हरियाणा में लगातार गिरते लिंगानुपात को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। बेटियों की संख्या में गिरावट और अभियान की कमजोर मॉनिटरिंग को गंभीरता से लेते हुए चार वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि आठ अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि लिंगानुपात सुधार अभियान में किसी भी स्तर की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है, उनमें Sonipat के पुरखास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात एसएमओ डॉ. टीना आनंद, Yamunanagar के रादौर सीएचसी के एसएमओ डॉ. विजय परमार, Rohtak के छीरी सीएचसी में कार्यरत एसएमओ डॉ. सतपाल तथा Narnaul के सहलांग सीएचसी में तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रभा शामिल हैं।
यह कार्रवाई स्वास्थ्य मंत्री Arti Singh Rao के निर्देशों के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा द्वारा की गई। सरकार का कहना है कि जिन क्षेत्रों में लिंगानुपात में लगातार गिरावट दर्ज की गई, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी हो गया था। निलंबित अधिकारियों के मुख्यालय क्रमशः रोहतक, अंबाला, झज्जर और रेवाड़ी के सिविल सर्जन कार्यालयों में निर्धारित किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, स्वास्थ्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा लगातार जिलावार समीक्षा बैठकों के जरिए हालात पर नजर बनाए हुए हैं। इस महीने अब तक दो उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें अधिकारियों को बार-बार चेतावनी दी गई कि यदि लिंगानुपात में सुधार नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। बावजूद इसके कई जिलों में हालात में अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया।
सरकारी आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में राज्य का लिंगानुपात घटकर 895 तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 925 था। सबसे खराब स्थिति Charkhi Dadri में सामने आई, जहां प्रति हजार लड़कों पर केवल 769 लड़कियां दर्ज की गईं। इसके अलावा Ambala में 843, Mahendragarh में 847, Gurugram में 863 और Jind में 872 का लिंगानुपात रिकॉर्ड किया गया।
हालांकि कुछ जिलों का प्रदर्शन बेहतर भी रहा। Karnal ने 968 के लिंगानुपात के साथ राज्य में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं Faridabad और Kurukshetra में 932-932 तथा Palwal में 931 का अनुपात दर्ज किया गया। वार्षिक आंकड़ों में Panchkula 971 के साथ शीर्ष पर रहा।
सरकार का लक्ष्य राज्य में प्रति हजार लड़कों पर कम से कम 950 लड़कियों का अनुपात हासिल करना है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रूण लिंग जांच और अवैध गर्भपात जैसे मामलों पर नियंत्रण के बिना यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। इसी वजह से जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को संयुक्त रूप से अंतरराज्यीय गिरोहों के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी स्तर पर अब निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है। संदिग्ध अल्ट्रासाउंड सेंटरों, अवैध लिंग जांच नेटवर्क और भ्रूण हत्या से जुड़े मामलों की पहचान के लिए विशेष टीमें सक्रिय की जा रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में विभागीय जवाबदेही तय करने के लिए और भी अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।



