हिंदू पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन पवित्र स्नान, दान-पुण्य और पितरों का तर्पण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि अमावस्या पर किए गए शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। खासतौर पर वैशाख माह की अमावस्या को अत्यंत फलदायी माना जाता है।
कब है वैशाख अमावस्या?
साल 2026 में वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को पड़ रही है। अमावस्या तिथि का समापन शाम 5 बजकर 21 मिनट पर होगा। ऐसे में पूरे दिन धार्मिक कार्यों के लिए शुभ समय रहेगा।
दिनभर के प्रमुख शुभ मुहूर्त
अगर आप इस दिन पूजा-पाठ या विशेष अनुष्ठान करना चाहते हैं, तो ये शुभ समय ध्यान में रखें:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:25 से 05:09 तक
- प्रातः संध्या: 04:47 से 05:54 तक
- अभिजित मुहूर्त: 11:55 से 12:47 तक
- विजय मुहूर्त: 02:30 से 03:22 तक
- गोधूलि काल: 06:47 से 07:09 तक
- सायं संध्या: 06:48 से 07:54 तक
- अमृत काल: 09:50 से 11:18 तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरे दिन प्रभावी रहेगा
क्यों है यह दिन खास?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, वैशाख अमावस्या से ही त्रेता युग की शुरुआत मानी जाती है। इसलिए इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। पितृ दोष से मुक्ति पाने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है।
अमावस्या पर कैसे करें पूजा?
इस दिन की शुरुआत जल्दी उठकर पवित्र स्नान से करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और पितरों का तर्पण करें। जो लोग व्रत रखते हैं, वे पूरे दिन सात्विक आहार का पालन करें।
- भगवान विष्णु की पूजा करें
- पितरों के नाम से जल अर्पण करें
- गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें
- दिनभर जप, ध्यान और भक्ति में समय बिताएं
- शाम को दीपदान करना बेहद शुभ माना जाता है
क्या दान करना शुभ रहेगा?
वैशाख अमावस्या के दिन जल, सत्तू और गुड़ का दान विशेष फलदायी बताया गया है। ऐसा करने से जीवन की समस्याएं कम होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
अगर आप सोच रहे हैं कि अमावस्या आज है या कल तो नोट कर लें, इस बार यह 17 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन किए गए छोटे-छोटे पुण्य कार्य भी आपके जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।




