन उनकी सुरक्षा श्रेणी में कोई बदलाव नहीं किया गया। उन्हें अब भी Z+ कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की जा रही है। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत उनकी सुरक्षा में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं, जो अलग-अलग शिफ्टों में ड्यूटी करते हैं।
मुख्यमंत्री रहते हुए ममता बनर्जी के आवास और कार्यालय के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग, स्कैनिंग सिस्टम और ट्रैफिक कंट्रोल जैसी व्यवस्थाएं लागू रहती थीं। सरकार बदलने के बाद इन विशेष इंतजामों को काफी हद तक हटा लिया गया है। अब केवल आवश्यक सुरक्षा प्रबंध ही बनाए गए हैं।
ममता बनर्जी अन्य कई मुख्यमंत्रियों की तरह सरकारी बंगले में नहीं रहतीं, बल्कि कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने निजी आवास में ही निवास करती हैं। पहले उनके घर के आसपास सुरक्षा का कड़ा घेरा देखने को मिलता था, लेकिन पद से हटने के बाद वहां पुलिस तैनाती और बैरिकेडिंग में कमी की गई है।
दरअसल, भारत में नेताओं की सुरक्षा उनके पद से ज्यादा संभावित खतरे के आकलन पर तय की जाती है। ममता बनर्जी भले ही अब मुख्यमंत्री नहीं हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल की सक्रिय और प्रभावशाली नेताओं में उनकी गिनती अब भी होती है। यही वजह है कि उनकी हाई-लेवल सिक्योरिटी जारी रखने का फैसला लिया गया है।




