पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े कथित रिश्वत मामले की सुनवाई सोमवार को सीबीआई की विशेष अदालत में हुई, जहां मोहाली के डीसी कार्यालय को अदालत की कड़ी नाराजगी झेलनी पड़ी।
भुल्लर ने अपनी गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठाते हुए अदालत में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी गिरफ्तारी से संबंधित सच्चाई सामने लाने के लिए मोहाली डीसी कार्यालय परिसर की सीसीटीवी फुटेज अहम सबूत हो सकती है। इसी आधार पर उन्होंने फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की थी।
अदालत ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए पहले ही डीसी कार्यालय को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि संबंधित समय की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए। हालांकि, आदेश के बावजूद फुटेज को संरक्षित नहीं किया गया, जिससे अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि अगली तारीख तक सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित नहीं की गई, तो डीसी ऑफिस के सुपरिंटेंडेंट को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा।
इस मामले में सीबीआई की भूमिका भी अहम बनी हुई है, क्योंकि एजेंसी ने पहले ही मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। साथ ही, सीबीआई ने इस केस की सुनवाई रोजाना आधार पर करने की मांग करते हुए अदालत में एक अर्जी भी दाखिल की है, ताकि मामले का जल्द निपटारा हो सके।
मामले की अगली सुनवाई 6 मई को निर्धारित की गई है। माना जा रहा है कि उस दिन न केवल फुटेज को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि रोजाना सुनवाई को लेकर भी अदालत महत्वपूर्ण फैसला ले सकती है।
यह मामला प्रशासनिक जिम्मेदारी और न्यायिक आदेशों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है, जिस पर अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

