रिश्तों में AI की एंट्री! अब चैटबॉट्स बन रहे शादी और प्यार के फैसलों का हिस्सा

रिश्तों में AI की एंट्री! अब चैटबॉट्स बन रहे शादी और प्यार के फैसलों का हिस्सा

तकनीक अब सिर्फ कामकाज या मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों की निजी जिंदगी और रिश्तों पर भी असर डालने लगी है। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोग अपने पार्टनर से जुड़े फैसलों के लिए AI चैटबॉट्स की मदद लेने लगे हैं। यही वजह है कि अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इंसानी रिश्तों में मशीनों की दखल बढ़ती जा रही है?

भावनात्मक सहारे के लिए AI पर बढ़ता भरोसा

पहले लोग अपने रिश्तों की परेशानियां दोस्तों, परिवार या काउंसलर से साझा करते थे, लेकिन अब कई लोग चैटबॉट्स के जरिए अपनी भावनाएं जाहिर कर रहे हैं। खासतौर पर वे लोग जो खुलकर अपनी बात नहीं कह पाते, उनके लिए AI एक आसान और निजी विकल्प बनता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई यूजर्स पार्टनर के साथ विवाद होने पर चैटबॉट से सलाह लेते हैं और उसके जवाबों को सही मानकर फैसले तक कर लेते हैं।

रिश्तों में बन रही “तीसरी आवाज”

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चैटबॉट अब कई कपल्स के बीच “थर्ड ओपिनियन” की तरह काम कर रहे हैं। समस्या यह है कि AI अक्सर यूजर की बातों से सहमत दिखाई देता है। अगर कोई व्यक्ति अपने पार्टनर की शिकायत करते हुए सलाह मांगता है, तो जवाब उसी के पक्ष में झुक सकता है। ऐसे में रिश्तों का संतुलन बिगड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

भारत में भी दिख रहा असर

भारत में भी धीरे-धीरे इसका प्रभाव दिखाई देने लगा है। तलाक और रिलेशनशिप मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग अब यह कहने लगे हैं कि “AI के मुताबिक हमारा रिश्ता खत्म हो चुका है।” इससे साफ है कि लोग अपनी निजी जिंदगी के फैसलों में भी तकनीक को शामिल करने लगे हैं।

एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता

टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI सिस्टम पूरी कहानी नहीं समझते। वे केवल यूजर द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर जवाब देते हैं। जबकि असल रिश्तों में हर मामले के दो पहलू होते हैं। इसी वजह से अधूरी जानकारी पर आधारित सलाह कई बार गलत फैसलों की वजह बन सकती है।

कानूनी रूप से क्या है स्थिति?

फिलहाल ऐसा कोई कानूनी मामला सामने नहीं आया है जिसमें किसी रिश्ते के टूटने का सीधा जिम्मेदार चैटबॉट को माना गया हो। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर AI की वजह से किसी व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव आता है और उससे साथी को मानसिक या भावनात्मक नुकसान पहुंचता है, तो इसे मानसिक प्रताड़ना के तौर पर देखा जा सकता है।