सरकार बेचेगी सेंट्रल बैंक में 8% हिस्सा, OFS से जुटाएगी ₹2455 करोड़

सरकार बेचेगी सेंट्रल बैंक में 8% हिस्सा, OFS से जुटाएगी ₹2455 करोड़

सरकार ने Central Bank of India में अपनी हिस्सेदारी घटाने का फैसला किया है। इसके तहत ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 8% तक शेयर बेचे जाएंगे। इस प्रक्रिया से सरकार करीब ₹2,455 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। शेयर बिक्री के लिए ₹31 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है, जो पिछले कारोबारी दिन के क्लोजिंग प्राइस ₹33.94 से लगभग 8.5% कम है।

इस ऐलान का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। शुक्रवार को बैंक के शेयर में 5% से ज्यादा की कमजोरी आई और भाव करीब ₹32 के आसपास कारोबार करता दिखा। बीते एक महीने में स्टॉक करीब 13% तक गिर चुका है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, OFS पहले नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए 22 मई 2026 को खुलेगा, जबकि रिटेल निवेशक और बैंक कर्मचारी 25 मई 2026 को बोली लगा सकेंगे। निवेशक सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक आवेदन कर पाएंगे।

इस ऑफर में शुरुआती तौर पर सरकार करीब 4% हिस्सेदारी यानी 36 करोड़ से ज्यादा इक्विटी शेयर बेचेगी। हालांकि अगर निवेशकों की ओर से अच्छी मांग मिलती है तो अतिरिक्त 4% शेयर और बेचने का विकल्प भी रखा गया है। इसे ग्रीन शू ऑप्शन कहा जाता है। फिलहाल बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 89.27% है। यह बिक्री सरकार की विनिवेश नीति और पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों को पूरा करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

ऑफर के तहत नॉन-रिटेल कैटेगरी में रिजर्व शेयरों का कम से कम 25% हिस्सा म्यूचुअल फंड्स और बीमा कंपनियों को दिया जाएगा, बशर्ते उनकी बोलियां तय फ्लोर प्राइस या उससे ऊपर हों। वहीं रिटेल निवेशकों के लिए कुल ऑफर का कम से कम 10% हिस्सा आरक्षित रहेगा। बैंक कर्मचारियों के लिए भी 75 लाख शेयर अलग रखे गए हैं। पात्र कर्मचारी ₹5 लाख तक के शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं और चाहें तो रिटेल कैटेगरी में भी अलग से बोली लगा सकते हैं।

सरकार ने साफ किया है कि OFS के दौरान भी बैंक के शेयर सामान्य तरीके से बाजार में ट्रेड होते रहेंगे। हालांकि बाजार परिस्थितियों या कमजोर मांग की स्थिति में ऑफर वापस लेने का अधिकार सुरक्षित रहेगा। इस पूरी हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया के लिए Goldman Sachs की भारतीय इकाई को ब्रोकर नियुक्त किया गया है। यह OFS सेबी और स्टॉक एक्सचेंज के नियमों के तहत आयोजित किया जाएगा।

दरअसल, OFS ऐसा तरीका होता है जिसमें प्रमोटर या सरकार अपनी हिस्सेदारी सीधे बाजार के जरिए निवेशकों को बेचती है। वहीं ग्रीन शू ऑप्शन के तहत जरूरत पड़ने पर तय हिस्सेदारी से ज्यादा शेयर बेचने की अनुमति रहती है।