हरियाणा का ग्रीन विजन: 100 करोड़ रुपये के क्लाइमेट फंड से पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी नई गति

हरियाणा का ग्रीन विजन: 100 करोड़ रुपये के क्लाइमेट फंड से पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी नई गति

जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण की चुनौतियों के बीच हरियाणा सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक महत्वाकांक्षी कदम उठाने का फैसला किया है। राज्य में जल्द ही 100 करोड़ रुपये का ‘ग्रीन क्लाइमेट फंड’ स्थापित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना और सतत विकास को बढ़ावा देना होगा। सरकार का मानना है कि यह फंड आने वाले वर्षों में हरियाणा को हरित और स्वच्छ राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब केवल वैश्विक चिंता का विषय नहीं रह गए हैं, बल्कि राज्यों और स्थानीय स्तर पर भी इनके प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सरकार ने कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित फंड के माध्यम से इलेक्ट्रिक और शून्य-उत्सर्जन परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्ष तकनीकों, जल संरक्षण परियोजनाओं, शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र बढ़ाने, जलवायु-अनुकूल खेती और प्रकृति आधारित विकास मॉडल को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचार और नई तकनीकों को भी बढ़ावा देना है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को गुरुग्राम में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं और अभियानों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। कार्यक्रम में विशेषज्ञ, पर्यावरणविद, उद्योग प्रतिनिधि, छात्र और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी भाग लेंगे। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किए जाने की भी संभावना है।

इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम ‘प्रकृति से प्रेरित-जलवायु के लिए-हमारे भविष्य के लिए’ रखी गई है। इसी थीम को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जैव विविधता बढ़ाने और हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार का मानना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर ही भविष्य की चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

राव नरबीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार यमुना नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन को भी प्राथमिकता दे रही है। हरियाणा से गुजरने वाले लगभग 313 किलोमीटर लंबे यमुना नदी क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने, बिना उपचारित गंदे पानी के प्रवाह को रोकने, औद्योगिक इकाइयों की निगरानी मजबूत करने और नदी तटों पर हरित पट्टी विकसित करने जैसे कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की निगरानी में चलाए जाने वाले इस विशेष अभियान के अंतर्गत भूजल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और नदी तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि यमुना में गिरने वाले सभी नालों के पानी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार हो और नदी की पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रीन क्लाइमेट फंड का प्रभावी उपयोग किया गया तो इससे न केवल प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि हरित रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरणीय नवाचार और टिकाऊ विकास के नए मॉडल विकसित करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। हरियाणा सरकार की यह पहल जलवायु परिवर्तन के खिलाफ राज्य स्तर पर उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों में से एक मानी जा रही है।